नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के शरूराह इलाके में स्थित एक सैन्य ठिकाने पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला करने का दावा किया है। हूती सैन्य प्रवक्ता याहिया सारी ने टेलीग्राम पर बयान जारी कर इस कार्रवाई की जानकारी दी। हालांकि, हूतियों के इस दावे में किए गए नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। हूती प्रवक्ता के मुताबिक, हमले में सैन्य अड्डे के महत्वपूर्ण हिस्सों को निशाना बनाया गया। इनमें हथियारों के भंडार और कमांड एवं कंट्रोल सेंटर शामिल हैं। बयान में कई बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के इस्तेमाल का दावा किया गया है।
सऊदी अरब को हूतियों की चेतावनी
याहिया सारी ने इस हमले को यमन के खिलाफ सऊदी अरब की सैन्य कार्रवाई की प्रतिक्रिया बताया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यमन पर हमले जारी रहे तो हूती सऊदी अरब के भीतर संवेदनशील ठिकानों को निशाना बना सकते हैं। हूती प्रवक्ता ने आने वाले दिनों में और हमले किए जाने की चेतावनी दी है। इस बयान के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी बीच सऊदी अरब के सिविल डिफेंस ने यमन की दिशा से आए एक प्रोजेक्टाइल के जीजान क्षेत्र में गिरने की जानकारी दी है। अधिकारियों के अनुसार, अल-तुवाल इलाके में हुई इस घटना में दो लोग घायल हुए हैं। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, घटना में एक मस्जिद, कुछ रिहायशी मकानों और सड़क पर खड़े वाहनों को नुकसान पहुंचा है। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके में जरूरी कार्रवाई शुरू कर दी।
लाल सागर के रणनीतिक इलाकों पर भी नजर
यमन में हूती विद्रोहियों और उनके विरोधियों के बीच संघर्ष का असर लाल सागर के आसपास के रणनीतिक इलाकों पर भी पड़ा है। बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस समुद्री मार्ग से बड़ी संख्या में वाणिज्यिक जहाज और ऊर्जा से जुड़े टैंकर गुजरते हैं। हूतियों की गतिविधियों को लेकर पहले भी लाल सागर में जहाजों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर को लेकर चिंता जताई जाती रही है।
मोखा इलाके को लेकर भी बढ़ा तनाव
हूती गतिविधियों के बीच मोखा क्षेत्र को लेकर भी संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक, क्षेत्र में हूतियों की गतिविधियों के जवाब में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की ओर से हवाई कार्रवाई की गई है। मयून द्वीप और बाब-अल-मंदेब क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति के कारण इस पूरे इलाके पर क्षेत्रीय शक्तियों की नजर बनी हुई है। लाल सागर में किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर सिर्फ यमन और सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।