बिहार में चौथे चरण की शिक्षक भर्ती यानी TRE-4 को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। 18 अगस्त 2026 को भर्ती का नोटिफिकेशन जारी होने के बावजूद शिक्षक अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी है। पटना के गर्दनीबाग में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी धरने पर बैठे हैं। छात्र संगठन की ओर से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र भेजकर भर्ती प्रक्रिया में बदलाव की मांग की गई है।
एक ही परीक्षा कराने की मांग
छात्र नेता और बिहार स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष दिलीप कुमार के नेतृत्व में अभ्यर्थी आंदोलन कर रहे हैं। संगठन ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में मांग की है कि TRE-4 में केवल एक चरण की परीक्षा आयोजित की जाए। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे प्रारंभिक परीक्षा (PT) देने के लिए तैयार हैं, लेकिन मुख्य परीक्षा (Mains) की व्यवस्था नहीं चाहते। अभ्यर्थियों का तर्क है कि सरकार भर्ती प्रक्रिया में जो भी नए प्रयोग करना चाहती है, उसे TRE-5 से लागू किया जाए, TRE-4 में नहीं।
निगेटिव मार्किंग और डोमिसाइल पर भी विरोध
शिक्षक अभ्यर्थियों ने TRE-4 में निगेटिव मार्किंग खत्म करने की भी मांग की है। इसके अलावा वे भर्ती में बिहार की डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि TRE-1, TRE-2 और TRE-3 में जिन नियमों के तहत भर्ती हुई थी, TRE-4 में भी उसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
आरजेडी ने भी नियमावली पर उठाए सवाल
TRE-4 की नियमावली को लेकर आरजेडी नेता चितरंजन गगन ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर दावा किया कि TRE-4 में ऐसे कई बदलाव किए गए हैं, जो पहले की शिक्षक भर्तियों में लागू नहीं थे। गगन ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले TRE-4 के तहत एक लाख शिक्षकों की बहाली का वादा किया गया था, जबकि जारी विज्ञप्ति में 32,388 पदों की बात कही गई है। उन्होंने निगेटिव मार्किंग, प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के दो चरणों तथा डोमिसाइल नीति का स्पष्ट प्रावधान नहीं होने पर भी सवाल उठाया।
आरजेडी नेता ने कहा कि पार्टी मौजूदा नियमावली का विरोध करती है और मांग करती है कि डोमिसाइल नीति को शामिल करते हुए पिछली शिक्षक भर्तियों वाली नियमावली को ही लागू किया जाए। फिलहाल TRE-4 को लेकर छात्र संगठनों और सरकार के बीच गतिरोध बना हुआ है। अब देखना होगा कि अभ्यर्थियों की मांगों पर सरकार क्या कदम उठाती है और भर्ती प्रक्रिया में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं।