लखनऊ के प्रतिष्ठित ला मार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज की कक्षा 2 की छात्रा एवं मात्र 6 वर्ष 9 माह की होनहार बाल प्रतिभा कुमारी मोहलक्षिका सिंह ने अपनी असाधारण प्रतिभा, अनुशासन, साहस एवं दृढ़ संकल्प का परिचय देते हुए 13 जुलाई 2026 को एस.पी. पब्लिक स्कूल, सदर, कैंट, लखनऊ में आयोजित अमेजिंग ओलंपिया वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (कनाडा) के आधिकारिक विश्व रिकॉर्ड प्रयास में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की।
मोहलक्षिका सिंह ने “द मोस्ट अल्टरनेटिंग वन-हैंड एंड टू-हैंड कार्टव्हील सीक्वेंसेस इन वन मिनट” (The Most Alternating One-Hand and Two-Hand Cartwheel Sequences in One Minute – Gymnastics Under-16, Female Individual Event) श्रेणी में एक मिनट के भीतर बैक-एंड-फोर्थ (शटल) मूवमेंट करते हुए 37 वैध कार्टव्हील सफलतापूर्वक पूर्ण कर विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया। यह विश्व रिकॉर्ड प्रयास परफॉर्मिंग एंड फाइन आर्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (PFAFI) के सहयोग से आयोजित किया गया।
विश्व रिकॉर्ड स्थापित करने के उपरांत आयोजित एक गरिमामय समारोह में मोहलक्षिका सिंह को अमेजिंग ओलंपिया वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (कनाडा) द्वारा प्रदत्त ऑफिशियल वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया।
यह सम्मान अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित श्रीमती रचना गोविल, कोल इंडिया लिमिटेड की स्वतंत्र निदेशक, बाबू सुंदर सिंह ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स के अध्यक्ष श्री आनंद शेखर सिंह तथा वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रणय विक्रम सिंह द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान किया गया।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य श्री पवन सिंह चौहान ने भी मोहलक्षिका सिंह को सम्मानित कर उनकी उपलब्धि पर बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं,इस अवसर पर श्री जसपाल सिंह जनरल सेक्रेटरी यूपी कराते एसोसिएशन एवं श्री दुर्गेश त्रिपाठी,राष्ट्रीय अध्यक्ष एकल फ्यूचर एवं श्री केबी पंत मंच पर उपस्थित रहे ।
समारोह में उपस्थित शिक्षाविदों, खेल विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने मोहलक्षिका सिंह की प्रतिभा, अनुशासन, आत्मविश्वास एवं समर्पण की सराहना करते हुए इसे उत्तर प्रदेश एवं देश के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इतनी कम आयु में विश्व रिकॉर्ड स्थापित करना अन्य बच्चों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण है।
मोहलक्षिका सिंह की इस उपलब्धि ने ला मार्टिनियर गर्ल्स स्कूल, लखनऊ और उत्तर प्रदेश का गौरव बढ़ाने के साथ-साथ पूरे देश को गौरवान्वित किया है। उन्होंने अपनी मेहनत, लगन और निरंतर अभ्यास के बल पर यह सिद्ध कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास निरंतर हों, तो आयु कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनती।
