दुनियाभर में अपनी मिठास और गुणवत्ता के लिए मशहूर मलिहाबाद के आम इस बार कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं। अत्यधिक कीटनाशक अवशेषों और गुणवत्ता संबंधी चिंताओं के चलते जापान ने भारतीय आमों का आयात रोक दिया है। वहीं अमेरिका और अन्य देशों को निर्यात भी विभिन्न कारणों से प्रभावित हुआ है, जिससे आम उत्पादकों और निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
मलिहाबाद के बागवानों का कहना है कि इस वर्ष मार्च में मौसम के लगातार उतार-चढ़ाव, बारिश और ओलावृष्टि ने आम की गुणवत्ता पर असर डाला। फलों का आकार और स्वरूप प्रभावित होने से निर्यात मानकों को पूरा करना कठिन हो गया। इसके अलावा बेमौसम बारिश के बाद कीटों से फसल को बचाने के लिए किसानों को अधिक मात्रा में कीटनाशकों का इस्तेमाल करना पड़ा।
मलिहाबाद के माल क्षेत्र के बागवान बिशन पाल सिंह, जो पिछले दो दशकों से जापान और अमेरिका को आम निर्यात करते रहे हैं, बताते हैं कि उन्होंने इस साल भी निर्यात की पूरी तैयारी की थी। आमों को कीटनाशकों से बचाने के लिए प्रत्येक फल पर विशेष पैकेट लगाए गए और अतिरिक्त श्रमिकों की मदद ली गई। इसके बावजूद निर्यात नहीं हो सका। परिणामस्वरूप जो आम विदेशों में 150 रुपये प्रति किलो तक बिकते थे, उन्हें अब स्थानीय मंडियों में 28 से 35 रुपये प्रति किलो के भाव पर बेचना पड़ रहा है।
आम विशेषज्ञ और पद्मश्री सम्मानित बागवान कलीमुल्ला खान का कहना है कि बाजार में नकली और हानिकारक कीटनाशकों का प्रयोग बढ़ रहा है, जो फलों की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। उनका मानना है कि खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर जापान बेहद सख्त है, इसलिए उसने भारतीय आमों के आयात पर रोक लगाई है।
हालांकि निर्यात प्रभावित होने के बावजूद मलिहाबाद की स्थानीय मंडियों में आम की बिक्री सामान्य रूप से जारी है। व्यापारियों का कहना है कि कीट और रोग नियंत्रण के लिए सीमित मात्रा में कीटनाशकों का प्रयोग लगभग सभी फलों और सब्जियों में किया जाता है।
निर्यात से पहले आमों का विशेष उपचार किया जाता है। मलिहाबाद स्थित पैक हाउस के प्रबंधक सचिन के अनुसार, जापान भेजे जाने वाले आमों पर वेपर हीट ट्रीटमेंट (VHT) किया जाता है, जिसमें फलों को नियंत्रित तापमान वाले चैंबर में रखा जाता है। इससे फलों में मौजूद कीड़े, लार्वा और अन्य जैविक जोखिमों को समाप्त किया जाता है। हाल ही में जापानी निरीक्षण दल ने भारत के विभिन्न पैक हाउस और प्रसंस्करण इकाइयों का दौरा किया था, जहां प्रक्रिया संबंधी कुछ कमियां सामने आने के बाद आयात पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है और वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग 40 से 45 प्रतिशत है। उत्तर प्रदेश में करीब 2.8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में आम की खेती होती है, जिसमें मलिहाबाद, माल और काकोरी क्षेत्र प्रमुख हैं। वर्ष 2024-25 में भारत से लगभग 30 हजार टन आमों का निर्यात किया गया था। जापान, अमेरिका, यूएई, ब्रिटेन, कुवैत और कतर प्रमुख आयातक देशों में शामिल रहे हैं। निर्यात पर बढ़ती पाबंदियों और गुणवत्ता संबंधी चुनौतियों ने अब आम उत्पादकों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों को आशंका है कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो अन्य देश भी भारतीय आमों के आयात पर प्रतिबंध लगा सकते हैं।