नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच अब कूटनीतिक स्तर पर बड़ी प्रगति की खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने प्रस्तावित शांति समझौते के तहत अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को लेकर अहम सहमति जताई है। माना जा रहा है कि इससे दोनों देशों के बीच टकराव कम करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की दिशा में रास्ता साफ हो सकता है।
अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि तेहरान अब अपने उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम स्टॉक को छोड़ने या सीमित करने के विकल्प पर राजी हो गया है। यह मुद्दा पिछले कई दौर की बातचीत में सबसे बड़ी बाधा माना जा रहा था।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है। ट्रंप ने कहा कि यह संभावित डील केवल युद्ध रोकने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को भी राहत मिल सकती है।
दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और अवरोध के चलते अंतरराष्ट्रीय तेल सप्लाई पर असर पड़ा था। दुनिया के बड़े हिस्से में तेल परिवहन इसी समुद्री मार्ग से होता है, इसलिए इसे खोलना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुरुआत में ईरान इस मुद्दे को शुरुआती समझौते में शामिल करने के पक्ष में नहीं था और इसे भविष्य की बातचीत के लिए टालना चाहता था। हालांकि अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया था कि बिना ठोस प्रतिबद्धता के आगे की वार्ता संभव नहीं होगी। इसी बीच अमेरिकी सैन्य विकल्पों को लेकर भी चर्चाएं तेज थीं।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, ईरान के पास बड़ी मात्रा में 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम मौजूद है। पश्चिमी देशों और इजरायल का मानना है कि इसे आगे बढ़ाकर हथियार स्तर तक ले जाया जा सकता है। अब इस बात पर चर्चा हो रही है कि ईरान अपने यूरेनियम भंडार को रूस को सौंपेगा या उसे कम संवर्धन स्तर पर बदलेगा।
प्रस्तावित समझौते में युद्धविराम को औपचारिक रूप देना, होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत खोलना और अगले कुछ हफ्तों में परमाणु कार्यक्रम पर नई वार्ता शुरू करना शामिल हो सकता है। वहीं ईरान की ओर से आर्थिक प्रतिबंध हटाने और फ्रीज की गई संपत्तियों को वापस करने की मांग भी जारी है।
ईरानी विदेश मंत्रालय ने इसे एक “ढांचागत समझौता” बताया है, जिसके बाद विस्तृत वार्ताओं का दौर आगे बढ़ेगा। हालांकि दोनों देशों ने यह भी साफ किया है कि बातचीत विफल होने की स्थिति में सैन्य तनाव फिर बढ़ सकता है।
अगर यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो इससे न सिर्फ अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे दबाव में भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।