रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। परीक्षा में धांधली के विरोध में सड़कों पर उतरे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े। इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। वहीं अब यह मुद्दा बॉलीवुड तक पहुंच गया है, जहां कई कलाकारों के बयानों ने आंदोलन को नई राजनीतिक बहस में बदल दिया है।
नसीरुद्दीन शाह के बयान पर बढ़ा विवाद
विवाद की शुरुआत अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री की चुप्पी पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि “जिनके मुंह में हड्डी होती है, वे बोल नहीं सकते।” इस बयान के बाद अभिनेता और लेखक पीयूष मिश्रा ने सवाल उठाते हुए कहा कि झारखंड के छात्र आंदोलन जैसे गंभीर मुद्दे पर आखिर अब कौन लोग खामोश हैं।
पीयूष मिश्रा ने कहा कि छात्र अपने भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं और इस आंदोलन को लेकर कई चर्चित चेहरे चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने नसीरुद्दीन शाह का सम्मान करते हुए भी उनके पुराने बयान पर सवाल खड़े किए।
कंगना रनौत का पलटवार
पीयूष मिश्रा के बयान के बाद भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत भी इस बहस में उतर आईं। उन्होंने सोशल मीडिया पर नसीरुद्दीन शाह पर निशाना साधते हुए लिखा कि हर व्यक्ति किसी न किसी के प्रति वफादार होता है, लेकिन उन्हें इस बात का गर्व है कि वह अपने देश के साथ खड़ी हैं। कंगना ने यह भी कहा कि आज के समय में वफादारी दुर्लभ होती जा रही है और वह किसी और की तरह “लोमड़ी” बनने के बजाय “वफादार” रहना पसंद करेंगी।
छात्रों पर कार्रवाई को लेकर सरकार पर सवाल
कंगना रनौत ने झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों के साथ कठोर व्यवहार किया गया है। दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने भी राज्य सरकार और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं।
पीयूष मिश्रा बोले- असली मुद्दा छात्रों का भविष्य
पीयूष मिश्रा ने छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है, लेकिन छात्रों की मांगों को भी गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि झारखंड के छात्र किसी राजनीतिक एजेंडे के लिए नहीं, बल्कि अपने भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने नसीरुद्दीन शाह के पुराने बयान का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि जब छात्र अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं, तब कई चर्चित चेहरे आखिर चुप क्यों हैं।
JPSC पेपर लीक और छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और फिल्मी हस्तियों की बयानबाज़ी तेज हो गई है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या छात्रों की मूल मांगें और परीक्षा व्यवस्था में सुधार का मुद्दा कहीं राजनीतिक और वैचारिक बहस के शोर में दबता जा रहा है।