लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। मायावती ने कहा कि केवल बीएसपी के नीले रंग को अपनाने से किसी राजनीतिक दल की विचारधारा नहीं बदल सकती। उन्होंने सपा के PDA फॉर्मूले पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी दल दलितों, पिछड़ों और अन्य वंचित वर्गों के मुद्दों पर अपना रुख बदलते रहते हैं। मायावती ने यह बातें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के जरिए कहीं। उन्होंने कहा कि नीला गमछा पहनने, कपड़ों में नीला रंग अपनाने या मंच पर नीले कपड़े लगाने से किसी पार्टी की सोच नहीं बदल जाती।
‘नीला रंग अपनाने से सोच नहीं बदलेगी’
मायावती ने आरोप लगाया कि सपा, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल भले ही बीएसपी के नीले रंग का इस्तेमाल करें, लेकिन इससे गरीबों, दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और अन्य उपेक्षित वर्गों को लेकर उनकी सोच नहीं बदल जाएगी। उन्होंने कहा कि इन वर्गों के हितों की बात करने से पहले राजनीतिक दलों को अपनी विचारधारा और नीयत पर आत्ममंथन करना चाहिए। मायावती के मुताबिक, सिर्फ अंबेडकरवादी होने का दावा करने से कोई पार्टी बहुजन हितैषी नहीं बन जाती।
सपा के PDA पर भी साधा निशाना
बीएसपी प्रमुख ने समाजवादी पार्टी के PDA को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा की कथनी और करनी में अंतर रहा है और दलित, पिछड़े तथा अन्य वंचित वर्गों के मुद्दों पर उसका रवैया लगातार बदलता रहा है। मायावती ने दावा किया कि बहुजन समाज के वास्तविक हितों और कल्याण की राजनीति केवल बीएसपी ही करती है। उन्होंने पार्टी को अंबेडकरवादी विचारधारा पर चलने वाला संगठन बताया।
कांग्रेस को बताया ‘डूबता जहाज’
मायावती ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कई छोटी पार्टियां अपने दम पर चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं हैं और चुनाव के बाद सत्ता में भागीदारी की कोशिश करती हैं।उन्होंने कांग्रेस को ‘डूबता जहाज’ बताते हुए कहा कि जो लोग बीएसपी से निकाले गए नेताओं को अपने साथ लेने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें पहले अपनी राजनीतिक स्थिति पर विचार करना चाहिए। मायावती ने सवाल उठाया कि कोई व्यक्ति ऐसे राजनीतिक दल के साथ जाकर अपना भविष्य क्यों अंधकार में डालेगा।
बीएसपी से निकाले नेताओं पर भी बोला हमला
मायावती ने बीएसपी से निष्कासित किए गए नेताओं पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि अनुशासनहीनता समेत विभिन्न कारणों से पार्टी से बाहर किए गए कई नेता लगातार राजनीतिक दल बदलते रहे हैं। मायावती ने ऐसे नेताओं को अवसरवादी और स्वार्थी बताते हुए कहा कि कुछ लोग दूसरी पार्टियों के सहारे नए संगठन या छोटी राजनीतिक पार्टियां भी खड़ी कर लेते हैं। उनके मुताबिक, इस तरह की राजनीति से बहुजन समाज का व्यापक हित पूरा नहीं हो सकता।
अशोक सिद्धार्थ के राजनीतिक संन्यास पर मायावती ने उठाए सवाल
मायावती ने अपने समधी और पूर्व बीएसपी नेता अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के मामले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि बीएसपी की ओर से उन्हें राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दिए जाने के बावजूद उन्होंने तत्काल इसकी घोषणा नहीं की थी। मायावती के मुताबिक, इसके बाद पूरी रात उन्हें अपना फैसला रोकने के लिए मनाने की कोशिशें होती रहीं। उन्होंने दावा किया कि जब इन कोशिशों में सफलता नहीं मिली तो अगले दिन करीब सुबह 6:30 बजे अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा करनी पड़ी।