(न्यूज़ जर्नलिस्ट अंकित कुमार गोयल)
आपने अपने करियर की शुरुआत कैसे की और परिवार का कितना सहयोग मिला?
जिस समय 2008 में जीवन यापन करने की सोच रहे थे क्योंकि हमारी नौकरी तो चली गई थी उस समय हमारे एक मित्र जो ज्योतिष विशेषज्ञ थे उनके साथ भेट हुई और हमने अपनी विद्या जो पढ़ी थी उसकी सहायता से अपना ज्योतिष की शुरुआत की। हमारे परिवार वालों की तरफ से हमको इस कार्य के लिए प्रोत्सन मिला क्योंकि मथुरा से वडोदरा की दूरी काफी थी और उनके सहयोग के बिना कुछ भी संभव नहीं था।
20 साल में 50,000 कुंडली देखीं – ऐसा कौन सा एक कॉमन दोष है जो आजकल 80% लोगों की कुंडली में मिल रहा है?
पितृ दोष एक ऐसा दोष है जो कि कलयुग में जातक अपने माता पिता या किसी भी रिश्तेदार का अंतिम संस्कार या अंतिम विधि पूर्ण नीति नियम से नहीं करता है तो उसके पितृ जन रुष्ट हो जाते है और ऐसे में उस जातक और उसके तीन पीढ़ी के कुंडली में पितृ दोष लग जाता है।
बिना तोड़-फोड़ वास्तु’ का मतलब क्या है? एक दीवार गिराए बिना किसी फैक्ट्री का नुकसान प्रॉफिट में बदलने का कोई केस बताएं?
‘बिना तोड़-फोड़ वास्तु’ (Non-Demolition Vastu) का अर्थ है किसी भवन की संरचना को नुकसान पहुँचाए बिना, केवल ऊर्जा के संतुलन के माध्यम से वास्तु दोषों का निवारण करना। ‘बिना तोड़-फोड़ वास्तु’ का अर्थ इसका मतलब है कि दीवारें गिराने या निर्माण बदलने के बजाय, रंगों (Colours), धातुओं (Metals), प्रतीकों, पिरामिड, दर्पण और दिशाओं के सही उपयोग से सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाना। यह ‘ऊर्जा चिकित्सा’ की तरह काम करता है जहाँ भौतिक परिवर्तन के बिना वातावरण के दोष दूर किए जाते हैं।
फैक्ट्री का केस स्टडी (Case Study)
समस्या: एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में भारी कर्ज और मशीनरी के बार-बार खराब होने के कारण भारी नुकसान हो रहा था। जांच करने पर पाया गया कि फैक्ट्री का मुख्य अग्नि कोण (South-East) कटा हुआ था और वहां पानी का टैंक (गलत दिशा) बना था।
बिना तोड़-फोड़ समाधान:
अग्नि संतुलन: बिना किसी निर्माण के, South-East (आग्नेय) क्षेत्र में लाल रंग के बल्ब और कॉपर (तांबे) की पट्टियों का फर्श के नीचे इस्तेमाल किया गया।
भारी मशीनरी: मशीनों की दिशा को थोड़ा शिफ्ट किया गया ताकि वे भारीपन का संतुलन बना सकें।
प्रवेश द्वार: मुख्य द्वार की नकारात्मक ऊर्जा को रोकने के लिए ब्रास (पीतल) के पिरामिड और स्ट्रिप्स का प्रयोग किया गया।
परिणाम: मात्र 3 से 6 महीनों के भीतर मशीनों का ब्रेकडाउन कम हो गया, कैश फ्लो में सुधार हुआ और नए ऑर्डर मिलने से फैक्ट्री मुनाफे (Profit) में आ गई।
ओरा स्कैनर और वैदिक शास्त्र – टेक्नोलॉजी और परंपरा का ये मेल कैसे काम करता है? क्या मशीन भी नेगेटिव एनर्जी पकड़ लेती है?
ओरा स्कैनर और वैदिक वास्तु शास्त्र का संगम आधुनिक युग में ‘विज्ञान और परंपरा’ के मिलन का एक बेहतरीन उदाहरण है। इसे आप निम्नलिखित बिंदुओं से आसानी से समझ सकते हैं:
ओरा स्कैनर और वैदिक शास्त्र का मेल कैसे काम करता है?
वैदिक शास्त्र में ऊर्जा को ‘प्राण’ या ‘वास्तु पुरुष’ के संतुलन के रूप में देखा जाता है। पहले के समय में ऋषि-मुनि अपनी अंतर्दृष्टि (Intuition) से ऊर्जा का अनुभव करते थे। आज वही काम ओरा स्कैनर करता है दृश्यमान प्रमाण (Visualization): वैदिक शास्त्र कहता है कि हर दिशा की अपनी ऊर्जा होती है। ओरा स्कैनर इन दिशाओं से निकलने वाली सूक्ष्म तरंगों (Electromagnetic Frequencies) को मापकर उन्हें डिजिटल डेटा या ग्राफ में बदल देता है। सटीक विश्लेषण: जहाँ पारंपरिक पद्धति में केवल अनुमान लगाया जाता था, वहां ओरा स्कैनर यह बता देता है कि किसी स्थान पर ऊर्जा का स्तर कितने प्रतिशत (जैसे 40% या 90%) सकारात्मक है। अनुकूलन (Customization): यह मशीन रत्न, यंत्र और धातुओं की फ्रीक्वेंसी को भी जांच सकती है। इससे यह पता चलता है कि कौन सा वैदिक उपाय किस व्यक्ति या स्थान के लिए सबसे सटीक काम करेगा।
क्या मशीन भी नेगेटिव एनर्जी पकड़ लेती है?
हाँ, बिल्कुल। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जिसे हम ‘नेगेटिव एनर्जी’ कहते हैं, वह वास्तव में कम आवृत्ति वाली तरंगें (Low-frequency vibrations) या ‘जियोपैथिक स्ट्रेस’ होती हैं। स्कैनिंग की प्रक्रिया: ओरा स्कैनर इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक फील्ड (EMF) के सिद्धांत पर काम करता है। जब स्कैनर किसी ऐसी जगह पर जाता है जहाँ ऊर्जा का प्रवाह बाधित हो (जैसे मृत ऊर्जा या नकारात्मकता), तो मशीन के सेंसर उसकी ‘वेवलेंथ’ को पकड़ लेते हैं। संकेत: नकारात्मक ऊर्जा होने पर स्कैनर के हैंडल या तो खुलते नहीं हैं या विपरीत दिशा में मुड़ जाते हैं, जो यह दर्शाता है कि वहां ऊर्जा का घनत्व (Density) असंतुलित है।
प्रकार: मशीन न केवल बाहरी वास्तु दोष, बल्कि व्यक्ति के शरीर के सात चक्रों की नकारात्मकता और उसके मानसिक तनाव (Stress level) को भी सटीक रूप से माप सकती है। संक्षेप में कहें तो, वैदिक शास्त्र ‘इलाज’ है और ओरा स्कैनर ‘एक्स-रे’ या ‘एमआरआई’ रिपोर्ट की तरह है। मशीन समस्या की पहचान करती है और प्राचीन शास्त्र उसका समाधान देते हैं। इससे क्लाइंट का भरोसा भी बढ़ता है क्योंकि उन्हें अपनी आंखों के सामने ऊर्जा का बदलाव दिखाई देता है।
पत्नी के निधन ने आपको ज्योतिष की तरफ मोड़ा। उस दर्द से निकली कौन सी सीख आप हर क्लाइंट को देते हैं?
भगवान ने हमारे भाग्य में जो लिखा हुआ है उसे कोई नहीं बदल सकता है। मैने अपनी पत्नी के जीवन को बचाने के लिए अधिकतम प्रयास किए परन्तु विधाता का लिखा हुआ मैं भी नहीं बदल सका। उसके स्वर्गलोक सिधार ने के बाद मैं ज्योतिषी सिख ये ही देता हु कि हमारे भाग्य में जो लिखा है वो हम नहीं बदल सकते किंतु अपने प्रयत्न और अच्छे कर्म से उसे कम जरूर कर सकते है।
ISO 9001-2015 सर्टिफिकेशन ज्योतिष में पहली बार – शास्त्रों को स्टैंडर्डाइज करने की जरूरत क्यों पड़ी?
इसकी आवश्यकता का कारण ये है कि आज के समय में लोग फर्जी और डुप्लीकेट वस्तु से बहुत पैसा कमाते है और किसी भी विषय का ज्ञान न होते हुए भी जातक को हर एक प्रकार का ठगने का प्रयास करते है। हमने ISO और Trademark इसलिए करवाया क्योंकि जनता का विश्वास जीत सके और अच्छी और सही सलाह सूचन जातक तक पहुंचा सके।
अमेरिका-कनाडा वाले क्लाइंट को ‘पीपल के पेड़ में जल चढ़ाओ’ जैसे उपाय कैसे कराते हैं? विदेश के लिए रेमेडी बदलती है?
जी हां विदेश में रेमेडीज थोड़ी बदली जाती है। विदेश में जिस प्रकार हमारे देश में वृक्षों की पूजा करने से जो ऊर्जा प्राप्त होती है उसी प्रकार के मंत्र उन जातकों को दिए जाते है जिससे उनको समान फल प्राप्त हो। और कुछ
रेमेडीज कॉमन होती है जैसे मंत्र जाप करना है मंदिर में जाके पूजन करना है इत्यादि।
90% सक्सेस रेट है, बाकी 10% केस क्यों काम नहीं करते? क्या कर्म ग्रहों से भी बड़ा है?
जी हां। इंसान का कर्म ग्रहों से भी बड़ा है क्योंकि बहुत सारे जातकों को उनका जन्म समय या जन्म की तिथि सही या पूर्ण रूप से ज्ञात नहीं होती जिसके कारण उनकी जन्म कुंडली का सही विश्लेषण नहीं दिया जा सकता और जितना अच्छा कर्म कर ले जितने भी अच्छे उपाय कर ले परन्तु पिछले ७ जन्मों में जो भी कर्म करे है अच्छे या बुरे उनका भुगतान तो हमें करना ही होगा।
2026 में घरों का सबसे बड़ा वास्तु मिस्टेक क्या दिख रहा है? एक 2 मिनट का फ्री उपाय जो हर कोई अभी कर सके?
२०२६ के साल का गुणांक करे तो इसका कुल अंक १ होता है जो कि सूर्य ग्रह को दर्शाता है। और सूर्य के लिए सबसे बड़े दुश्मन ग्रह है शनि ग्रह । इसलिए २०१६ में सूर्य देव की अधिक से अधिक प्रार्थना करे सूर्य देव को आर्ग दे सूर्य का दान करे और काले रंग के कपड़े एवं वस्तुओं से बच कर रहे।
कई लोग कहते हैं ‘डराकर पैसे बनाते हैं’। आप क्लाइंट को पहली मीटिंग में ही क्या बोलकर उनका डर दूर करते हैं?
आपकी बात १०० % सही है क्योंकि मेरे पास जितने भी जातक आते है वे कई जगह ठोकर खाए हुए और डरे हुए होते है, हम सर्व प्रथम उनके डर को दूर करने लिए लिए उनसे बात करते है क्या अच्छा है क्या बुरा है जीवन में ये जानते है । इसके अलावा हम जातक को भगवान के होने का और वे कभी भी किसी का बुरा नहीं होने देते इस बात का विश्वास दिलाते है।
अगर आज आपकी पत्नी आपको देख रही हों, तो आप अपने 20 साल के इस सफर को 1 लाइन में कैसे बताएंगे?
मैने अब तक हजारों जातकों को उनके जीवन में आ रही समस्या और परेशानियों से निकलने का मार्गदर्शन दिया है और शायद में काफी हद तक इस कार्य में सफल भी रहा हु और मैं जनता हु कि मेरी स्वर्गीय पत्नी आज ये देख कर बहुत खुश होती होगी क्योंकि वे खुद इस बात को मानती थी कि यदि हम किसी के दुख को दूर करने के लिए चुने गए है तो हम बहुत भाग्यशाली है। और भगवान ने मुझे एक माध्यम के रूप में चुना है कि मैं लोगों की कुछ मदद कर सकूं ।















