अमरावती| महाराष्ट्र के अमरावती जिले के मेलघाट इलाके से अंधविश्वास और डर से जुड़ा हैरान करने वाला मामला सामने आया है। धारणी तालुका के डोमा स्थित आदिवासी आश्रम स्कूल में भूत-प्रेत की अफवाह फैलने के बाद करीब 608 छात्र-छात्राएं स्कूल और हॉस्टल छोड़कर अपने घर लौट गए। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की जांच में किसी तरह की भूत-बाधा सामने नहीं आई। डॉक्टरों ने इसे मास साइकोजेनिक इलनेस (मास हिस्टीरिया) से जुड़ा मामला बताया है।
छात्राओं के व्यवहार से फैली अफवाह
बताया जा रहा है कि करीब एक सप्ताह पहले हॉस्टल में रहने वाली 15-16 छात्राओं के व्यवहार में अचानक बदलाव देखने को मिला। कुछ छात्राएं जोर-जोर से हंसने और रोने लगीं, जबकि कुछ ने अजीब आवाजें सुनाई देने की बात कही। इसकी जानकारी स्कूल प्रशासन तक पहुंची। इसके बाद गांव में यह अफवाह फैल गई कि छात्राओं पर भूत-प्रेत का साया है। देखते ही देखते डर का माहौल ऐसा बना कि बड़ी संख्या में छात्राओं ने हॉस्टल छोड़ दिया। अकेले 300 से ज्यादा छात्राओं के घर लौटने की जानकारी सामने आई है।
डॉक्टरों ने बताया मनोवैज्ञानिक स्थिति
मामले की सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम स्कूल पहुंची और छात्रों की जांच की। डॉक्टरों ने इसे मास साइकोजेनिक इलनेस बताया। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसी स्थिति में किसी डर या तनाव का असर एक साथ कई लोगों पर दिखाई दे सकता है। स्वास्थ्य विभाग और विशेषज्ञों की ओर से छात्रों को समझाया जा रहा है कि उन्हें किसी भूत-प्रेत की वजह से डरने की जरूरत नहीं है।
डर दूर करने के लिए काउंसलिंग अभियान
मामले को गंभीरता से लेते हुए महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (ANIS) और स्वास्थ्य विभाग की टीमें पिछले कुछ दिनों से इलाके में छात्रों और उनके परिवारों से संपर्क कर रही हैं। खराब मौसम और दुर्गम रास्तों के बावजूद कार्यकर्ता कई गांवों तक पहुंचकर बच्चों की काउंसलिंग कर रहे हैं। पांचडोंगरी, खडीमल, चूनखड़ी और एकताई समेत कई इलाकों में छात्रों से बातचीत कर उनके मन से डर निकालने की कोशिश की जा रही है।
काउंसलिंग के बाद स्कूल लौटने को तैयार छात्राएं
काउंसलिंग का असर भी दिखाई देने लगा है। एकताई गांव में छह छात्राओं से बातचीत के बाद उन्होंने दोबारा स्कूल जाने की इच्छा जताई है। वहीं, खडीमल समेत दूसरे गांवों में भी छात्रों और उनके परिवारों को समझाया जा रहा है। फिलहाल प्रशासन और सामाजिक संगठनों का फोकस छात्रों का डर दूर करने और उनकी पढ़ाई दोबारा सुचारू कराने पर है।