चंडीगढ़: पंजाब में अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर सरकारी कर्मचारियों ने गुरुवार को राज्यव्यापी ‘महा हड़ताल’ की। हड़ताल के चलते कई सरकारी विभागों का कामकाज प्रभावित हुआ, जबकि सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाओं पर भी असर पड़ा। इस बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने साफ कर दिया कि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन हड़ताल के दौरान कोई वार्ता नहीं होगी। दरअसल, मुख्यमंत्री भगवंत मान को गुरुवार को जालंधर में कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनकी मांगों और समस्याओं पर चर्चा करनी थी। हालांकि, कर्मचारियों की हड़ताल के बीच सीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर अपनी स्थिति स्पष्ट की।
‘बातचीत और हड़ताल एक साथ नहीं चल सकती’
सीएम भगवंत मान ने कहा कि कर्मचारी सरकार का अहम हिस्सा हैं और उनकी हर जायज मांग एवं चिंता सुनने के लिए सरकार तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार हर समस्या का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन बातचीत और हड़ताल एक साथ नहीं चल सकती। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी पहले हड़ताल खत्म करें, इसके बाद उनकी मांगों और समस्याओं पर बातचीत की जाएगी।
सीएम मान का दावा- पंजाब में कर्मचारियों को सबसे ज्यादा वेतन
भगवंत मान ने दावा किया कि पंजाब सरकार के कर्मचारियों को देश के अन्य राज्यों के सरकारी कर्मचारियों की तुलना में सबसे अधिक वेतन मिलता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर केंद्र सरकार किसी कर्मचारी को 30 से 32 हजार रुपये देती है, तो पंजाब सरकार उसी कर्मचारी को करीब 50 हजार रुपये का वेतन देती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी कर्मचारी प्रशासन की रीढ़ हैं और राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को बेहतर वेतन देने को लेकर गर्व महसूस करती है।
150 से ज्यादा कर्मचारी संगठनों ने लिया हिस्सा
कर्मचारियों की यह ‘महा हड़ताल’ पंजाब सांझा मुलाजिम मंच के बैनर तले आयोजित की गई। कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, 150 से अधिक संगठनों ने इसमें हिस्सा लिया। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार की ओर से कई बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद उनकी लंबित मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
क्या हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें?
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में 18 प्रतिशत लंबित महंगाई भत्ता (DA) जारी करना, पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करना और संविदा कर्मचारियों को नियमित करना शामिल है। कर्मचारियों का दावा है कि मांगें लंबे समय से लंबित हैं और सरकार के आश्वासन के बावजूद उन्हें पूरा नहीं किया गया। हड़ताल के कारण राज्य के कई सरकारी कार्यालयों में कामकाज प्रभावित रहा। वहीं, कर्मचारी संगठनों के अनुसार सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं भी बाधित हुईं।