सिखों की सर्वोच्च संस्था श्री अकाल तख्त साहिब ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को तलब किया है। उन्हें 15 जनवरी को अकाल तख्त के सचिवालय में पेश होकर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। अकाल तख्त ने यह कदम मुख्यमंत्री द्वारा सिख मर्यादा, सिख पंथ और सिखों की सर्वोच्च संस्थाओं को लेकर दिए गए कथित बयानों के मद्देनज़र उठाया है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि वे एक विनम्र सिख की तरह नंगे पैर श्री अकाल तख्त साहिब में पेश होंगे और अपना पक्ष रखेंगे। भगवंत मान सिटिंग मुख्यमंत्री के तौर पर अकाल तख्त में तलब होने वाले चौथे मुख्यमंत्री होंगे।
पहले भी हो चुकी है मुख्यमंत्रियों की पेशी
इससे पहले संयुक्त पंजाब के मुख्यमंत्री भीम सेन सच्चर, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला और प्रकाश सिंह बादल को भी श्री अकाल तख्त साहिब में तलब किया जा चुका है। सिख इतिहास में महाराजा रणजीत सिंह का नाम भी उल्लेखनीय है, जिन्हें अकाल तख्त से धार्मिक सजा सुनाई गई थी। हालांकि उन्होंने सजा स्वीकार की थी, लेकिन कोड़े नहीं लगाए गए थे।
श्री अकाल तख्त साहिब का महत्व
श्री अकाल तख्त साहिब सिखों की सर्वोच्च राजनीतिक और न्यायिक संस्था है। इसकी स्थापना 1606 में छठे गुरु, गुरु हरगोबिंद साहिब ने की थी। यह अमृतसर में हरमंदिर साहिब के ठीक सामने स्थित है और सिखों के पांच तख्तों में सबसे पुराना और सर्वोच्च माना जाता है। यहां से जारी हुक्मनामा पूरी दुनिया के सिखों के लिए मान्य होता है।
अकाल तख्त में केवल वही सिख पेश हो सकता है जो अमृतधारी हो और सिख सिद्धांतों का पालन करता हो। सजा से जुड़े मामलों में पांच सिंह साहिबान फैसला लेते हैं और जत्थेदार द्वारा सजा के लिए तलब किया जाता है।
पहले भी कई बड़े नेता हो चुके हैं तलब
पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार से जुड़े मामलों को लेकर बाद में अकाल तख्त में पेश होकर माफी मांगी और धार्मिक सेवा की थी। वहीं, पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री बूटा सिंह को भी पंथ से निष्कासित किए जाने के बाद अकाल तख्त में पेश होकर धार्मिक सजा पूरी करनी पड़ी थी।
मुख्यमंत्रियों की ऐतिहासिक पेशियां
1955 में भीम सेन सच्चर पहले मुख्यमंत्री थे जो आज़ाद भारत में अकाल तख्त में पेश हुए।
1986 में सुरजीत सिंह बरनाला को ऑपरेशन ब्लैक थंडर के दौरान गोल्डन टेंपल परिसर में पुलिस भेजने के मामले में तलब किया गया और उन्हें तनखैया घोषित किया गया। 1979 में प्रकाश सिंह बादल ने निरंकारी कांड के बाद पैदा हुए पंथक विवाद को लेकर अकाल तख्त में पेशी दी थी।
सुखबीर सिंह बादल भी हो चुके हैं पेश
अकाली दल प्रमुख और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को भी दो बार अकाल तख्त में पेश होना पड़ा। दिसंबर 2024 में उन्हें डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को माफी देने और बेअदबी मामलों को लेकर तनखैया घोषित किया गया था। सजा के दौरान स्वर्ण मंदिर परिसर में उन पर फायरिंग की घटना भी हुई थी, जिसमें वे सुरक्षित बच गए थे।अब सभी की नजरें 15 जनवरी पर टिकी हैं, जब मुख्यमंत्री भगवंत मान श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रखेंगे।