
न्यूज़ जर्नलिस्ट अंकित कुमार गोयल
प्रश्न 1. आपने अपने करियर की शुरुआत कैसे की और कॉर्पोरेट क्षेत्र छोड़ने का निर्णय क्यों लिया?
डॉ. अनिल सेठी: मैंने लगभग 15 वर्ष तक कॉर्पोरेट क्षेत्र में कार्य किया। अच्छी नौकरी, अच्छा वेतन और प्रतिष्ठा सब कुछ था, लेकिन मन में संतोष नहीं था। मुझे लगा कि केवल पैसा कमाना ही जीवन का उद्देश्य नहीं हो सकता। जब कुछ लोगों की काउंसलिंग के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया, तब मुझे महसूस हुआ कि लोगों के जीवन में मुस्कान लाना ही मेरा वास्तविक उद्देश्य है। उसी दिन मैंने नौकरी छोड़कर इस दिशा में काम करने का निर्णय लिया।

प्रश्न 2. इस निर्णय में परिवार का कितना सहयोग मिला?
डॉ. अनिल सेठी: मेरी पत्नी ने हर कदम पर मेरा साथ दिया। मैंने बिना किसी योजना के नौकरी छोड़ दी थी, लेकिन उन्होंने कभी शिकायत नहीं की। उन्होंने कहा कि जिस कार्य में आपको सुकून मिले, वही कीजिए। मेरे बच्चों को भी खुशी हुई क्योंकि अब मैं उन्हें अधिक समय दे पा रहा था।
प्रश्न 3. मोटिवेशनल स्पीकर और लाइफ कोच में क्या अंतर है?
डॉ. अनिल सेठी: मोटिवेशनल स्पीकर लोगों को प्रेरित करता है, लेकिन लाइफ कोच किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत समस्याओं, परिस्थितियों और लक्ष्यों के अनुसार मार्गदर्शन देता है। प्रेरणा कुछ समय के लिए होती है, जबकि सही कोचिंग जीवन में स्थायी परिवर्तन लाती है।

प्रश्न 4. नेतृत्व और संगठनात्मक संस्कृति में बदलाव के लिए सबसे जरूरी बातें क्या हैं?
डॉ. अनिल सेठी: सबसे पहले नेता को स्वयं उदाहरण बनना होगा। यदि नेता ईमानदार होगा, अपनी गलती स्वीकार करेगा और पारदर्शिता रखेगा, तभी पूरी टीम उस संस्कृति को अपनाएगी। दूसरा, कर्मचारियों का फीडबैक सुनना जरूरी है। तीसरा, नियम सभी के लिए समान होने चाहिए।
प्रश्न 5. आपने सीबीआई, दिल्ली पुलिस, उत्तर प्रदेश पुलिस और तिहाड़ जेल में प्रशिक्षण दिया। आपका अनुभव कैसा रहा?
डॉ. अनिल सेठी: हर संस्था की अपनी चुनौतियाँ हैं। तिहाड़ जेल में किशोर बंदियों के साथ काम करते समय मैंने महसूस किया कि केवल दो मिनट का गुस्सा किसी का पूरा जीवन बदल सकता है। वहीं पुलिस और सीबीआई के अधिकारियों पर अत्यधिक मानसिक दबाव रहता है। उन्हें मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।

प्रश्न 6. आज के युवाओं में सबसे बड़ी कमियाँ क्या हैं?
डॉ. अनिल सेठी: पहली कमी यह है कि वे अपने माता-पिता से भावनात्मक रूप से दूर होते जा रहे हैं। दूसरी कमी धैर्य की है। आज हर व्यक्ति तुरंत सफलता चाहता है, जबकि सफलता निरंतर प्रयास, अनुशासन और धैर्य से मिलती है।
प्रश्न 7. विद्यार्थियों के लिए आपका सबसे महत्वपूर्ण संदेश क्या है?
डॉ. अनिल सेठी: यदि कोई युवा अपने माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करता है, तो उसके जीवन की नींव मजबूत होती है। जड़ों से जुड़े बिना कोई भी व्यक्ति लंबे समय तक सफल नहीं रह सकता।

प्रश्न 8. कंपनियाँ सबसे बड़ी गलती कहाँ करती हैं?
डॉ. अनिल सेठी: अधिकांश कंपनियाँ चाहती हैं कि कर्मचारी बदलें, लेकिन नेतृत्व स्वयं बदलने के लिए तैयार नहीं होता। वास्तविक परिवर्तन हमेशा शीर्ष स्तर से शुरू होता है।
प्रश्न 9. तनावपूर्ण माहौल में कर्मचारियों को सकारात्मक कैसे रखा जा सकता है?
डॉ. अनिल सेठी: मैं अपनी ट्रेनिंग में मेडिटेशन और लाफ्टर योग का उपयोग करता हूँ। कुछ मिनट का ध्यान और खुलकर हँसना व्यक्ति के तनाव को काफी हद तक कम कर देता है और उसकी कार्यक्षमता बढ़ाता है।

प्रश्न 10. आने वाले वर्षों में भारतीय कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी?
डॉ. अनिल सेठी: भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती है प्रतिभाशाली लोगों को संगठन से जोड़े रखना, उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देना और उनके विकास में निवेश करना।
प्रश्न 11. आपने अपने जीवन का सबसे बड़ा सबक क्या सीखा?
डॉ. अनिल सेठी: जो बात आप दूसरों को सिखाते हैं, पहले उसे स्वयं अपने जीवन में अपनाइए। कथनी और करनी में अंतर नहीं होना चाहिए।
प्रश्न 12. हमारे पाठकों के लिए आपका संदेश क्या है?
डॉ. अनिल सेठी: जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है। अपने माता-पिता का सम्मान कीजिए, परिवार का ध्यान रखिए और ईमानदारी से अपना कार्य कीजिए। यदि आपके कारण आपका परिवार मुस्कुरा रहा है, तो समझिए कि सफलता आपके साथ है।