वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलने के बावजूद बुधवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बेहद कमजोर रही। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का असर घरेलू बाजार पर साफ दिखाई दिया। कारोबार शुरू होते ही निवेशकों में बिकवाली का दबाव बढ़ गया, जिससे प्रमुख सूचकांकों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में
शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 701.15 अंक यानी 0.94 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,948.69 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 186.70 अंक या 0.80 प्रतिशत टूटकर 23,296.85 पर कारोबार करता नजर आया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी का शुरुआती कारोबार में 23,450 के महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर से नीचे फिसलना निवेशकों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे बाजार की धारणा कमजोर हुई है।
खाड़ी क्षेत्र के तनाव ने बढ़ाई चिंता
विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक संकेत अनुकूल होने के बावजूद खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इस घटनाक्रम के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से आयात बिल, व्यापार घाटा और रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इसी कारण घरेलू और विदेशी निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाते हुए बाजार में बिकवाली की।
बाजार में मिला-जुला रुख
हालांकि बाजार में गिरावट का दबाव बना रहा, लेकिन कुछ शेयरों में खरीदारी भी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में करीब 1,062 शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि 1,163 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। वहीं लगभग 150 शेयरों में कोई खास बदलाव नहीं देखा गया।
इन शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव
गिरावट के दौरान सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेक्टर के शेयरों पर सबसे ज्यादा असर दिखाई दिया। प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में:
टीसीएस
एचसीएल टेक
इंफोसिस
टेक महिंद्रा
इटरनल
शामिल रहे। इन कंपनियों के शेयरों में कमजोरी ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनाया।
कुछ शेयरों ने दिखाई मजबूती
बाजार में व्यापक गिरावट के बावजूद कुछ कंपनियों के शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। इनमें:
भारती एयरटेल
अडानी पोर्ट्स
अपोलो हॉस्पिटल्स
ओएनजीसी
कोल इंडिया
प्रमुख रूप से शामिल रहे।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों की दिशा भारतीय बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। फिलहाल निवेशकों की नजर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी हुई है।