सिरोही जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय में इंजेक्शन फेरस कार्बोक्सी माल्टोज़ (FCM) पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला की अध्यक्षता सीएमएचओ डॉ. दिनेश खराड़ी ने की। इस दौरान गर्भवती एवं धात्री महिलाओं में एनीमिया के प्रभावी प्रबंधन, आधुनिक उपचार पद्धतियों और जागरूकता बढ़ाने की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
डॉ. दिनेश खराड़ी ने बताया कि एनीमिया गर्भवती महिलाओं के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। भारत में लगभग हर दूसरी गर्भवती महिला किसी न किसी स्तर पर एनीमिया से पीड़ित होती है, जो मातृ एवं शिशु मृत्यु दर का एक प्रमुख कारण है। गर्भावस्था के दौरान हीमोग्लोबिन का स्तर 11 ग्राम प्रति डेसीलीटर से कम होने पर एनीमिया की स्थिति मानी जाती है, जिससे मां में थकान, कमजोरी, चक्कर आना और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। वहीं, शिशु में कम वजन, समयपूर्व जन्म और विकास अवरोध जैसी जटिलताएं भी देखने को मिलती हैं।
उन्होंने बताया कि पारंपरिक आयरन थेरेपी की तुलना में फेरस कार्बोक्सी माल्टोज़ (FCM) इंजेक्शन अधिक प्रभावी और सुरक्षित है। यह इंजेक्शन शरीर में आयरन की कमी को तेजी से पूरा करता है और मरीज को शीघ्र राहत प्रदान करता है। जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रितेश सांखला ने कार्यशाला में FCM के उपयोग की विधि, सही मात्रा, संभावित दुष्प्रभाव और फील्ड स्तर पर सुरक्षित उपयोग के दिशा-निर्देशों की जानकारी दी। उन्होंने गर्भवती एवं धात्री महिलाओं में इसकी उपलब्धता और निगरानी सुनिश्चित करने में स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
कार्यशाला में जिला औषधि भंडार प्रभारी, जिला चिकित्सालय सिरोही और शिवगंज के विशेषज्ञ चिकित्सक, उपजिला चिकित्सालय आबूरोड़ के चिकित्सा अधिकारी, ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी प्रभारी, जिला एवं ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक, आशा पर्यवेक्षक और ब्लॉक नोडल अधिकारी (M&E) सहित बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे। इस अवसर पर सीएमएचओ डॉ. दिनेश खराड़ी ने जानकारी दी कि जिले में 17 नवंबर से 30 नवंबर तक “पिंक पखवाड़ा” मनाया जाएगा, जिसके तहत एनीमिया नियंत्रण और महिला स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।