मथुरा। उत्तर प्रदेश के वृंदावन में 10 अप्रैल को हुआ स्टीमर हादसा बेहद दर्दनाक साबित हुआ है। आस्था के साथ दर्शन करने आए श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा मातम में बदल गई। हादसे के बाद का मंजर इतना भयावह था कि चीख-पुकार से पूरा इलाका गूंज उठा।
ताजा जानकारी के मुताबिक, इस हादसे में अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं। परिजन यमुना किनारे अपनों की तलाश में भटक रहे हैं और माहौल गमगीन बना हुआ है। मरने वालों की पहचान जगरांव की कविता रानी और उनके बेटे मधुर बहल (कविता के पति विजय बच गए), जगरांव के चरणजीत और उनकी पत्नी पिंकी, लुधियाना के दुगरी के राकेश गुलाटी और उनकी पत्नी अंजू, मोगा की सपना हंस, जगरांव के ईशान कटारिया, हिसार (हरियाणा) की आशा रानी, लुधियाना की मीनू बंसल के तौर पर हुई है।
बताया जा रहा है कि यमुना नदी पर बने अस्थायी पोंटन पुल की मरम्मत का काम चल रहा था। इसी दौरान एक जेसीबी मशीन से पुल को खींचा जा रहा था, तभी वहां से गुजर रहे स्टीमर का संतुलन बिगड़ गया और वह बीच नदी में पलट गया। हादसे के समय स्टीमर में करीब 37 लोग सवार थे। नियमों के अनुसार यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य होती है, लेकिन मौके पर किसी ने भी इसे नहीं पहना था। इस लापरवाही ने हादसे की गंभीरता को और बढ़ा दिया।
घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। स्टीमर चालक की पहचान अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है और बताया जा रहा है कि वह फरार है। हैरानी की बात यह है कि उसके लाइसेंस से जुड़ी कोई ठोस जानकारी भी सामने नहीं आई है।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि क्षेत्र में अवैध रूप से नाव और स्टीमर संचालन का नेटवर्क सक्रिय है, जहां नियमों की अनदेखी कर यात्रियों को क्षमता से अधिक बैठाया जाता है। इसके साथ ही कथित रूप से वसूली का खेल भी चलता है, जिससे सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज किया जाता है। इसी बीच यह भी सामने आया है कि ब्रज क्षेत्र में पर्यटन को सुरक्षित बनाने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से लाया गया क्रूज फिलहाल उपयोग में नहीं है। यदि यह सुविधा चालू होती, तो शायद श्रद्धालुओं को असुरक्षित साधनों का सहारा नहीं लेना पड़ता।
हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया गया। सेना, National Disaster Response Force (NDRF) और State Disaster Response Force (SDRF) की टीमों ने स्थानीय गोताखोरों के साथ मिलकर सर्च ऑपरेशन चलाया। देर रात तक चले अभियान के दौरान पलटे हुए स्टीमर को बाहर निकाला गया। फिलहाल 8 घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है, जबकि 14 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। वहीं, 5 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश लगातार जारी है।