काठमांडू: नेपाल में हालिया बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। कई इलाकों में घर, सड़कें और पुल बर्बाद हो गए हैं, जिससे सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। नेपाल सेना, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटी हैं।
626 लोगों की मौत, 2400 के करीब लोग अब भी लापता
आपदा के बाद मरने वालों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अब तक 626 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। वहीं करीब 1,500 लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनका अस्पतालों और अस्थायी मेडिकल कैंपों में उपचार चल रहा है। सबसे बड़ी चिंता करीब 2,400 लोगों के लापता होने को लेकर है। लगातार बारिश, मलबे और खराब संपर्क व्यवस्था के कारण राहत एजेंसियों को प्रभावित लोगों तक पहुंचने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस आपदा से 93 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं।
1,545 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
बचाव टीमों ने अब तक 1,545 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। रेस्क्यू ऑपरेशन में नेपाल के सुरक्षाबलों के साथ स्थानीय लोग भी मदद कर रहे हैं। प्रभावित लोगों में करीब 550 विदेशी नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं, जिनमें लगभग 180 भारतीय नागरिक हैं। आपदा की चपेट में नेपाल सेना के 45 जवान और पुलिस के 41 कर्मचारी भी आए हैं। भारत की ओर से भी नेपाल को राहत सामग्री और बचाव कार्य में आवश्यक सहयोग दिया जा रहा है।
मलबे से बनीं 6 झीलें, बढ़ा नया खतरा
बाढ़ और भूस्खलन के बाद अब एक और चुनौती सामने आ गई है। भारी मलबे और चट्टानों के जमा होने से प्रभावित इलाकों में करीब 6 प्राकृतिक या कृत्रिम झीलें बन गई हैं। विशेषज्ञों को आशंका है कि यदि इन झीलों में पानी का दबाव बढ़ा और इनमें से कोई झील अचानक टूट गई तो निचले इलाकों में दोबारा तेज बाढ़ आ सकती है। यही वजह है कि प्रशासन इन जलाशयों की लगातार निगरानी कर रहा है।
अगले 48 घंटे मौसम पर नजर
मौसम की स्थिति ने राहत अभियान को और मुश्किल बना दिया है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक पहाड़ी इलाकों में अगले 48 घंटे तक रुक-रुककर भारी बारिश होने की आशंका है। बारिश के कारण पहले से क्षतिग्रस्त रास्तों पर आवाजाही और भारी मशीनरी पहुंचाना चुनौती बना हुआ है। प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और खतरा बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित ऊंचाई वाले स्थानों पर जाने के निर्देश दिए हैं।
मलबे से बरामद किए जा रहे कई शवों की स्थिति बेहद खराब होने के कारण उनकी पहचान करना भी चुनौती बन गया है। राहत एजेंसियां लापता लोगों की सूची और बरामद शवों के रिकॉर्ड का मिलान कर रही हैं।