रिपोर्ट : अनुराग श्रीवास्तव कानपुर
कानपुर : उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में गंभीर अपराधों जैसे साइबर क्राइम, लूट, डकैती और हत्या के मामलों में गिरफ्तार आरोपियों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमानत दिलाने वाले संगठित गिरोह पर पुलिस ने कड़ा शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के सख्त निर्देश पर 1 दिसंबर से चलाए जा रहे विशेष सत्यापन अभियान के तहत दूसरे जिलों और राज्यों से पकड़े गए आरोपियों की जमानत कराने वालों के दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। यह अभियान अपराधियों को आसानी से जेल से बाहर आने से रोकने और कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अभियान के नोडल अधिकारी एडीसीपी एलआईयू महेश कुमार को नियुक्त किया गया है। पिछले लगभग एक महीने में 378 मामलों से जुड़े 578 जमानतगीरों के दस्तावेजों का सत्यापन पूरा हो चुका है। जांच के दौरान बड़ी संख्या में जमानतगीरों के दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं, जिनमें नाम, पता, आय प्रमाण-पत्र और अन्य जरूरी कागजातों में जालसाजी सामने आई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अभियान समाप्त होने के बाद फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के तहत मुकदमे दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस का कहना है कि गंभीर अपराधों में शामिल आरोपियों को जल्दी जमानत मिलने से अपराध की दर में इजाफा होता है। जेल से बाहर आने के बाद ये अपराधी फिर से संगठित होकर समाज में भय का माहौल पैदा करते हैं, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है और पुलिस के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती बन जाता है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि अदालत में जमानत का विरोध करने के लिए पुलिस पूरी कानूनी पैरवी करती है, लेकिन शहर में सक्रिय एक संगठित गिरोह पैसों के लालच में फर्जी दस्तावेज तैयार कर अपराधियों को बाहर निकालने का काम कर रहा है। कुछ लोग तो एक साथ दर्जनों अपराधियों की जमानत करा रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक है।
इस फर्जीवाड़े में थाना और चौकी स्तर पर सत्यापन प्रक्रिया में लापरवाही भी बड़ी वजह सामने आई है। कई मामलों में स्थानीय पुलिस ने बिना पूरी जांच के दस्तावेजों को सही मान लिया, जिसका फायदा अपराधियों को मिला। इसी कमी को दूर करने के लिए पुलिस आयुक्त ने यह विशेष अभियान शुरू कराया है। संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) विनोद कुमार सिंह ने कहा कि बार-बार अलग-अलग अपराधियों की जमानत कराने वाले या फर्जी तरीके अपनाने वालों की पूरी पहचान की जा रही है। अभियान अभी जारी है और जल्द ही बड़े खुलासे होने की संभावना है।
खास तौर पर दूसरे राज्यों और जिलों से पकड़े गए साइबर ठग पुलिस के लिए सबसे बड़ी समस्या बने हुए हैं। साइबर क्राइम टीम को इन ठगों को पकड़ने में महीनों का समय लग जाता है, लेकिन जेल भेजने के कुछ ही दिनों में फर्जी जमानत के जरिए वे बाहर आ जाते हैं। अब पुलिस इन बाहरी आरोपियों की जमानत कराने वालों से उनके रिश्ते, आधार और दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। जांच में अगर फर्जीवाड़ा पाया गया तो संबंधित जमानतगीरों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। संयुक्त पुलिस आयुक्त ने कहा कि फर्जी दस्तावेजों से जमानत कराने वालों और बार-बार जमानत लेने वालों की पहचान पूरी हो चुकी है। अभियान जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।