महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आने की संभावना जताई जा रही है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में अंदरूनी हलचल तेज हो गई है और पार्टी के कई सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट के संपर्क में होने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में जोर पकड़ रही है। मुंबई से लेकर दिल्ली तक इस संभावित टूट को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। सूत्रों के मुताबिक, उद्धव गुट के कुछ सांसद दिल्ली में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे और सांसद श्रीकांत शिंदे से मुलाकात कर सकते हैं। इसी बीच पार्टी नेतृत्व ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और सांसदों के रुख को लेकर लगातार संपर्क साधा जा रहा है।
राजनीतिक अटकलों के बीच शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने खुलकर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई पोस्ट साझा करते हुए कथित बागी सांसदों पर निशाना साधा। राउत ने बिना नाम लिए कहा कि कुछ नेताओं की राजनीतिक पहचान केवल ठाकरे नाम की वजह से बनी और अब वही लोग पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं। संजय राउत ने दावा किया कि कुछ सांसद चार्टर्ड फ्लाइट के जरिए दिल्ली पहुंचे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसदों को पार्टी छोड़ने के लिए आर्थिक लालच दिया गया है। हालांकि, इन आरोपों को लेकर किसी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान राउत ने कहा कि पार्टी ने संसदीय दल की बैठक बुलाई है और सभी सांसदों को व्हिप जारी किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी की ओर से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजकर राजनीतिक घटनाक्रम की जानकारी दी गई है। वहीं, शिवसेना (UBT) सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि अब तक किसी सांसद ने औपचारिक रूप से पार्टी छोड़ने की जानकारी नहीं दी है। उन्होंने कहा कि पार्टी संविधान और नियमों के तहत अपनी बात लोकसभा अध्यक्ष के सामने रखेगी।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट के कुछ सांसद शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं। जिन नामों की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है उनमें संजय दिना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल आष्टीकर, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर, भानुसाहेब वाकचौरे और संजय जाधव शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, अभी तक इन नेताओं की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई बयान सामने नहीं आया है।
अगर यह राजनीतिक फेरबदल होता है तो महाराष्ट्र की राजनीति में इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है। फिलहाल सभी की नजर दिल्ली में होने वाली बैठकों और लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष पेश किए जाने वाले दस्तावेजों पर टिकी हुई है।