लखनऊ। जौनपुर के आर.एस. इंटर कॉलेज ककराही से जुड़े एक मामले में मृतक आश्रित कोटे का कथित रूप से दोहरा लाभ लेने, हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा तथा गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई के बावजूद सरकारी पद पर बने रहने के आरोपों को लेकर निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।
इस मामले को लेकर आर्यवर्त आर्य त्रिदंडी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री ऋषि त्रिवेदी ने अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त करते हुए सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। श्री त्रिवेदी ने कहा कि यदि शिकायत में उठाए गए गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कर समयबद्ध कार्रवाई नहीं की गई तो इससे आमजन का सरकार एवं व्यवस्था के प्रति विश्वास प्रभावित हो सकता है।
वहीं मानवाधिकार परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुबोध श्रीवास्तव ने भी पीड़ित को तत्काल न्याय दिलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस लड़ाई में उनका संगठन पीड़ित के साथ खड़ा है और संबंधित अधिकारियों से मामले में शीघ्र एवं निष्पक्ष कार्रवाई की अपेक्षा है।
शिकायतकर्ता राजेश कुमार तिवारी, निवासी ग्राम/पोस्ट-दमोदरा, थाना-रामपुर, तहसील-मड़ियाहूं, जिला-जौनपुर ने 26 जुलाई 2026 को लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की। उनका आरोप है कि लगातार शिकायत किए जाने के बावजूद अभी तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।
शिकायत के अनुसार, श्री दिनेश प्रताप सिंह, सहायक अध्यापक, आर.एस. इंटर कॉलेज ककराही, जौनपुर के संबंध में सरकारी नियमों के विपरीत पद पर बने रहने तथा मृतक आश्रित कोटे का कथित लाभ लेने के आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ता के अनुसार, आर. एस. इंटर कॉलेज ककराही में कार्यरत सहायक अध्यापक श्री रविनाथ सिंह की मृत्यु वर्ष 1987 में हुई थी। इसके बाद शिकायत में दिनेश प्रताप सिंह की 16 अक्टूबर 1992 को मृतक आश्रित कोटे के अंतर्गत सहायक लिपिक पद पर नियुक्ति किए जाने का उल्लेख है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाद में दिनेश प्रताप सिंह ने कथित रूप से प्रभाव एवं धनबल का इस्तेमाल करते हुए सहायक लिपिक पद छोड़कर उसी कॉलेज में 23 जुलाई 2003 को मृतक आश्रित के रूप में सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति प्राप्त की। शिकायतकर्ता ने इस नियुक्ति को नियम विरुद्ध बताते हुए इसकी जांच की मांग की है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2004 में दिनेश प्रताप सिंह के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ और पुलिस द्वारा उनकी गिरफ्तारी की गई। शिकायत के अनुसार, इस मामले में 15 अप्रैल 2011 को जिला एवं सत्र न्यायालय, जौनपुर द्वारा दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
इसके अतिरिक्त शिकायत में उक्त हत्या प्रकरण में गैंगस्टर एक्ट लगाए जाने तथा 17 अक्टूबर 2024 को गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में सजा सुनाए जाने और आरोपी को जेल भेजे जाने का भी उल्लेख किया गया है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि वर्तमान में उच्च न्यायालय द्वारा जमानत दिए जाने के बावजूद संबंधित व्यक्ति के सरकारी पद पर बने रहने की स्थिति की जांच आवश्यक है। शिकायत में नियुक्ति से संबंधित विभागीय स्तर पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए हैं।
शिकायत में वर्तमान प्रबंधक द्वारा गठित जांच के बाद दिनेश प्रताप सिंह की नियुक्ति को कथित रूप से फर्जी पाए जाने तथा अग्रिम कार्रवाई के लिए मामला दिनांक 25-11-2025 को माध्यमिक शिक्षा निदेशक को भेजे जाने का भी दावा किया गया है। साथ ही सहायक अध्यापक पद पर बने रहने और वेतन प्राप्त करने के संबंध में भी जांच की मांग की गई है।
शिकायत के अनुसार, संबंधित शिक्षक की वरिष्ठता सूची में 12वां स्थान होने के बावजूद उन्हें कथित रूप से नियमों के विपरीत प्रभारी प्रधानाचार्य बनाए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
इसके अलावा जिला विद्यालय निरीक्षक एवं शिक्षा विभाग को भेजे गए पत्रों का कॉलेज प्रशासन द्वारा जवाब नहीं दिए जाने का भी शिकायत में उल्लेख किया गया है।
शिकायतकर्ता ने सक्षम अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष, उच्चस्तरीय एवं समयबद्ध जांच कराई जाए और जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही यदि सरकारी सेवा में नियुक्ति अथवा वेतन प्राप्त करने में अनियमितता सिद्ध होती है तो अनुचित रूप से प्राप्त वेतन की धनराशि ब्याज सहित वसूल की जाए।
शिकायतकर्ता ने अपने प्रार्थना पत्र के साथ संबंधित दस्तावेज एवं साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने का उल्लेख करते हुए सरकार एवं संबंधित विभाग से शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।