पंजाब में नशे के खिलाफ चलाया जा रहा ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान अब केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित रखने के बजाय बहुस्तरीय रणनीति के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार के मुताबिक, इस अभियान में पुलिस के साथ शिक्षक, युवा, सामुदायिक प्रतिनिधि और स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हैं। सरकार इसे पांच प्रमुख स्तंभों वाली रणनीति के रूप में पेश कर रही है, जिसमें नशे की सप्लाई पर कार्रवाई से लेकर रोकथाम और इलाज तक को शामिल किया गया है। सरकार का कहना है कि अभियान का मकसद नशे की तस्करी पर शिकंजा कसने के साथ-साथ युवाओं को नशे से दूर रखना, स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र मजबूत करना और नशे की लत से जूझ रहे लोगों को उपचार की सुविधा उपलब्ध कराना है।
पुलिस कार्रवाई पर जोर, सप्लाई नेटवर्क को निशाना
‘बिग 5’ रणनीति का पहला हिस्सा नशे की सप्लाई चेन के खिलाफ कार्रवाई पर केंद्रित है। सरकार के अनुसार, मार्च 2025 से सितंबर 2026 के बीच एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने 61,824 FIR दर्ज कीं और 81,433 लोगों को गिरफ्तार किया। इसी अवधि में सरकार ने बड़ी मात्रा में मादक पदार्थों की बरामदगी का दावा किया है। इनमें 3,918 किलो हेरोइन, 991 किलो अफीम, 47 टन पोस्त की भूसी, 1,416 किलो गांजा और करीब 65 लाख टैबलेट-कैप्सूल शामिल बताए गए हैं। पुलिस की ओर से जागरूकता के लिए भी बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। सरकार के मुताबिक, इस दौरान करीब 79 हजार जनसभाएं की गईं, जिनका उद्देश्य स्थानीय समुदायों को अभियान से जोड़ना रहा।
स्कूलों में शिक्षकों को बनाया जा रहा ‘पहली सुरक्षा पंक्ति’
रणनीति का दूसरा हिस्सा नशे की रोकथाम से जुड़ा है। सरकार के मुताबिक, प्रशिक्षित शिक्षक करीब 3,600 स्कूलों में 7.5 लाख विद्यार्थियों को 14 सप्ताह का नशा-विरोधी पाठ्यक्रम पढ़ा रहे हैं। इसके अलावा पहले चरण में 13 जिलों के करीब 25 हजार शिक्षकों को संवेदनशील बनाने की योजना है। अमृतसर, तरनतारन और फाजिल्का में लगभग 7 हजार शिक्षकों को पहले ही प्रशिक्षण दिए जाने का दावा किया गया है। इस पहल के तहत शिक्षकों को विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों, नशे की ओर बढ़ने के शुरुआती संकेत और समय रहते सहायता उपलब्ध कराने के तरीकों को लेकर जागरूक किया जा रहा है।
युवाओं को जागरूक करने पर फोकस
तीसरा स्तंभ स्कूल और कॉलेजों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर आधारित है। सरकार के मुताबिक, युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों, मानसिक स्वास्थ्य क्लब और सहपाठी नेटवर्क जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस रणनीति का उद्देश्य केवल नशे के नुकसान बताना नहीं, बल्कि युवाओं को स्वस्थ और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना है। साथ ही नशे की लत से बाहर निकल चुके लोगों की भागीदारी के जरिए युवाओं के बीच जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
गांवों और वार्डों में निगरानी नेटवर्क
‘बिग 5’ का चौथा हिस्सा सामुदायिक निगरानी से जुड़ा है। सरकार के अनुसार, सितंबर 2026 तक करीब 1.25 लाख लोग लगभग 15 हजार ग्राम एवं वार्ड रक्षा समितियों से जुड़ चुके हैं। इन समितियों के जरिए गांवों और शहरी वार्डों में नशे से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार के मुताबिक, 50 हजार से ज्यादा समिति सदस्यों को ‘नशा मुक्ति ऐप’ के इस्तेमाल का प्रशिक्षण भी दिया गया है। इसके अलावा 1 मार्च 2025 को शुरू की गई सेफ पंजाब व्हाट्सऐप हेल्पलाइन के जरिए अब तक 51 हजार से अधिक सूचनाएं मिलने का दावा किया गया है।
इलाज और पुनर्वास भी अभियान का अहम हिस्सा
पांचवां स्तंभ नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों के उपचार और पुनर्वास पर केंद्रित है। सरकार के अनुसार, पंजाब में फिलहाल 547 OOAT केंद्र, 219 नशामुक्ति केंद्र और 91 रिहैबिलिटेशन केंद्र संचालित हैं। सरकार का कहना है कि इलाज की सुविधाओं को मजबूत करने के साथ स्वास्थ्यकर्मियों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। मरीजों को उपचार के दौरान सक्रिय रखने के लिए कौशल विकास और रचनात्मक गतिविधियों को भी जोड़ा गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सरकारी नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्रों में दाखिले की संख्या 2024 में करीब 12,200 से बढ़कर 2025 में लगभग 34 हजार हो गई। सरकार इसे उपचार के प्रति लोगों की बढ़ती पहुंच और जागरूकता से जोड़ती है।
‘बिग 5’ का फोकस सिर्फ कार्रवाई नहीं
पंजाब सरकार के मुताबिक, ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ की पांच सूत्रीय रणनीति का उद्देश्य पुलिस कार्रवाई, रोकथाम, सामुदायिक भागीदारी और उपचार को एक साथ आगे बढ़ाना है।यानी अभियान का फोकस एक तरफ नशे की सप्लाई और तस्करी पर कार्रवाई करना है, तो दूसरी तरफ स्कूलों और कॉलेजों में युवाओं को जागरूक करना, गांवों में सूचना तंत्र मजबूत करना और नशे की लत से जूझ रहे लोगों को इलाज व पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराना भी इसके दायरे में है। सरकार का दावा है कि इस समन्वित मॉडल के जरिए नशे के खिलाफ लड़ाई को पुलिस थानों से आगे ले जाकर स्कूल, गांव, कॉलेज और स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।