नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ हाल की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि राजधानी की सड़कें, पार्क और सार्वजनिक परिवहन ऐसी जगहें नहीं होनी चाहिए जहां महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस करें।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि महिलाओं को दिन या रात, सार्वजनिक स्थानों पर स्वतंत्र रूप से आने-जाने का अधिकार है। पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि उन्हें सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराया जाए। अदालत ने इस मामले में केंद्र, दिल्ली पुलिस और दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल से विस्तृत जवाब और स्थिति रिपोर्ट मांगी है।
दिल्ली-एनसीआर की घटनाओं के बाद सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ सामने आई कई घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। इनमें दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की से कथित गैंगरेप का मामला भी शामिल है। इसके अलावा ग्रेटर नोएडा से दिल्ली आने वाली बस में नाबालिग से कथित यौन अपराध की घटना का भी अदालत ने संज्ञान लिया। अदालत ने इन घटनाओं को सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा गंभीर सवाल बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था की कमियों को उजागर करती हैं। कोर्ट ने 2012 के निर्भया मामले का भी संदर्भ देते हुए पूछा कि क्या उससे पर्याप्त सबक लिया गया है।
पार्क, सड़क और मेट्रो में सुरक्षा पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिलाओं को सड़क पर चलते समय, बस या मेट्रो से सफर करते समय और पार्क जैसे सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा का भरोसा मिलना चाहिए। अदालत का जोर केवल घटना के बाद कार्रवाई करने पर नहीं, बल्कि अपराध की रोकथाम के लिए पहले से प्रभावी व्यवस्था तैयार करने पर है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को संवेदनशील इलाकों की पहचान कर वहां निगरानी, गश्त और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने को कहा है। इसके साथ ही सार्वजनिक पार्कों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर रोशनी तथा CCTV व्यवस्था की समीक्षा पर भी जोर दिया गया है।
DDA के 736 पार्कों में सिर्फ 16 में CCTV
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर किए गए ऑडिट में दिल्ली के पार्कों की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। DDA के अधीन आने वाले 736 पार्कों में से केवल 16 पार्कों में CCTV कैमरों की व्यवस्था होने की जानकारी सामने आई है। यानी अधिकांश पार्कों में निगरानी व्यवस्था का बड़ा अभाव है। आस्था कुंज पार्क की घटना के बाद अलग-अलग इलाकों के पार्कों में सुरक्षा व्यवस्था की पड़ताल की गई। कई जगहों पर खराब रोशनी, CCTV की कमी और सुनसान हिस्सों को लेकर सवाल उठे हैं। पुलिस ने भी ऐसे संवेदनशील स्थानों की पहचान कर संबंधित एजेंसियों के साथ सुरक्षा सुधार के लिए कदम उठाने शुरू किए हैं।
आस्था कुंज में CCTV और फ्लडलाइट लगाने की तैयारी
आस्था कुंज पार्क की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए DDA ने नए CCTV सिस्टम और LED फ्लडलाइट लगाने की प्रक्रिया शुरू की है। रिपोर्ट के मुताबिक, CCTV निगरानी व्यवस्था के लिए टेंडर भी जारी किया गया है। पार्क में रोशनी बढ़ाने के लिए भी अलग से व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा दिल्ली के दूसरे संवेदनशील पार्कों और इलाकों में भी पुलिस ने सुरक्षा कमियों की पहचान शुरू की है। खराब स्ट्रीट लाइट, CCTV की कमी और सुनसान रास्तों को लेकर संबंधित एजेंसियों को जानकारी दी जा रही है। दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी कहा है कि सुरक्षा के नाम पर महिलाओं की आवाजाही और आजादी पर प्रतिबंध लगाने के बजाय सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाया जाना चाहिए।