आशीष प्रमोद गोस्वामी, एक छोटे से गाँव से निकलकर पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने वाले एक युवा पत्रकार हैं। उन्होंने अपनी शिक्षा और संघर्ष से पत्रकारिता में अपना स्थान बनाया है ।आपकी कहानी केवल पत्रकार बनने तक सीमित नहीं हैं बल्कि जोश और जूनून की है जो लोगों को आगे बढ़ने मेँ भी सहायक होगी ।पत्रकारिता की व्यवहारिक रोचक जानकारी ही नहीं मिलेगी बल्कि आपके मीडिया के क्षेत्र मेँ काम भी आएगी ।
आपकी पत्रकारिता की शुरुआत कैसे हुई और परिवार का कितना सहयोग मिला?
मैं उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के छोटे से गाँव अहिरौली पड़री से आता हूँ। मेरे पिता श्री प्रमोद गिरी जी किसान हैं और माता जी गृहणी, साधारण परिवार में पला-बढ़ा हूँ, लेकिन बचपन से ही समाज और देश के लिए कुछ करने की भावना मेरे अंदर थी। जब मैं 10वीं कक्षा में था तभी मैंने तय कर लिया था कि मुझे पत्रकारिता में ही अपना करियर बनाना है। इस रास्ते पर चलने में मेरे परिवार का बहुत बड़ा योगदान रहा, खासकर मेरे छोटे दादा जी का। उन्होंने आर्थिक और मानसिक दोनों तरह से मेरा साथ दिया। लखनऊ से 12वीं करने के बाद मैं दिल्ली आया, जहाँ मैंने गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक और ISOMES से डिप्लोमा किया। इसके बाद 2013 में News24 से इंटर्नशिप और फिर India News UP से बतौर ट्रेनी अपने करियर की शुरुआत की, उस बीच News 18 Network में रहते हुए 2018 से बतौर न्यूज एंकर करियर को नई दिशा दी..!!
आपको पत्रकारिता में क्या सबसे ज्यादा आकर्षित करता है और क्यों?
मेरे लिए पत्रकारिता सिर्फ एक पेशा नहीं बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी है। मुझे सबसे ज्यादा यह बात आकर्षित करती है कि पत्रकारिता के माध्यम से हम समाज की आवाज़ को देश के सामने रख सकते हैं।कई बार ऐसी समस्याएँ होती हैं जो आम लोगों तक सीमित रह जाती हैं, लेकिन जब मीडिया उन्हें उठाता है तो सरकार और प्रशासन को उस पर ध्यान देना पड़ता है। यही पत्रकारिता की सबसे बड़ी ताकत है।
आपने करियर की शुरूआत में PCR (Production Control Room) में बतौर CG काम किया, इसमें कैसे काम होता है?
PCR यानी Production Control Room किसी भी न्यूज़ चैनल का कंट्रोल सेंटर होता है। यहीं से पूरा न्यूज़ बुलेटिन कंट्रोल होता है। CG यानी Character Generator का काम स्क्रीन पर चलने वाले टेक्स्ट और ग्राफिक्स से जुड़ा होता है। जैसे ब्रेकिंग न्यूज़, लोअर थर्ड, नाम पट्टी, हेडलाइन आदि। जब एंकर बुलेटिन पढ़ रहा होता है तो PCR से ही तय होता है कि कौन-सा वीडियो चलेगा, कौन-सी ग्राफिक्स आएगी और किस समय ब्रेक लेना है। यह टीमवर्क का काम होता है जहाँ प्रोड्यूसर, डायरेक्टर, CG ऑपरेटर और टेक्निकल टीम मिलकर बुलेटिन को सफल बनाते हैं।
मीडिया में प्रोड्यूसर का कार्य क्या होता है?
किसी भी न्यूज़ बुलेटिन का सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति प्रोड्यूसर होता है। वही तय करता है कि बुलेटिन में कौन-सी खबरें जाएँगी, उनका क्रम क्या होगा और उन्हें कैसे प्रस्तुत किया जाएगा। प्रोड्यूसर स्क्रिप्ट तैयार करता है, रिपोर्टरों से इनपुट लेता है, ग्राफिक्स टीम को निर्देश देता है और PCR टीम के साथ मिलकर पूरा बुलेटिन संचालित करता है। सरल शब्दों में कहें तो प्रोड्यूसर ही पूरे न्यूज़ शो का दिमाग और संचालनकर्ता होता है।
आप अपने काम को कैसे संतुलित करते हैं और दर्शकों से कैसे जुड़ते हैं?
पत्रकारिता में समय का कोई तय दायरा नहीं होता, इसलिए संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण होता है। लेकिन मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि खबरों की तैयारी पूरी गहराई से करूँ। दर्शकों से जुड़ने के लिए मैं हमेशा उनकी समस्याओं और मुद्दों को समझने की कोशिश करता हूँ। जब आप बतौर न्यूज एंकर जनता की भाषा में और उनके मुद्दों पर बात करते हैं, तो दर्शक खुद-ब-खुद जुड़ जाते हैं
आपकी पत्रकारिता में सबसे बड़ा बदलाव क्या है और आप इसे कैसे देखते हैं?
पिछले कुछ वर्षों में पत्रकारिता में सबसे बड़ा बदलाव डिजिटल और सोशल मीडिया का प्रभाव है। अब खबरें सिर्फ टीवी या अखबार तक सीमित नहीं रहीं।आज हर व्यक्ति के हाथ में मोबाइल है और सूचना बहुत तेजी से फैलती है। यह अवसर भी है और चुनौती भी। इसलिए पत्रकारों के लिए जिम्मेदारी और बढ़ गई है कि वे सही और प्रमाणित खबर ही लोगों तक पहुँचाएँ।
आप समाज में बदलाव लाने के लिए पत्रकारिता का उपयोग कैसे करते हैं?
मेरे लिए पत्रकारिता का सबसे बड़ा उद्देश्य जनहित के मुद्दों को उठाना है। चाहे वह किसानों की समस्या हो, युवाओं की बेरोज़गारी या सामाजिक विषय मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि इन मुद्दों को मजबूती से उठाया जाए। जब मीडिया किसी मुद्दे को लगातार उठाता है तो उसका असर समाज और सरकार दोनों पर पड़ता है।
आपका सबसे बड़ा सपना क्या है?
मेरा सपना है कि पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में योगदान दे सकूँ। मैं चाहता हूँ कि मेरी पत्रकारिता ऐसी हो जिस पर दर्शक भरोसा करें और उसे जनहित की आवाज़ समझें
नए लोगों को आप क्या सलाह देंगे जो पत्रकारिता में आना चाहते हैं?
पत्रकारिता में आने वाले युवाओं को सबसे पहले धैर्य और मेहनत को अपनाना होगा। शुरुआत में छोटे काम भी करने पड़ते हैं, जैसे की मैंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया… टिकर चलाने से लेकर सीजी ऑपरेटर.. फिर प्रोड्यूसर, रिपोर्टर और बाद में बतौर एक न्यूज एंकर, शुरुआत में किया हुआ संघर्ष उससे प्राप्त अनुभव आगे चलकर आपकी इस पेशे में सबसे बड़ी ताकत बनता है दूसरी बात यह है कि हमेशा तथ्यों की जांच करके ही खबर पेश करें और अपनी विश्वसनीयता को सबसे ऊपर रखें
आपकी भविष्य की योजनाएँ क्या हैं?
मेरी कोशिश यही रहेगी कि मैं पत्रकारिता के माध्यम से समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों को मजबूती से उठाता रहूँ। साथ ही युवाओं को भी पत्रकारिता के प्रति जागरूक और प्रेरित करने का प्रयास करता रहूँगा।
आप अपने काम में निष्पक्षता और संतुलन कैसे बनाए रखते हैं?
देखिए निष्पक्षता ही पत्रकारिता की आत्मा है। इसलिए किसी भी खबर को प्रस्तुत करने से पहले उसके सभी पहलुओं को समझना जरूरी होता है। मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि खबर को तथ्यों के आधार पर प्रस्तुत किया जाए, ताकि दर्शकों को सही जानकारी मिल सके।
पत्रकारिता में सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती है तेजी से फैलती गलत जानकारी। सोशल मीडिया के दौर में कई बार अपुष्ट खबरें भी तेजी से वायरल हो जाती हैं।ऐसे में पत्रकार की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वह तथ्यों की पुष्टि करके ही खबर को लोगों तक पहुँचाए।
आप दर्शकों को जागरूक करने के लिए क्या करते हैं?
मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि खबर सिर्फ सूचना न हो बल्कि लोगों को जागरूक भी करे। इसलिए खबरों को समझाते समय उनके सामाजिक और राष्ट्रीय महत्व पर भी चर्चा करता हूँ।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने के बाद क्या चुनौतियाँ बढ़ेंगी?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस निश्चित रूप से मीडिया इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव ला रहा है। इससे काम की गति बढ़ेगी, लेकिन इसके साथ फेक कंटेंट और डीपफेक जैसी चुनौतियाँ भी बढ़ेंगी। मेरा मानना है कि पत्रकारों को तकनीक से डरने की बजाय उसे समझना और सही तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए। आखिरकार पत्रकारिता की असली ताकत मानवीय समझ, अनुभव और विश्वसनीयता है, जिसे कोई तकनीक पूरी तरह नहीं बदल सकती






