समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आज, 1 जुलाई को अपना 53वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस अवसर पर उन्हें राजनीतिक दलों के नेताओं, समर्थकों और शुभचिंतकों की ओर से बधाइयां मिल रही हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री योगी ने अपने संदेश में लिखा, “उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई। प्रभु श्री राम से आपके उत्तम स्वास्थ्य, आरोग्यता और दीर्घायु की प्रार्थना है।”
सियासी प्रतिद्वंद्विता के बीच शिष्टाचार की मिसाल
उत्तर प्रदेश की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (SP) के बीच लंबे समय से तीखी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा रही है। दोनों दलों के नेता अक्सर एक-दूसरे पर राजनीतिक हमले करते हैं, लेकिन निजी अवसरों पर एक-दूसरे को शुभकामनाएं देना लोकतांत्रिक परंपरा और आपसी सम्मान का संदेश भी देता है।
सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड
साल 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सरकार को सत्ता से बाहर कर पूर्ण बहुमत हासिल किया था। इसके बाद पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया। महज 38 वर्ष की उम्र में मुख्यमंत्री बनकर अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री होने का रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने 2012 से 2017 तक राज्य की कमान संभाली। वर्तमान में समाजवादी पार्टी की पूरी जिम्मेदारी अखिलेश यादव के कंधों पर है। मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद वह पार्टी के निर्विवाद नेता हैं और आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी को सत्ता में वापस लाने की चुनौती का सामना कर रहे हैं।
इंजीनियरिंग से राजनीति तक का सफर
1 जुलाई 1973 को इटावा जिले के सैफई गांव में जन्मे अखिलेश यादव, मुलायम सिंह यादव और मालती देवी की इकलौती संतान हैं। उनकी शुरुआती शिक्षा सैफई और इटावा में हुई। इसके बाद उन्होंने राजस्थान के धौलपुर मिलिट्री स्कूल से स्कूली शिक्षा पूरी की और कर्नाटक की मैसूर यूनिवर्सिटी से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की। खेलों में भी उनकी विशेष रुचि रही है। उन्हें बचपन से फुटबॉल और क्रिकेट खेलना पसंद था। राजनीति में उनकी औपचारिक शुरुआत साल 2000 में हुई, जब उन्होंने कन्नौज लोकसभा सीट के उपचुनाव में जीत दर्ज कर संसद में प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और उत्तर प्रदेश की राजनीति के प्रमुख चेहरों में अपनी पहचान बनाई।