पटना। बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार ने सामाजिक संतुलन साधने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के लिए एक विशेष राज्य आयोग के गठन की घोषणा की है। इस आयोग के अध्यक्ष के रूप में प्रो. डॉ. नवीन कुमार आर्य को नियुक्त किया गया है, जबकि केदार नाथ भंडारी और अमित कुमार को सदस्य बनाया गया है।
राज्य सरकार का यह फैसला आगामी अक्टूबर-नवंबर में संभावित विधानसभा चुनावों की तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है। बीते कुछ हफ्तों से नीतीश सरकार लगातार ऐसे फैसले ले रही है, जिनका उद्देश्य विभिन्न सामाजिक और जातीय वर्गों को साधना है।
इससे पहले सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण वर्गों (EWS) को ध्यान में रखते हुए ‘सवर्ण आयोग’ के गठन की भी घोषणा की थी। अब अति पिछड़ा आयोग के साथ-साथ महादलित आयोग, अनुसूचित जाति-जनजाति (SC-ST) आयोग और मछुआरा आयोग का गठन भी किया गया है। इन सभी आयोगों को सामाजिक न्याय, कल्याण और हाशिए पर रह गए वर्गों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गठित किया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन आयोगों के गठन के ज़रिए सरकार EBC, SC-ST, महादलित और सवर्ण समुदायों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति अपना रही है। इससे चुनावों में इन वर्गों का समर्थन हासिल करने में मदद मिल सकती है।
नीतीश कुमार की यह रणनीति साफ तौर पर संकेत देती है कि वे सामाजिक समीकरणों को साधते हुए एक बार फिर सत्ता में वापसी की तैयारी कर रहे हैं। आयोगों का गठन प्रशासनिक दृष्टि से जितना अहम है, राजनीतिक दृष्टि से भी यह कदम उतना ही प्रभावशाली माना जा रहा है।