भोपाल में मूंग खरीदी और अन्य कृषि संबंधी मांगों को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। बड़ी संख्या में किसान सावरकर सेतु के पास डटे हुए हैं और मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने की तैयारी में हैं। स्थिति को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है और पुलिस ने बैरिकेडिंग कर किसानों को वहीं रोक रखा है। किसानों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
इस बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किसानों से बातचीत के लिए एक समिति गठित करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में लगातार काम कर रही है और समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए निकाला जाएगा।
बातचीत से निकलेगा समाधान: CM मोहन यादव
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में ‘कृषि कल्याण वर्ष’ मनाया जा रहा है और किसानों के हित में कई योजनाओं पर काम हो रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए एक समिति बनाई गई है। मंगलवार को कृषि मंत्री किसानों से बातचीत कर चुके हैं और बुधवार को भी मंत्री व अधिकारी वार्ता करेंगे। उन्होंने अपील की कि आंदोलन के दौरान आम जनता को परेशानी न हो और सभी पक्ष संवाद के जरिए समाधान निकालें।
क्या हैं किसानों की प्रमुख मांगें?
प्रदर्शन कर रहे किसानों की मुख्य मांगें हैं
- मूंग की फसल की 100% सरकारी खरीद।
- खाद वितरण के लिए ई-टोकन व्यवस्था को आसान बनाया जाए या समाप्त किया जाए।
- खाद-बीज की किल्लत दूर की जाए।
- भावांतर योजना की खामियों को दूर किया जाए।
किसानों का कहना है कि हर किसान की उपज की सरकारी खरीद सुनिश्चित होनी चाहिए ताकि उन्हें फसल बेचने में दिक्कत न हो।
कृषि मंत्री से वार्ता रही बेनतीजा
जानकारी के मुताबिक, मंगलवार देर रात कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने प्रदर्शनकारी किसानों से बातचीत की, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद किसानों ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने का फैसला किया। फिलहाल पुलिस ने सावरकर सेतु के पास बैरिकेडिंग कर उन्हें आगे बढ़ने से रोक रखा है।
धरना स्थल पर रातभर डटे रहे किसान
राज्य के विभिन्न जिलों से आए किसानों ने रात धरना स्थल पर ही बिताई। उन्होंने वहीं भोजन बनाया और साफ कहा कि वे पूरी तैयारी के साथ आए हैं। किसानों का कहना है कि मांगें पूरी होने तक वे आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे।
किसानों का दावा- आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा
प्रदर्शन में शामिल किसानों का कहना है कि वे लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें हर स्तर पर रोकने की कोशिश की। किसानों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या किसी अधिकारी के साथ हिंसा करने का कोई इरादा नहीं है।
युवा किसानों की अगुवाई में आंदोलन
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस बार आंदोलन की कमान युवा और जेन-जी किसानों ने संभाल रखी है। उनका कहना है कि जरूरत पड़ने पर वे अपनी ताकत भोपाल में भी दिखाएंगे। किसानों के आंदोलन का असर भोपाल की यातायात व्यवस्था पर भी पड़ा है। कई इलाकों में मंगलवार शाम से जाम की स्थिति बनी हुई है। एहतियात के तौर पर शहर के कई स्कूल बंद रखे गए हैं और प्रशासन ने कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया है।