आपने अपने करियर की शुरुआत कैसे की और परिवार का कितना सहयोग मिला?
मेरा सफर बिल्कुल आसान नहीं था। शुरुआत में जब उन्होंने वास्तु और ज्योतिष के क्षेत्र को चुना, तो परिवार का उन्हें ज्यादा सहयोग नहीं मिला। घर वालों को लगता था कि यह एक स्थिर करियर नहीं है, और कई बार उन्हें अपने फैसले पर सवालों का सामना करना पड़ा।
लेकिन विपन जी ने हार नहीं मानी। उन्होंने अकेले ही अपने दम पर सीखना शुरू किया, छोटी-छोटी जगहों से काम की शुरुआत की और धीरे-धीरे अपने ज्ञान और अनुभव से लोगों का भरोसा जीतना शुरू किया। कई बार आर्थिक परेशानियाँ भी आईं, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से नजर नहीं हटाई। विपन जी कहते हैं कि वही संघर्ष आज उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया है। जिन हालातों में लोग टूट जाते हैं, उन्होंने उन्हीं हालातों को अपनी पहचान बनाने का जरिया बना लिया। आज वही विपन जी, जिन्होंने कभी बिना सहयोग के शुरुआत की थी, अपने क्षेत्र में एक मजबूत और सफल नाम बन चुके हैं। उनकी कहानी यही सिखाती है “अगर इरादे मजबूत हों, तो बिना सहारे भी मंजिल पाई जा सकती है।”
गुरूजी आपके अनुसार, वास्तु शास्त्र में दिशा का क्या महत्व है, और यह हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करती है?
वास्तु शास्त्र केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक ऊर्जा संतुलन प्रणाली है,
जो बताती है कि हमारे घर और कार्यस्थल की दिशाएं हमारी किस्मत को कैसे प्रभावित करती हैं।
उत्तर दिशा (North) — यह धन और करियर की दिशा मानी जाती है।
अगर यह दिशा खुली और साफ हो, तो व्यक्ति को आर्थिक लाभ और नए अवसर मिलते हैं।
पूर्व दिशा (East) — यह सूर्य की दिशा है, जो स्वास्थ्य, ऊर्जा और सकारात्मक सोच को बढ़ाती है।
इस दिशा में प्रवेश द्वार या खिड़की होना बहुत शुभ माना जाता है।
दक्षिण दिशा (South) — यह शक्ति और स्थिरता की दिशा है,
लेकिन अगर इसका संतुलन बिगड़ जाए, तो यह नुकसान भी दे सकती है।
पश्चिम दिशा (West) — यह सफलता और परिणाम की दिशा है,
सही उपयोग से प्रगति मिलती है, लेकिन गलत होने पर रुकावटें आती हैं।
ईशान कोण (North-East) — सबसे पवित्र दिशा,
यहाँ पूजा स्थान बनाना जीवन में शांति और आशीर्वाद लाता है।
अग्नि कोण (South-East) — यह अग्नि तत्व की दिशा है,
किचन के लिए सबसे उत्तम स्थान यही माना जाता है।
नैऋत्य कोण (South-West) — यह स्थिरता और रिश्तों की मजबूती देता है,
मास्टर बेडरूम के लिए यह दिशा सबसे सही होती है।
वायव्य कोण (North-West) — यह परिवर्तन और गति की दिशा है,
जो व्यापार और रिश्तों में मूवमेंट लाती है।
अगर इन सभी दिशाओं का संतुलन सही तरीके से रखा जाए,
तो जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता अपने आप आने लगती है।
लेकिन अगर वास्तु दोष हो,
तो व्यक्ति को धन, स्वास्थ्य और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
इसलिए, घर हो या ऑफिस वास्तु के अनुसार दिशाओं का सही चुनाव बहुत जरूरी है।
ज्योतिष में ग्रहों की स्थिति कैसे हमारे जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करती है?
“देखिए, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब किसी व्यक्ति का जन्म होता है, उस समय आकाश में ग्रहों की जो स्थिति होती है, वही उसकी कुंडली बनाती है। यही कुंडली हमारे जीवन का एक तरह का ‘ब्लूप्रिंट’ मानी जाती है, जो बताती है कि जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों—जैसे करियर, स्वास्थ्य, रिश्ते और धन—पर ग्रहों का क्या प्रभाव पड़ेगा।”
“हर ग्रह एक खास ऊर्जा और क्षेत्र को दर्शाता है। जैसे सूर्य आत्मविश्वास और पहचान देता है चंद्रमा मन और भावनाओं को नियंत्रित करता है
मंगल साहस और ऊर्जा का प्रतीक है
बुध बुद्धि और संवाद को दर्शाता है
गुरु ज्ञान और भाग्य से जुड़ा होता है
शुक्र प्रेम और सुख-सुविधा देता है
शनि अनुशासन और कर्म का फल देता है
राहु-केतु कर्म और जीवन के रहस्यमयी पहलुओं को दर्शाते हैं”
“अगर ये ग्रह मजबूत और सही स्थिति में होते हैं, तो जीवन में सफलता, शांति और प्रगति मिलती है। लेकिन अगर ग्रह कमजोर या अशुभ स्थिति में हों, तो व्यक्ति को संघर्ष, रुकावटें या मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है।”
“ज्योतिष का मकसद डराना नहीं, बल्कि मार्गदर्शन देना है—ताकि हम सही समय पर सही निर्णय ले सकें और अपने जीवन को बेहतर बना
“इसलिए कहा जाता है—ग्रह हमारी किस्मत नहीं लिखते, बल्कि हमें सही दिशा दिखाते हैं।”
वास्तु के अनुसार घर का निर्माण कैसे करना चाहिए ताकि वह सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र बन सके?
1. घर का आकार (Shape of House):
वास्तु के अनुसार घर का आकार चौकोर या आयताकार होना सबसे शुभ माना जाता है। टेढ़े-मेढ़े या कटे हुए प्लॉट नकारात्मक ऊर्जा पैदा करते हैं।
2. ब्रह्मस्थान (Center of House):
घर का बीच वाला हिस्सा (ब्रह्मस्थान) हमेशा खाली और साफ-सुथरा होना चाहिए। यहां भारी सामान रखने से ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है।
3. रंगों का महत्व (Colours):
हल्के और शांत रंग जैसे सफेद, क्रीम, हल्का पीला या हरा रंग सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं। गहरे और बहुत डार्क रंगों से बचना चाहिए।
4. दर्पण (Mirror Placement):
दर्पण को हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा में लगाना शुभ होता है। दक्षिण या पश्चिम दिशा में लगे दर्पण नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकते हैं।
5. इलेक्ट्रॉनिक सामान (Electronics):
टीवी, फ्रिज, इन्वर्टर जैसे उपकरण दक्षिण-पूर्व दिशा में रखने चाहिए, क्योंकि यह अग्नि तत्व से जुड़ा होता है।
6. पौधे (Plants):
घर में तुलसी का पौधा या हरे-भरे पौधे रखना बहुत शुभ माना जाता है। यह वातावरण को शुद्ध करते हैं और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाते हैं।
7. टूटे-फूटे सामान से बचें:
घर में टूटे हुए कांच, घड़ी या खराब सामान रखने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, इन्हें तुरंत हटा देना चाहिए।
8. दरवाजों की स्थिति:
घर के सभी दरवाजे अंदर की ओर खुलने चाहिए और उनमें आवाज (कर्कश ध्वनि) नहीं आनी चाहिए, इससे ऊर्जा का प्रवाह सही रहता है।
ज्योतिष में कुंडली विश्लेषण का क्या महत्व है, और यह हमारे जीवन में कैसे मददगार हो सकता है?
ज्योतिष में कुंडली विश्लेषण
ज्योतिष में कुंडली विश्लेषण को केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि यह एक गहराई से किया गया अध्ययन है, जो व्यक्ति के जीवन के पैटर्न को समझने में मदद करता है। जन्म के समय ग्रहों की स्थिति एक तरह का “कॉस्मिक ब्लूप्रिंट” बनाती है, जिसे पढ़कर ज्योतिषी जीवन की दिशा का अंदाजा लगाते हैं।
आज के समय में, कुंडली विश्लेषण को “डिसीजन सपोर्ट सिस्टम” के रूप में भी देखा जा रहा है। लोग करियर, बिज़नेस, शादी और निवेश जैसे बड़े फैसलों से पहले इसका सहारा लेते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि कुंडली विश्लेषण का असली महत्व “टाइमिंग” में छुपा है। यानी कब कौन सा काम करना सही रहेगा
किस समय जोखिम लेने से बचना चाहिए और कब मौके का पूरा फायदा उठाना चाहिए इसी टाइमिंग को समझकर व्यक्ति अपनी मेहनत को सही दिशा में लगा सकता है। अब युवा पीढ़ी भी ज्योतिष को अंधविश्वास नहीं, बल्कि “सेल्फ-अवेयरनेस टूल” के रूप में देखने लगी है।
कुंडली से यह समझ आता है कि हमारी सोच कैसी है हम किन क्षेत्रों में बेहतर कर सकते हैं और किन आदतों को सुधारने की जरूरत सही समय पर सही निर्णयगलतियों से पहले चेतावनीजीवन में संतुलन और स्पष्टता मानसिक शांति और आत्मविश्वास में वृद्धि कुंडली विश्लेषण केवल भाग्य जानने का जरिया नहीं, बल्कि यह जीवन को समझने और सही दिशा देने का एक सशक्त माध्यम बनता जा रहा है। जरूरत है इसे सही ज्ञान और संतुलित सोच के साथ अपनाने की।का क्या महत्व है, और यह हमारे जीवन में कैसे मददगार हो सकता है?
वास्तु और ज्योतिष में क्या संबंध है, और दोनों कैसे एक दूसरे के पूरक हैं?
वास्तु शास्त्र और ज्योतिष, भारतीय परंपरा के दो महत्वपूर्ण स्तंभ माने जाते हैं, जो व्यक्ति के जीवन को संतुलित और सफल बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। मेरे अनुसार, ये दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और मिलकर सकारात्मक ऊर्जा तथा शुभ फल प्रदान करते हैं।
ज्योतिष शास्त्र मुख्य रूप से ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति और उनके प्रभाव का अध्ययन करता है। यह व्यक्ति की जन्म कुंडली के आधार पर उसके जीवन के विभिन्न पहलुओं—जैसे करियर, स्वास्थ्य, विवाह और धन—के बारे में जानकारी देता है। वहीं, वास्तु शास्त्र भवन निर्माण और दिशाओं के संतुलन पर आधारित है, जो घर या कार्यस्थल में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को सुनिश्चित करता है।
मेरा कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की स्थिति कमजोर है, तो वास्तु के माध्यम से उसमें सुधार किया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी व्यक्ति के जीवन में बार-बार बाधाएं आ रही हैं, तो ज्योतिष इसके कारणों को बताता है, जबकि वास्तु उन समस्याओं के समाधान के लिए घर या ऑफिस में बदलाव सुझाता है।
इसी तरह, वास्तु दोष होने पर व्यक्ति को मानसिक तनाव, आर्थिक परेशानी या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, जिन्हें ज्योतिषीय उपायोंजैसे रत्न धारण, मंत्र जाप या पूजा—के जरिए संतुलित किया जा सकता है।
इस प्रकार, वास्तु और ज्योतिष दोनों मिलकर व्यक्ति के जीवन में संतुलन, सुख-समृद्धि और सफलता लाने का कार्य करते हैं। इसलिए विशेषज्ञ इन्हें एक-दूसरे का पूरक मानते हैं और सलाह देते हैं कि बेहतर परिणाम के लिए दोनों का समन्वय आवश्यक है।
जीवन में स्थिरता और संतुलन कैसे प्राप्त करें, और वास्तु इसमें कैसे मदद कर सकता है?
तेज़ भागती जिंदगी में स्थिरता (Stability) और संतुलन (Balance) कैसे पाया जाए, और इसमें वास्तु शास्त्र की क्या भूमिका हो सकती है।
आज के दौर में तनाव, अस्थिरता और मानसिक दबाव आम हो चुके हैं। ऐसे में प्राचीन भारतीय विज्ञान वास्तु शास्त्र को फिर से महत्व दिया जा रहा है। घर या कार्यस्थल की दिशा, ऊर्जा प्रवाह और पंच तत्व—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। जब ये तत्व संतुलित होते हैं, तो जीवन में स्थिरता और मानसिक शांति बढ़ती है।
जीवन में स्थिरता के लिए वास्तु उपाय:
मुख्य द्वार (Entrance):
घर का मुख्य दरवाज़ा साफ-सुथरा और सकारात्मक दिशा (पूर्व या उत्तर) में हो—यह अवसर और स्थिरता लाता है।
सोने की दिशा (Bedroom):
दक्षिण-पश्चिम दिशा में बेडरूम रखने से जीवन में स्थिरता और निर्णय क्षमता मजबूत होती है।
रसोई (Kitchen):
अग्नि तत्व को संतुलित रखने के लिए रसोई दक्षिण-पूर्व दिशा में होनी चाहिए—यह स्वास्थ्य और ऊर्जा बढ़ाता है।
पूजा स्थान (Puja Room):
उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में पूजा स्थान रखने से मानसिक शांति और सकारात्मक सोच विकसित होती है।
क्लटर हटाना (Decluttering):
घर में अनावश्यक सामान न रखें—रुकी हुई ऊर्जा असंतुलन पैदा करती है।
मानसिक संतुलन के लिए क्या करें?
रोज़ ध्यान (Meditation) और योग करें
घर में प्राकृतिक रोशनी और हवा का ध्यान रखें
शांत रंगों (हल्का नीला, सफेद, हल्का हरा) का उपयोग करें
वास्तु के अनुसार ऑफिस का डिज़ाइन कैसे होना चाहिए ताकि वह कार्यक्षमता और सकारात्मकता को बढ़ावा दे?
आज के समय में हर व्यवसायी चाहता है कि उसका ऑफिस सकारात्मक ऊर्जा से भरा हो और लगातार तरक्की करे। ऐसे में वास्तु शास्त्र के अनुसार ऑफिस का सही डिजाइन बहुत अहम भूमिका निभाता है।
दिशा का महत्व:
वास्तु में मेरे अनुसार ऑफिस का मुख्य प्रवेश द्वार उत्तर या पूर्व दिशा में होना शुभ माना जाता है। इससे नए अवसर और ग्राहकों का आगमन बढ़ता है।
बैठने की सही दिशा:
ऑफिस मालिक या बॉस को दक्षिण-पश्चिम दिशा में बैठना चाहिए और उनका मुख उत्तर या पूर्व की ओर होना चाहिए। इससे निर्णय क्षमता मजबूत होती है।
वर्कस्टेशन प्लानिंग:
कर्मचारियों की सीटिंग उत्तर या पूर्व दिशा में होनी चाहिए, जिससे उनका फोकस और उत्पादकता बढ़ती है।
रोशनी और रंग:
ऑफिस में प्राकृतिक रोशनी का प्रवेश जरूरी है। हल्के रंग जैसे सफेद, क्रीम या हल्का हरा सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं।
सकारात्मक ऊर्जा के उपाय:
ऑफिस में पौधे, जैसे मनी प्लांट या बांस का पौधा, रखना शुभ माना जाता है। साथ ही साफ-सफाई और व्यवस्थित जगह भी ऊर्जा को संतुलित करती है।
वास्तु के अनुसार डिजाइन किया गया ऑफिस न केवल मानसिक शांति देता है बल्कि बिज़नेस में ग्रोथ और सफलता के नए रास्ते भी खोलता है।
ज्योतिष में भविष्यवाणी कैसे की जाती है, और यह कितनी सटीक हो सकती है?
ज्योतिष एक ऐसी विद्या, जो सदियों से लोगों के जीवन में मार्गदर्शन का काम करती आई है। लेकिन बड़ा सवाल है—ज्योतिष में भविष्यवाणी आखिर कैसे की जाती है और यह कितनी सटीक होती है?”
ज्योतिष में व्यक्ति की जन्म तिथि, समय और स्थान के आधार पर उसकी कुंडली बनाई जाती है। इसमें ग्रहों की स्थिति और राशियों का विश्लेषण किया जाता है। विशेष रूप से ज्योतिष शास्त्र में 9 ग्रह, 12 राशियां और 12 भाव महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ग्रहों की चाल (गोचर), दशा-अंतर्दशा और योगों के आधार पर भविष्य की संभावनाएं बताई जाती हैं।
मेरे अनुसार, ज्योतिष पूरी तरह “निश्चित भविष्य” नहीं बताता, बल्कि संभावनाएं और दिशा दिखाता है। इसकी सटीकता कई बातों पर निर्भर करती है:
सही जन्म समय और विवरण
ज्योतिषी का अनुभव और ज्ञान
ग्रहों की जटिल स्थिति का सही विश्लेषण
कुछ लोग इसे वैज्ञानिक नहीं मानते, जबकि कई लोग अपने अनुभव से इसे प्रभावी मानते हैं। इसे संभाव्यता सिद्धांत की तरह भी देखा जा सकता है जहां निश्चितता नहीं, बल्कि संभावनाएं अधिक होती हैं।
ज्योतिष एक मार्गदर्शन देने वाली विद्या है, जो सही तरीके से उपयोग करने पर जीवन में दिशा दे सकती है। लेकिन इसे पूरी तरह अंतिम सत्य मानना सही नहीं है समझदारी और कर्म भी उतने ही जरूरी हैं।
वास्तु शास्त्र में ऊर्जा प्रवाह का क्या महत्व है, और इसे कैसे बनाए रखा जा सकता है?
वास्तु शास्त्र के अनुसार हर स्थान में दो तरह की ऊर्जा होती है सकारात्मक और नकारात्मक। घर, ऑफिस या फैक्ट्री की दिशा, बनावट और वस्तुओं की स्थिति इन ऊर्जाओं को प्रभावित करती है। अगर ऊर्जा संतुलित हो तो व्यक्ति के जीवन में सुख-शांति, स्वास्थ्य और आर्थिक प्रगति आती है, जबकि असंतुलन से तनाव, बीमारी और रुकावटें बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मुख्य द्वार, रसोई, बेडरूम और पूजा स्थान की सही दिशा सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है। उदाहरण के लिए, उत्तर-पूर्व दिशा को सबसे शुभ माना जाता है, जहां साफ-सफाई और खुलापन जरूरी होता है।
ऊर्जा को संतुलित करने के उपाय:
घर में प्राकृतिक रोशनी और हवा का प्रवेश बढ़ाएं
नियमित रूप से सफाई रखें और अव्यवस्था दूर करें
शुभ प्रतीक, पौधे और जल तत्व का उपयोग करें
मुख्य द्वार को आकर्षक और साफ रखें
जीवन में सकारात्मकता कैसे लाएं, और वास्तु एवं ज्योतिष इसमें क्या भूमिका निभा सकते हैं?
आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हर व्यक्ति सकारात्मक ऊर्जा की तलाश में है। ऐसे में वास्तु शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मेरे अनुसार, वास्तु शास्त्र घर और कार्यस्थल में ऊर्जा के संतुलन को बनाए रखने का एक प्राचीन विज्ञान है। सही दिशा, रोशनी और वस्तुओं का उचित स्थान सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है। उदाहरण के लिए, उत्तर-पूर्व दिशा को साफ और हल्का रखना शुभ माना जाता है।
वहीं ज्योतिष शास्त्र ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर व्यक्ति के जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने में मदद करता है। सही समय पर सही निर्णय लेने और ग्रह दोषों के उपाय करने से मानसिक शांति और सकारात्मकता बढ़ सकती है।
मेरा कहना है कि जब वास्तु और ज्योतिष को एक साथ अपनाया जाता है, तो जीवन में संतुलन, सफलता और शांति प्राप्त करना आसान हो जाता है।
गुरूजी आज़ के समय मेँ आर्टिफिशल इंटेलिजेंट आ गयी है,तो लोग आपकी सेवा क्यों लेंगे वो काम तो AI भी कर सकता है उसका व्यावहारिक उत्तर दें?
देखिए, Artificial Intelligence जानकारी दे सकती है, लेकिन अनुभव और संवेदना (Human Touch) नहीं दे सकती।
AI डेटा के आधार पर जवाब देती है, जबकि हम व्यक्ति की व्यक्तिगत स्थिति, ऊर्जा, और जीवन की वास्तविक समस्याओं को समझकर समाधान देते हैं।
जैसे डॉक्टर की रिपोर्ट AI बना सकती है, लेकिन इलाज और विश्वास आज भी डॉक्टर ही देता है।
उसी तरह वास्तु और ज्योतिष में केवल गणना नहीं, बल्कि अनुभव, अंतर्दृष्टि और मार्गदर्शन ज़रूरी होता है।
AI आपको सामान्य सलाह देगा, लेकिन हम आपकी कुंडली, घर और परिस्थितियों के अनुसार व्यक्तिगत समाधान देते हैं।
सबसे बड़ी बात—लोग सेवा नहीं, विश्वास और संतोष लेने आते हैं, और यह केवल इंसान ही दे सकता है।”
दूसरी बात, वास्तु और ज्योतिष में केवल सिद्धांत नहीं चलते,
बल्कि मैदान का अनुभव (practical experience) बहुत मायने रखता है
कौन सा उपाय कब काम करेगा, यह सालों की साधना और अनुभव से आता है, सिर्फ डेटा से नहीं।
और सबसे महत्वपूर्ण जब व्यक्ति परेशान होता है, तो उसे सिर्फ जवाब नहीं चाहिए, उसे समझ, भरोसा और मार्गदर्शन चाहिए…
और यह AI नहीं, एक इंसान ही दे सकता है।






