कानपुर। विभावाणी ब्रह्मावर्त प्रांत द्वारा छत्रपति शाहूजी महाराज इनोवेशन फाउंडेशन के सहयोग से तथा वुमन एंपावरमेंट वेलफेयर सोसाइटी के आउटरीच पार्टनर के रूप में सतत विकास हेतु राष्ट्र निर्माण संगठनों की क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें बोलते हुए राष्ट्रीय समन्वयक एनपी राजीव ने कहा कि उत्तर प्रदेश असीम क्षमता वाला राज्य है। उन्होंने कहा कि सतत विकास का मॉडल स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और क्षेत्रीय पारिस्थितिकी को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना चाहिए। जोनल कोऑर्डिनेटर डॉ. वीपी सिंह ने कहा की टिकाऊ विकास के लिए विज्ञान को प्रयोगशालाओं से जमीनी स्तर पर और जमीनी स्तर की समस्याओं को प्रयोगशाला के स्तर पर ले जाना होगा। उन्होंने यहां प्रतिभाग कर रही स्वयंसेवी संस्थाओं का आह्वान किया कि वे स्थानीय समस्याओं का हल वैज्ञानिक तरीके से करने में अपनी भूमिका निभाएं। कार्यशाला में विज्ञान संदेश अभियान के बारे में बताया गया जो कि विभावाणी संस्था का फ्लैगशिप कार्यक्रम है।
यह कार्यशाला दिनांक रविवार को इनोवेशन फाउंडेशन हॉल, छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर में आयोजित हुई।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा दीप जलाकर दीप मंत्र उच्चारण के साथ किया गया। प्रार्थना डॉ. अपेक्षा त्रिपाठी द्वारा की गयी । कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. प्रतिभा मिश्रा ने की। इस अवसर पर विज्ञान भारती के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे जिनमें प्रोफेसर सुनील मिश्रा (राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य विज्ञान भारती ), कौस्तुभ उमर जी (संगठन मंत्री ब्रह्मावर्त प्रांत ), प्रभाकर सिंह ( छत्रपति शाहूजी महाराज इनोवेशन फाउंडेशन के मैनेजर), अंशु सिंह ( चीफ इनोवेशन ऑफिसर ) सम्मिलित रहे।
साथ ही लखनऊ से सर्वेश सोनी एवं उनकी टीम, प्रतापगढ़ से प्रभात पाण्डेय एवं उनकी टीम तथा औरैया व बहराइच से आए गणमान्य अतिथियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मंच का संचालन अपर्णा ठाकुर द्वारा किया गया एवं पंजीकरण का कार्यभार साधना यादव व पार्थ गुप्ता ने संभाला l कार्यक्रम में आए विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपनी परियोजना प्रस्ताव पर चर्चा की और उनका प्रस्तुतीकरण किया। आमंत्रित अतिथियों को स्मृति चिन्ह, पौधा एवं पट्टिका द्वारा सम्मानित किया गया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए अन्य वक्ताओं ने सतत विकास, स्वदेशी विज्ञान और आत्मनिर्भर भारत पर अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि सतत विकास केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और वैज्ञानिक रूप से सशक्त भविष्य का आधार है।
कार्यक्रम में विज्ञान भारती, विभा वाणी, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी एवं वुमन एंपावरमेंट वेलफेयर सोसाइटी की महिलाओ ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यशाला में प्रतिभागियों को सतत जीवनशैली, महिला सशक्तिकरण और स्वावलंबन के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने हेतु प्रेरित किया गया।