उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल देखने को मिला है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अनुशासनहीनता के आरोप में अपने समधी और पार्टी के पूर्व वरिष्ठ नेता अशोक सिद्धार्थ को एक बार फिर पार्टी से निष्कासित कर दिया है। इसके साथ ही बसपा के वरिष्ठ कोऑर्डिनेटर रणधीर सिंह बेनीवाल को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया है।
मायावती ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि अशोक सिद्धार्थ पर पार्टी में भ्रम फैलाने, अनुशासनहीनता करने और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों को प्रभावित करने की कोशिश करने जैसे गंभीर आरोप हैं। उन्होंने कहा कि अशोक सिद्धार्थ को पहले भी पार्टी से निकाला गया था, लेकिन सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के बाद उन्हें दोबारा मौका दिया गया था। इसके बावजूद उनके व्यवहार में सुधार नहीं आया, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई।
इसी क्रम में पार्टी ने रणधीर सिंह बेनीवाल को भी अनुशासनहीनता के आरोप में निष्कासित कर दिया। बेनीवाल पंजाब समेत कई राज्यों में पार्टी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे और संगठन के प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे।
इससे पहले मायावती ने स्पष्ट किया था कि बसपा में सभी महत्वपूर्ण फैसले, विशेष रूप से उम्मीदवारों के चयन का अधिकार, केवल उनके पास है। उन्होंने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और उनके भतीजे आकाश आनंद की टिकट तय करने में कोई भूमिका नहीं है।
मायावती ने कहा कि विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश और मंडल स्तर के पदाधिकारियों से उम्मीदवारों के संबंध में सुझाव लिए जा रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला वही करेंगी। उन्होंने बताया कि अब तक दो दर्जन से अधिक संभावित उम्मीदवारों का साक्षात्कार लेकर उनके नाम अंतिम किए जा चुके हैं। बसपा प्रमुख ने यह भी कहा कि आकाश आनंद की भूमिका को लेकर फैलाई जा रही तमाम अटकलों और अफवाहों में कोई सच्चाई नहीं है। पार्टी का संचालन और सभी अहम निर्णय उनके नेतृत्व में ही लिए जा रहे हैं।