नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को पांच मंजिला इमारत ढहने की घटना में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे के बाद मलबे से 12 लोगों को रेस्क्यू किया गया था। घायलों का इलाज AIIMS ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है। मंगलवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता घायलों और उनके परिजनों से मिलने AIIMS पहुंचीं। मुख्यमंत्री ने घायलों का हाल जाना और मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि घायलों के इलाज का पूरा खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी। साथ ही मृतकों और घायलों के परिवारों को आर्थिक सहायता भी दी जाएगी।
12 लोगों को मलबे से निकाला गया, 7 की मौत
सत्य निकेतन में करीब 30 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत रविवार को अचानक भरभराकर गिर गई थी। इस इमारत का इस्तेमाल लड़कों के छात्रावास के रूप में किया जा रहा था। हादसे के वक्त बेसमेंट में निर्माण या अन्य काम चल रहा था, जिसकी वजह से वहां मौजूद कई मजदूर भी मलबे की चपेट में आ गए। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे से 12 लोगों को बाहर निकाला गया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इनमें से सात लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें दो मजदूर शामिल हैं।
एक मजदूर की हालत गंभीर, ICU में एक छात्र
CM रेखा गुप्ता ने बताया कि एक घायल मजदूर AIIMS में भर्ती है। उसके पैर में गंभीर चोट आई है, लेकिन उसकी हालत फिलहाल ठीक बताई गई है। वहीं, दो छात्रों की हालत में सुधार है और उन्हें मंगलवार को अस्पताल से छुट्टी दिए जाने की उम्मीद है। एक छात्र ICU में भर्ती है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। मुख्यमंत्री ने अस्पताल में भर्ती घायलों और उनके माता-पिता से मुलाकात कर उन्हें बेहतर इलाज और हरसंभव सरकारी सहायता का भरोसा दिलाया।
मृतकों के परिवारों को आर्थिक मदद का ऐलान
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके साथ सरकार खड़ी है। मृतकों के परिजन शव लेकर दिल्ली से जा चुके हैं और सरकार की ओर से जरूरी इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सभी प्रभावित परिवारों के संपर्क में प्रशासन बना हुआ है।
बगल की इमारत भी असुरक्षित, कल होगी कार्रवाई
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि हादसे वाली इमारत के ठीक बगल में मौजूद एक अन्य इमारत को भी खतरनाक घोषित किया गया है। प्रशासन ने उसे असुरक्षित माना है और उसे गिराने की कार्रवाई बुधवार को की जाएगी। सरकार के मुताबिक, हादसे के बाद आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि दोबारा ऐसी घटना का खतरा न रहे।