ज्योतिषाचार्य जी, आपका ज्योतिष में आने का सफर कैसा रहा? क्या यह एक आश्चर्यजनक यात्रा थी?
बचपन से ही इनकी रूचि अध्यात्म एवं ज्योतिष में रही है। इनके दादा जी जो संस्कृत के विद्वान शिक्षक के साथ कर्मकांड एवं अनुष्ठान भी करवाते थे। उनको देखकर इनकी रूचि ज्योतिष सीखने के लिए प्रबल हुई। कुछ सालों तक ये होटल मैनेजमेंट में रहे जहां अपने साथियों का कुंडली विश्लेषण किया जिससे सभी काफी प्रभावित होते थे। शुरू में घर-परिवार के लोग इन्हें एमबीए के बाद मैनेजमेंट या सरकारी संस्थान में उच्च कोटि की नौकरी के लिएं जाने को कहते थे। क्योंकि इनके पिताजी स्व. नंद कुमार झा जी खुद एक उच्च कोटि के विद्वान सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक थे जिनकी विद्वता एवं ज्ञान के दूर-दराज के लोग भी कायल थे। जब इनकी कही भविष्य वाणी सत्य होने लगी तो परिवार के लोगों ने भी इनका भरपूर साथ दिया।
जब कोई व्यक्ति आपके पास अपनी समस्याएं लेकर आता है, तो आप उनकी मदद कैसे करते हैं?
उनकी समस्या का विश्लेषण करता हूँ और उसके मूल कारण को पहचानने की कोशिश करता हूँ। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मैं उन्हें आत्मविश्वास दिलाता हूँ कि हर समस्या का समाधान संभव है, और सही दिशा में प्रयास करने से वे अपने जीवन में सुधार ला सकते हैं। मैं उन्हें व्यावहारिक और सरल उपाय बताने के साथ-साथ सकारात्मक सोच और धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा देता हूँ।
क्या आप मानते हैं कि ज्योतिष हमारे जीवन को आकार देता है?
ज्योतिष के अनुसार, ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति हमारे जीवन पर कुछ हद तक प्रभाव डालती है। यह हमारे स्वभाव, प्रवृत्तियों और जीवन की संभावनाओं का संकेत देती है। यानी ज्योतिष एक “मार्गदर्शक” की तरह काम करता है, जो हमें सही दिशा दिखा सकता है।
लेकिन यह मानना भी जरूरी है कि केवल ज्योतिष ही हमारे जीवन को पूरी तरह निर्धारित नहीं करता। हमारे कर्म, निर्णय और प्रयास भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। “कर्म ही प्रधान है”—यह सिद्धांत भगवद्गीता में भी स्पष्ट रूप से बताया गया है।
आपके अनुसार, ज्योतिष और आत्म-ज्ञान में क्या संबंध है?
ज्योतिष केवल भविष्य बताने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के भीतर छिपे स्वभाव, गुण-दोष, प्रवृत्तियों और जीवन के उद्देश्य को समझने का एक दर्पण भी है। जब कोई व्यक्ति अपनी कुंडली के माध्यम से स्वयं को समझने की कोशिश करता है, तो वह धीरे-धीरे आत्म-ज्ञान की ओर बढ़ता है।
ज्योतिष में विश्वास करने वाले लोगों के लिए आपका संदेश क्या है?
सबसे पहले, ज्योतिष शास्त्र को केवल भाग्य बताने का साधन न मानें, बल्कि इसे एक मार्गदर्शक के रूप में देखें। यह आपको जीवन की संभावनाओं, चुनौतियों और सही समय का संकेत देता है—लेकिन अंतिम निर्णय और परिणाम आपके कर्मों पर ही निर्भर करते हैं।
आपके अनुसार, ज्योतिष के सबसे बड़े लाभ क्या हैं?
मेरे अनुसार, ज्योतिष शास्त्र के सबसे बड़े लाभ व्यक्ति के जीवन को समझने, सुधारने और संतुलित करने में छिपे हैं। यदि इसे सही दृष्टिकोण से अपनाया जाए, तो यह केवल भविष्यवाणी नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली मार्गदर्शन प्रणाली बन जाता है।
क्या आप मानते हैं कि ज्योतिष हमारे रिश्तों को बेहतर बना सकता है?
हाँ, एक संतुलित दृष्टिकोण से देखें तो ज्योतिष शास्त्र हमारे रिश्तों को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है—लेकिन यह तभी संभव है जब इसे समझदारी के साथ अपनाया जाए। उदाहरण के लिए, कुंडली मिलान या ग्रहों की स्थिति के आधार पर यह जाना जा सकता है कि दो लोगों के बीच कहाँ सामंजस्य है और कहाँ मतभेद हो सकते हैं। इससे हम पहले से ही सावधान रहकर अपने व्यवहार में सुधार कर सकते हैं
ज्योतिष के बारे में आप लोगों को क्या बताना चाहेंगे जो शायद नहीं जानते हैं?
बहुत से लोग मानते हैं कि ज्योतिष सिर्फ भविष्य बताने के लिए है, जबकि वास्तव में यह जीवन को समझने और दिशा देने का विज्ञान है।
ज्योतिष आपको यह संकेत देता है कि आगे क्या हो सकता है, । आपके कर्म और निर्णय हमेशा महत्वपूर्ण रहते हैं। ज्योतिष में बताए गए उपाय (मंत्र, दान, साधना) कोई जादू नहीं हैं, बल्कि वे आपके मन, ऊर्जा और सोच में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए होते हैं।
कोई तीन किताबें जो ज्योतिष की प्रामाणिक जानकारी देतीं हों
1. बृहत पाराशर होरा शास्त्र- इसमें ग्रह, राशियाँ, भाव, दशा, योग आदि का पूरा विज्ञान विस्तार से बताया गया है
2. फलदीपिका- इसमें ग्रहों के विभिन्न भावों में फल, नक्षत्र फल, गोचर, और आयु निर्णय जैसे विषयों को बहुत ही तार्किक तरीके से समझाया गया है, जिससे कुंडली विश्लेषण आसान हो जाता है।
3- बृहज्जातकम् – वराहमिहिर
वराहमिहिर द्वारा रचित यह ग्रंथ शास्त्रीय ज्योतिष में सर्वोच्च स्थान रखता है।
4. जैमिनी सूत्र – महर्षि जैमिनी
जैमिनी ज्योतिष पद्धति का आधार
ज्योतिष सिखने की शुरुआत कैसे करनी चाहिए यदि कोई इस क्षेत्र मेँ आना चाहता है?
यदि कोई व्यक्ति ज्योतिष शास्त्र सीखना चाहता है, तो उसे इसकी शुरुआत सही दिशा, धैर्य और नियमित अभ्यास के साथ करनी चाहिए। ज्योतिष एक गहरी विद्या है, जिसे समझने में समय और समर्पण दोनों लगते हैं। सबसे पहले, मूलभूत ज्ञान पर ध्यान देना चाहिए—जैसे 12 राशियाँ, 9 ग्रह और 12 भाव। यही ज्योतिष की नींव हैं। जब यह आधार मजबूत होगा, तभी आगे की जटिल बातें आसानी से समझ आएंगी।
इसके बाद सही पुस्तकों का अध्ययन जरूरी है। शुरुआत में सरल किताबें पढ़ें और फिर धीरे-धीरे शास्त्रीय ग्रंथों की ओर बढ़ें, जैसे बृहत पाराशर होरा शास्त्र। इससे ज्ञान की गहराई बढ़ती है। केवल पढ़ना ही पर्याप्त नहीं है—कुंडली पढ़ने का अभ्यास करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। अपनी और दूसरों की कुंडलियों को देखकर ग्रहों के प्रभाव को समझने की कोशिश करें। यही अभ्यास आपको एक अच्छा ज्योतिषी बनाता है।
आर्टिफिशल इंटेलीजेंट आने के बाद क्या चुनौतीयाँ रहेंगी और उनसे कैसे पार किया जाये?
AI ज्योतिष को खत्म नहीं करेगा, बल्कि उसे बदल देगा।
“जहाँ मशीन डेटा दे सकती है, वहीं इंसान दिशा और समझ देता है।”
अगर ज्योतिषी समय के साथ खुद को अपडेट करें, तो वे AI के साथ मिलकर
और अधिक प्रभावी, सटीक और उपयोगी मार्गदर्शन दे सकते हैं।





