नई दिल्ली: 9/11 आतंकी हमले की 25वीं बरसी के मौके पर अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ने बड़ी संख्या में गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इन दस्तावेजों में अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के आतंकी नेटवर्क और उसकी गतिविधियों से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। इनमें एक रिपोर्ट ऐसी भी है, जिसमें भारत का नाम उन देशों की सूची में शामिल बताया गया है, जिन्हें बिन लादेन का नेटवर्क संभावित निशाना बना सकता था।हालांकि, दस्तावेज में भारत के किसी खास शहर, इमारत या स्थान को निशाना बनाने की जानकारी नहीं दी गई है। न ही किसी हमले की निश्चित तारीख या ठोस ऑपरेशनल प्लान का जिक्र सामने आया है।
CIA ने सार्वजनिक किए 71 दस्तावेज
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, CIA निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने 9/11 हमले की 25वीं बरसी के अवसर पर राष्ट्रपति की डेली ब्रीफिंग से जुड़े 71 दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। CIA ने इसे 9/11 से संबंधित दस्तावेजों के बड़े सार्वजनिक खुलासों में से एक बताया है। इन रिकॉर्ड्स में बिल क्लिंटन के राष्ट्रपति रहने के दौर से लेकर जॉर्ज डब्ल्यू. बुश प्रशासन तक की खुफिया जानकारियां शामिल हैं। दस्तावेजों में अलकायदा की गतिविधियों, संभावित हमलों और बिन लादेन के नेटवर्क को लेकर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के आकलन का जिक्र है।
1998 की रिपोर्ट में भारत का नाम
सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों में 28 अगस्त 1998 की एक खुफिया रिपोर्ट का भी जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान समेत मिस्र, अरब प्रायद्वीप के कुछ देश, युगांडा और नाइजीरिया उन संभावित जगहों में शामिल थे, जहां बिन लादेन का नेटवर्क हमला करने की कोशिश कर सकता था।
रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि भारत में कौन सा स्थान निशाने पर था। किसी शहर, सरकारी संस्थान, इमारत या हमले की तारीख की जानकारी भी इसमें नहीं दी गई है।
दस्तावेज का शीर्षक ‘बिन लादेन आतंकी नेटवर्क अब भी एक खतरा है’ बताया गया है। यह रिपोर्ट उस समय तैयार हुई थी, जब अमेरिका ने अफगानिस्तान में अलकायदा के ठिकानों पर मिसाइल हमले किए थे।
60 देशों तक फैला था नेटवर्क
CIA के आकलन में बिन लादेन के आतंकी नेटवर्क की व्यापक पहुंच को लेकर भी चिंता जताई गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, बिन लादेन अपने सहयोगी संगठनों और नेटवर्क के जरिए दुनिया के कम से कम 60 देशों में मौजूद लोगों का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए कर सकता था।
इस आकलन से पता चलता है कि 9/11 हमले से कई साल पहले ही अलकायदा का नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी विस्तार कर चुका था और अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इसे गंभीर खतरे के रूप में देख रही थीं।
तालिबान ने बिन लादेन को अफगानिस्तान से निकालने से किया था इनकार
दस्तावेजों में तालिबान और बिन लादेन के रिश्तों से जुड़ी जानकारी भी सामने आई है। जनवरी 2000 के एक आकलन में कहा गया था कि तालिबान की मंत्रिपरिषद ने इससे पहले बिन लादेन को अफगानिस्तान से बाहर नहीं निकालने का फैसला किया था।
बताया गया कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की ओर से बिन लादेन को सौंपने की मांग की गई थी, लेकिन तालिबान ने उसे मानने से इनकार कर दिया।
इन दस्तावेजों में कंधार बंधक संकट और पाकिस्तान में बिन लादेन से जुड़े आतंकियों के साथ संबंधों को लेकर भी अमेरिकी खुफिया आकलन का जिक्र है।
क्या तालिबान ने बिन लादेन को दी थी सुरक्षा बढ़ाने की चेतावनी?
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ दस्तावेजों में यह दावा भी सामने आया है कि तालिबान के कुछ नेताओं ने बिन लादेन को अपनी सुरक्षा बढ़ाने की सलाह दी थी।
आकलन के अनुसार, कंधार बंधक संकट को उसके खिलाफ संभावित कार्रवाई के लिए इस्तेमाल किए जाने की आशंका जताई गई थी। ऐसे में बिन लादेन को सतर्क रहने की सलाह दिए जाने की बात सामने आई थी।
9/11 से पहले ही मिल रहे थे हमले के संकेत
CIA द्वारा जारी दस्तावेजों में कथित तौर पर अमेरिका के खिलाफ संभावित आतंकी हमलों को लेकर लगातार मिल रही चेतावनियों का भी जिक्र है। ये रिकॉर्ड उस दौर की खुफिया सूचनाओं और अमेरिकी प्रशासन के आकलन को सामने रखते हैं, जो बाद में 11 सितंबर 2001 के हमलों के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुए।
हालांकि, किसी खुफिया चेतावनी का मौजूद होना और उसके आधार पर हमले को रोक पाना अलग-अलग विषय हैं। सार्वजनिक दस्तावेज इस बात पर भी रोशनी डालते हैं कि 9/11 से पहले अमेरिकी एजेंसियां अलकायदा को लेकर लगातार खतरे का आकलन कर रही थीं।
क्या भारत पर हमले की ठोस योजना थी?
सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों से फिलहाल इतना ही सामने आता है कि भारत उन देशों में शामिल था, जिन्हें बिन लादेन का नेटवर्क संभावित लक्ष्य के तौर पर देख सकता था। लेकिन उपलब्ध जानकारी में भारत के किसी खास शहर, इमारत या संवेदनशील स्थान का नाम नहीं है।
इसके अलावा किसी निश्चित तारीख, हमले के तरीके या विस्तृत आतंकी साजिश का भी सार्वजनिक दस्तावेज में उल्लेख नहीं किया गया है। इसलिए इन रिकॉर्ड्स के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि भारत पर हमले की कोई ठोस योजना तैयार हो चुकी थी। फिलहाल सामने आई जानकारी 1998 के अमेरिकी खुफिया आकलन तक ही सीमित है।