1 आनंद दुबे जी, आपकी राजनीतिक यात्रा कैसे शुरू हुई, और परिवार का कितना सहयोग मिला?
2002 में ग्रेजुएशन (स्नातक स्तर की पढ़ाई) के बाद, हमने छात्र राजनिति से शुरूआत हुई। एनएसयूआई से जो कांग्रेस पार्टी का युवा संगठन है विद्यार्थी संगठन हैं उसके माध्यम से हमने अपनी राजनिति की शुरूआत की । घर परिवार में राजनितिक पृष्ठभूमि कभी नही रही। लेकिन घर वालों ने मुझे बहुत सपोर्ट किया और मेरे काम को सराहा, मेरे भाषन देने की कला उन्होंने बचपन से देखी थी तो उनको भी लगा कि इस लाइन में जाकर देश की सेवा कर सकूंगा, कम्युनिकेशन स्किल्स बहुत अच्छा रहा बचपन से, तो 2005 में मुझे MSCI का जिलाध्यक्ष बना दिया गया, उत्तर मुंबई का, और उसके बाद से 2010 तक मैं उस पद पे रहा पाँच साल, उसके बाद यूथ कांग्रेस में चला गया उम्र के साथ, यूथ कांग्रेस में रहा करीबन नौ साल, अलग अलग पदों पर, मुंबई और महाराष्ट्र लेवल पर, और फिर 2019 में, 3 जुलाई 2019 को मैं शिवसेना में प्रवेश किया आदित्य ठाकरे जी के नेतृत्व में, तब से लेकर आज तक, 2026 तक मैं पार्टी में एक प्रवक्ता के रूप में काम कर रहा हूँ, आपने पढाई मैं क्या किया है मैं फर्स्ट क्लास कॉमर्स ग्रेजुएट हूँ, मुंबई यूनिवर्सिटी से बीकॉम।
2 आपकी राय में, शिवसेना (यूबीटी) की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है?
देखिए अभी कि इसका नाम शिवसेना UBT हो गया है 2022 के बाद से, पहले इसका नाम शिवसेना हुआ करता था, तो शिवसेना 1966 जब से बनी है और 2026 तक इसका एक ही आधार रहा है मराठी माणुष और हिंदुत्व के लिए हम कुछ करना चाहते हैं। मराठी माणुष और हिंदुत्व दोनों के लिए हम अभी तक अडिग हैं उससे हिले नहीं हैं। कुछ लोग आरोप लगाते हैं कि हम कॉंग्रेस के साथ चले गए हैं, तो हमने हिंदुत्व तो छोड़ दिया है, जबकि ऐसा नहीं है, हिंदुत्व तो अपनी जगह है, कॉंग्रेस अपनी है, तो शिवसेना UBT का अब तक का जो प्रदर्शन रहा है, 40-50 सालों का, यही रहा है कि यह एक क्षेत्रीय दल है, और यह 80 प्रतिसत समाज सेवा करती है, और 20 प्रतिसत राजनीती करती है। , वो भी इसलिए क्योंकि हम राजनितिक दल हैं अन्यथा हम 100 प्रतिसत % समाज सेवा ही करना चाहते हैं। फिर भी 80 प्रतिसत समाज सेवा करने में सफलता मिली है।
3 आप महाराष्ट्र की राजनीति में उत्तर भारतीयों की भूमिका को कैसे देखते हैं?
महाराष्ट्र की राजनीती में ख़ासकर जो MMR region जो है, जैसे मुंबई है, ठाणे है, नवी मुंबई है, थोड़ा नासिक, थोड़ा पुणे, थोड़ा नागपूर , इन भागों में बड़ी सँख्या में उत्तर भारतीय हैं और खास करके MMR में तो 40 लाख की संख्या में हैं MMR में मतलब? मुंबई, ठाणे , नवी मुंबई, MMR, जैसे NCR दिल्ली में होता है। यहां Metro politician को MMR region कहते हैं, यहां पर जो 40 लाख के करीब उत्तर भारतीय हैं , इनको मुख्यमंत्री नहीं बनना है महाराष्ट्र में , यहाँ कोई राजनीती करने नहीं आये हैं रोजी रोटी के लिए आये हैं, तो इनको सबसे पहले एक ही चीज़ चाहिए कि भाई अपनापन का फिलिंग, कि आप यहां के हो और हम आपके हैं, आप हमारे हो, बाला साहेब ठाकरे जी ने हमेशा उत्तर भारतीयो को गले से लगाया , उनको रोजगार सृजन किया उनको हमेशा इज़्ज़त दी कि आप हिंदु हैं, पहले तो हिंदु के नाते दिया और दूसरा कि आप परदेश से आये हैं, राजाराम भगवान की भूमि से आये हैं, तो आपका स्वागत है, उसके बाद तो उद्धव ठाकर और आदित्य ठाकर आगे बढ़ा रहा है । जब कोरोना काल आया, तब उन्होंने ये नहीं देखा कि आप यूपी हो , बिहारी हो या मराठी हो , सबको दवाई मिली , ऑक्सीजन मिला , सबको वैक्सीन मिली सबको रहने की व्यवस्था हुई। सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय वाली बातें मानी उत्तर भारतीय या मराठी में कोई भेदभाव नहीं है। कुछ छटफुट घटनाओं को छोड़कर 99 परसेंट लोग सदभाव से रहते हैं।
4 आपकी भविष्यवाणी के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) का भविष्य क्या है?
देखिये मैं कोई भविष्य वक्ता तो नहीं हूँ, लेकिन एक पॉलिटिकल नेता होने के नाते एक ही चीज़ कहूंगा की राजनीति असंभावनाओं का खेल है किस घड़ी क्या संभावना बैठेगी ये कोई बता नहीं सकता। किसी भी पार्टी को प्रतिद्वंद्वी को आपको हराना है तो आपको उससे बेहतर बनना होगा। सुबह 4:00 बजे से उठकर और रात के 12:00 बजे तक आपको जन हिताय के कामों में लगना पड़ेगा। आपको रणनीति बनानी होगी, चुनाव जीतने की कला सीखनी होगी। साम दाम दंड भेद की योजना जाननी होगी। जो चाणक्य ने भी कहा है , तो अगर हम ये सब करते हैं तो क्यों नहीं हरा सकते हैं? कोई अमर अजर होकर नहीं आया है। 2 सीट वाली भाजपा आज 300 पार भी करती है और 400 पार वाली कांग्रेस आज 100 के नीचे भी आती है, यही जीवन है।
5 आपकी राय में, महाराष्ट्र की सबसे बड़ी समस्या क्या है?
महाराष्ट्र की सबसे बड़ी समस्या है यहाँ के क्षेत्रकरि की। क्योंकि महाराष्ट्र किसान बाहुल्य क्षेत्र है, यहाँ पर कृषि प्रधानता को ज्यादा महत्त्व दिया जाता है क्योंकि यह कृषि के ऊपर ज्यादा लोग निर्भर है। शहरों 29 महानगर पालिका तो है लेकिन उससे भी बहुत बड़े स्तर पर यहाँ ग्रामीण भाग है। तो वहाँ पर जो किसान है, उनकी आत्महत्या पहले रुकनी चाहिए। सरकार उनके जो उत्पादन है उसका जो मिनिमम सपोर्ट प्राइस है वो फिक्स करना चाहिए। जो कर्जदार किसान है, उनके कर्ज माफ़ करने चाहिए और जो बीमा कंपनियां लापरवाही करती है, उन पर अंकुश लगाया जाना चाहिए। ये पहली समस्या है। इसी के साथ एक दूसरी समस्या है की महाराष्ट्र चूँकि अग्रिम 2 -4 राज्यों में आता है। तो यहाँ के नौजवान नौकरियों को लेकर परेशान रहते हैं, रोजगार को लेकर , उसके लिए सरकार को इनको स्टार्ट अप चलाना चाहिए। इनको बिजनेसमैन बनाना चाहिए, इनको उद्योगपति बनाना चाहिए, इंडस्ट्रीज बनाना चाहिए। अमूमन देखा गया है की गुजरात में ज्यादा बिजनेसमैन पैदा हो जाते हैं। महाराष्ट्र में कम , तो महाराष्ट्र की तो पॉलिसी ऐसी होनी चाहिए की यहाँ बिज़नेस ज्यादा हो।
6 आज़ AQI एयर क्वालिटी इंडेक्स बहुत ख़तरनाक स्थिति मै होता जा रहा है, इसके लिए आप क्या सुझाव देना चाहते हैं?
देखिए सबसे पहले तो जो एयर क्वालिटी इंडेक्स है, इससे सबसे पहले एक ही सुझाव है कि जितना हो सके पूरे हमारे राज्य में पेड़ हमें लगाने चाहिए। पहली चीज़ दूसरा पेड़ कम से कम काटे जाने चाहिए। मतलब एक ही तराजू के दो पलड़े हैं, एक ज्यादा पेड़ लगाने हैं और एक।
कम पेड़ काटनें हैं इस समय इस समय जो महाराष्ट्र सरकार है वो दोनों काम में लापरवाह है, ज्यादा पेड़ काट रही है और कम पेड़ लगा रही है। जी दूसरा चीज़ ये जो डेवलपमेंट के नाम पे जो कंक्रीटकरण किया जा रहा है राज्य में। हर जगह काम, रियलिटी के काम, इन्फ्रा के काम, रेलवेज के काम, ये जो काम है, इस कामों के तहत जिस प्रकार का प्रदूषण फैलाने का काम किया जा रहा है गलत क्वालिटी का मटेरियल यूज़ कर देना कॉंट्रॅक्टर पर फाइन नहीं लगाना 24 घंटा काम करवाना। जो सीमेंट की फैक्टरियां है, जो बड़ी बड़ी पॉलूशन्स जहाँ से निकलता है उस पर अंकुश ना लगाना जी पर्यावरण विभाग की उदासीनता, ये सब एक बहुत महत्वपूर्ण कारण है। इस पर एक बहुत बड़ा ग्लोबल समिट या महाराष्ट्र को चेताने के लिए जबरदस्त डिबेट होने की आवश्यकता है जिसके लिए सरकार कहीं कहीं बेक फुट पे नजर आती है।
7 आपकी राय में, शिवसेना (यूबीटी) की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
शिवसेना (यूबीटी) सबसे बड़ी चुनौती है की हमारा जो चुनाव चिन्ह हमारा जो नाम जो इस समय सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है वो पहले हमको वापस मिल जाए। अब वो भाग्य से मिल जाए, किसी की मदद से मिल जाए, धर्म, संगत, न्याय से मिल जाए अब। उस वक्त कुछ तो कह नहीं सकता। बस वो मिलना बहुत जरूरी है क्योंकि हमारा है एक तो वो मिल जाता तो पहचान वापस मिल जाती क्योंकि नया चुनाव चिन्ह, नया नाम, गांव तक ले जाने में बड़ी दिक्कत हो रही है। 2022 से वो हमसे ले लिया गया है। तो एक तो वो मिल जाता और दूसरा हमारे सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती है की संगठन को फिर से पूरी ताकत से तैयार करता। दूसरा मॉडल तैयार करना। कार्यकर्ता मॉडल बूथ प्रमुख जो पन्ना प्रमुख उस टाइप के कैटर को तैयार कर रहा और तीसरा। हमारे को सरकार की जो कु नीतियां हैं जी, जो सरकार की कमियां हैं, जो सरकार लापरवाही करती, भ्रष्टाचार करती उसको जनता के सामने लाकर ये बताना की यह सरकार बेहतर नहीं है। हम ज्यादा बेहतर है। जी जी वो जो अंतर समझा पाना है उसपर बहुत बड़ा काम करना पड़ेगा। क्योंकि जनता इतनी ताकत और होती है की अगर ये अंतर समझ गयी वो आपको बदल देती है।
8 आप अपने राजनीतिक जीवन में सबसे बड़ा सबक क्या सीखा है?
मैंने अपने राजनीतिक जीवन में सबसे बड़ा सबक यही सीखा है की आप अपना काम करते रहिये, आप अपना जो कूटनीति राजनीतिक समझ है उसको लेकर काम करिए। ये कभी मत सोचिए की कौन आपको मदद करेगा। कौन आपको नुकसान करेगा? उससे परे उठकर जो सत्य है, हमेशा उस पर टिके रहिये, न्याय और धर्म की बात करते रहिये और जो आपका हिंदुत्व है वो आपका प्राण से प्यारा होना चाहिए जो आपकी एस्ट्रोलॉजी है जो विचारधारा उसको कभी मत छोड़िए, यही मेरा एक सबक है मेरे जीवन में और एक सबक ये भी है की किसी पर विश्वास मत करिए। हमने बी जे पी पर बहुत विश्वास किया था। 30 साल उनके साथ रहे तो उन्होंने षड्यंत्र करके हमारी पार्टी तोड़ दी। सरकार गिरा दी तो किसी पॉलिटिकल पार्टी पर बहुत ज्यादा विश्वास कभी नहीं करना चाहिए। कर्म करिये लेकिन उनके ऊपर निर्भर मत रहिए। कल तक हम एनडीए में थे। आज हम इंडिया गठबंधन में हैं। दोनों की तुलना करें तो दोनों को। दोनों पे विश्वास करने की बजाय अपने आप पे विश्वास करिए। आप कैपेबल है तो इंडिया गठबंधन भी उठा लेगी और NDA भी उठा लेगी। आप केपेबल नहीं है तो दोनों भगा देंगे
9 जो युवा हैं, महिलाएं हैं और आजकल बहुत सारे ऐसे लोग जो ज्यादा उम्र में राजनिती में आना चाहते हैं, अपना भविष्य बनाना चाहते हैं, उनके लिए क्या सुझाव देना चाहेंगे ?
अभी जो हमारी जनरेशन है , हम तो मिलेनियम में आते हैं, तो मिलेनियम से जो एक ग्रिड आगे है, उनका नाम है जैंजी, तो जैंजी और मिलेनियम के बीच की अगर हम बात करें, तो सबसे पहले राजनीती में युवावों को आना है, तो उनको सिर्फ एक भावना दिमाग में रखना चाहिए, कि यह सेवा का क्षेत्र है, सर्विस इंडस्ट्री है, ये फूल टाइम जॉब है, ये पार्ट टाइम जॉब नहीं है, पहली बात तो ये दिमाग में रखना है कि यह कोई नोकरी नहीं है, जैसे हम जब सेना ज्वाइन करते हैं, तो पगार के लिए ज्वाइन नहीं करते हैं, महीने की सेलरी के लिए ज्वाइन नहीं करते हैं, देशवक्ति का जज्बा लेकर करते हैं, राजनीती सेवा और जज़्बा का विषय है। दुसरा राजनीती में सत्य और न्याय को कभी नहीं छोड़ना है। धर्म का रास्ता कभी नहीं छोड़ना है। विपक्ष में रहेंगे कोई बात नहीं,
ज़रूरी नहीं कि आप सत्ता में ही बैठे हैं, विपक्ष में रहते भी अपनी भूमिका को अच्छे से निभा सकते हैं। बहुत सारे इससे पहले उदारण देश में हैं, चंद्रशेखर जी पूर्व प्रधानमंत्री रहे बहुत साल विपक्ष में रहे जॉर्ज फ़र्नान्डिस , अटल बिहारी वाजपेयी बहुत सारे निता विपक्ष में रहे हैं, लेकिन अपनी पहिचान उन्होंने बनाई, बाद में सब सत्ता में भी आयें, सब मंत्री भी बनें, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री भी बने। अपना रास्ता मत भटकिये। आपके दिमाग में राष्ट्रवाद होना चाहिए। राष्ट्र सबसे पहले , फिर पार्टी , फिर व्यक्ति।



