थाना साइबर क्राइम पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 50 हजार रुपये के इनामी समेत तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में दो युवक केवल पांचवीं पास हैं और पिछले छह महीनों से साइबर ठगी का गैंग बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दे रहे थे। पुलिस ने इनके कब्जे से दो मोबाइल फोन, एक चेकबुक और एक डायरी बरामद की है।
कैसे करते थे ठगी
पुलिस के अनुसार, गृह मंत्रालय भारत सरकार के ऑनलाइन पोर्टल ‘प्रतिबिंब’ पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर जांच शुरू की गई। जांच में सामने आया कि आरोपी लोगों को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर उनसे पैसे ऐंठते थे। ठगी की रकम अलग-अलग बैंक खातों में मंगाई जाती थी और बाद में उसे निकालकर यूएसडीटी (क्रिप्टो करेंसी) खरीदने में इस्तेमाल किया जाता था।
आरोपियों की पहचान
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नदीम (पुत्र मेहरबान, निवासी ग्राम कुटेसरा, थाना चरथावल), गुफरान (पुत्र मुस्तफा, निवासी ग्राम कुटेसरा, थाना चरथावल) और मयूर अफजल राणा (पुत्र नौशाद राणा, निवासी ग्राम सुजडू, थाना खालापार), जनपद मुजफ्फरनगर के रूप में हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे पांच प्रतिशत कमीशन पर बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। शिकायत दर्ज होने पर खाते फ्रीज हो जाते थे, जिसके बाद वे अन्य लोगों के नाम से नए खाते खुलवाकर ठगी का सिलसिला जारी रखते थे।
85 करोड़ से अधिक की 70 शिकायतें
पुलिस के मुताबिक, बरामद खातों में दो माह के भीतर करीब 30 लाख रुपये का लेनदेन हुआ है। इन खातों के खिलाफ पूरे देश में लगभग 70 शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें 85 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का मामला सामने आया है। जांच में पाया गया कि करीब 60 लाख रुपये की राशि इन खातों में ट्रांसफर हुई थी। इस मामले में मु.अ.सं. 11/2026 के तहत धारा 318(4), 336, 338 बीएनएस और 66सी, 66डी आईटी एक्ट के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
ऐसे पकड़े गए आरोपी
मुजफ्फरनगर पुलिस लाइन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एसपी क्राइम इंदु प्रकाश ने बताया कि ‘प्रतिबिंब’ पोर्टल पर लगातार मॉनिटरिंग के दौरान 4.4 करोड़ रुपये के डिजिटल अरेस्ट से जुड़े एक मामले की जानकारी मिली थी। एक अन्य मामले में ठगी की रकम मुजफ्फरनगर से निकाली गई थी। ट्रांजैक्शन ट्रेस करने पर पता चला कि गुफरान और नदीम नाम के दो युवक यह रकम निकाल रहे थे। गहन जांच में कई अन्य संदिग्ध खाते भी सामने आए।
यूएसडीटी में करते थे लेनदेन
पुलिस के अनुसार, आरोपी ठगी की रकम खातों में मंगाकर उसे निकालते और यूएसडीटी में कन्वर्ट कर देते थे। इस पूरी प्रक्रिया में 5 से 10 प्रतिशत तक कमीशन लेते थे। मयूर अफजल राणा यूएसडीटी की खरीद-फरोख्त का काम करता था। तीनों मिलकर एक संगठित गैंग की तरह काम कर रहे थे और ठगी की रकम को क्रिप्टो करेंसी में बदलकर आगे ट्रांसफर कर देते थे।
सिलाई का काम छोड़ अपनाया ठगी का रास्ता
पुलिस ने बताया कि चरथावल थाना क्षेत्र के दोनों आरोपी पहले सिलाई का काम करते थे, लेकिन पिछले छह महीनों से उन्होंने यह काम छोड़कर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी शुरू कर दी थी। कम समय में अधिक पैसे कमाने के लालच में वे साइबर अपराध में शामिल हो गए।
पूरे देश में दर्ज हैं शिकायतें
जांच में सामने आया कि आरोपियों के खातों और मोबाइल नंबरों के खिलाफ देशभर में 70 शिकायतें दर्ज हैं। अब तक करीब 70 लाख रुपये के लेनदेन का खुलासा हुआ है। तमिलनाडु से भी एक शिकायत मिली थी, जिसमें एक व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर मोटी रकम ठगी गई थी। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।