उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। एक ओर समाजवादी पार्टी (सपा) ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की कोशिश में जुटी है, तो दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के समर्थन को मजबूत करने पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में सपा अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने बुधवार को पार्टी के ब्राह्मण नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। बैठक में मौजूदा और पूर्व विधायक, सांसद तथा पूर्व सांसद शामिल हो रहे हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति, संगठनात्मक मजबूती और ब्राह्मण समाज की भागीदारी बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की कोशिश में सपा
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सपा अब अपने पारंपरिक मुस्लिम-यादव समीकरण से आगे बढ़कर व्यापक सामाजिक गठबंधन बनाने की कोशिश कर रही है। इसी रणनीति के तहत पार्टी ब्राह्मण मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने के प्रयास में लगी है। हाल के वर्षों में भाजपा और ब्राह्मण समाज के रिश्तों को लेकर उठी चर्चाओं के बीच सपा इस वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास कर रही है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि 2027 में भाजपा को चुनौती देने के लिए अगड़ी जातियों, विशेष रूप से ब्राह्मण मतदाताओं का समर्थन महत्वपूर्ण हो सकता है।
मायावती ने OBC नेताओं के साथ किया मंथन
वहीं, बसपा प्रमुख Mayawati ने मंगलवार को पार्टी के OBC नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा की। बैठक में उन्होंने 2007 के विधानसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि OBC समुदाय के व्यापक समर्थन से बसपा ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। उन्होंने पार्टी नेताओं से 2027 में भी इसी तरह का जनाधार तैयार करने के लिए सक्रिय रूप से काम करने का आह्वान किया।
100 से अधिक सीटों पर असर रखते हैं ब्राह्मण मतदाता
उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाताओं को प्रभावशाली माना जाता है। राज्य में उनकी आबादी लगभग 10 से 12 प्रतिशत के बीच मानी जाती है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, करीब 100 विधानसभा सीटों पर ब्राह्मण मतदाता चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं, जबकि कई जिलों में उनकी भूमिका निर्णायक मानी जाती है। इसी वजह से 2027 के चुनाव से पहले प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने सामाजिक समीकरण मजबूत करने में जुट गए हैं। आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय और सामाजिक समीकरणों को लेकर गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।