प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के बरेली हिंसा मामले में इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के अध्यक्ष और मुख्य आरोपी मौलाना तौकीर रजा खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए किसी भी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान हिंसक और भड़काऊ नारों को लेकर सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि ऐसे नारे कानून के शासन को सीधी चुनौती देते हैं और लोगों को हिंसा व सशस्त्र विद्रोह के लिए उकसाने की क्षमता रखते हैं।
‘सर तन से जुदा’ जैसे नारे पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सजा, सर तन से जुदा’ जैसे नारे देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता के लिए खुली चुनौती हैं। अदालत ने इन्हें पारंपरिक धार्मिक नारों से अलग बताते हुए कहा कि इस तरह के नारे सशस्त्र विद्रोह के लिए सीधा उकसावा माने जा सकते हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे नारों की तुलना ‘नारा-ए-तकबीर, अल्लाहु अकबर’, ‘जय श्री राम’ या ‘सत श्री अकाल’ जैसे पारंपरिक धार्मिक नारों से नहीं की जा सकती। अदालत ने कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पुलिस पर हमला करना और अराजकता फैलाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने घटना के बाद मौलाना तौकीर रजा के कथित आचरण को भी गंभीरता से लिया।
26 सितंबर 2025 को बरेली में भड़की थी हिंसा
बरेली में 26 सितंबर 2025 को जुमे की नमाज के दिन हिंसा भड़क गई थी। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए थे। इस दौरान कई जगहों पर पत्थरबाजी, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आई थीं। पुलिस के अनुसार, उपद्रव के दौरान पुलिसकर्मियों पर पथराव किया गया और हिंसा में कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। मामले में मौलाना तौकीर रजा समेत कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।
करीबियों की संपत्तियों पर भी हुई कार्रवाई
हिंसा के बाद प्रशासन ने मौलाना तौकीर रजा के करीबियों के खिलाफ भी कार्रवाई की। अधिकारियों के मुताबिक, करीब 150 करोड़ रुपये की कथित अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई की गई, जबकि कुछ मामलों में अवैध निर्माण को लेकर बुलडोजर कार्रवाई भी हुई। हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद बरेली हिंसा मामले में मौलाना तौकीर रजा को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है।