तेहरान| ईरान में सियासी माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण होता जा रहा है। सोमवार (6 अप्रैल 2026) को सरकार ने 23 साल के युवक अली फहीम को फांसी दे दी। यह कार्रवाई जनवरी 2026 में हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित हमले के मामले में की गई। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अली फहीम पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की बसीज मिलिशिया के एक ठिकाने पर हमला करने, हथियार लूटने की कोशिश करने और अमेरिका-इजरायल के लिए काम करने जैसे गंभीर आरोप थे। ईरान की सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिलने के बाद सजा को अमल में लाया गया।
विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है मामला
जनवरी 2026 में ईरान में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन भड़के थे। इन प्रदर्शनों को सुरक्षा बलों ने सख्ती से कुचला, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई। अली फहीम का मामला भी इसी दौरान हुए एक कथित हमले से जुड़ा बताया जा रहा है।
मानवाधिकार संगठनों का आरोप
मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि यह मामला निष्पक्ष नहीं था। उनके अनुसार, फरवरी 2026 में कुल सात लोगों को मौत की सजा सुनाई गई थी, जिनमें दो नाबालिग भी शामिल थे। अब तक चार लोगों को फांसी दी जा चुकी है, जबकि तीन अन्य की जिंदगी पर खतरा बना हुआ है। संगठनों का आरोप है कि आरोपियों को यातनाएं दी गईं, उन्हें वकील तक की उचित सुविधा नहीं मिली और मुकदमा जल्दबाजी में चलाया गया।
युद्ध के बीच तेज हुई कार्रवाई
गौरतलब है कि यह फांसी ऐसे समय में दी गई है, जब ईरान का इजरायल और अमेरिका के साथ तनाव चरम पर है। 28 फरवरी 2026 को युद्ध शुरू होने के बाद कुछ समय के लिए फांसी की कार्रवाई रुकी थी, लेकिन अब इसमें तेजी देखने को मिल रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले एक हफ्ते में ही 10 राजनीतिक कैदियों को फांसी दी जा चुकी है। इनमें चार प्रदर्शनकारी और छह विपक्षी संगठनों से जुड़े लोग बताए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में सैकड़ों और लोगों को फांसी दी जा सकती है। उनका कहना है कि सरकार डर का माहौल बनाकर विरोध को दबाने की कोशिश कर रही है।