पाकिस्तान में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने के बाद पूरे देश में यात्री और माल परिवहन के किराए में भारी इजाफा हुआ है। खैबर पख्तूनख्वा समेत कई प्रांतों में यात्री किराए 20 से 65 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं, जबकि माल ढुलाई की दरों में भी 65 प्रतिशत तक उछाल आया है।
पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा पब्लिक ट्रांसपोर्ट ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष खान जमान अफरीदी ने कहा कि ईंधन की कीमतों में लगातार और अप्रत्याशित वृद्धि ने ट्रांसपोर्टरों और आम यात्रियों दोनों को बुरी तरह प्रभावित किया है।
उन्होंने बताया कि मार्च में पहले ही किराए में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी, लेकिन अप्रैल 2026 में पेट्रोल की कीमत 137.24 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 184.49 रुपये प्रति लीटर बढ़ने के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। पेशावर में हुई बैठक के बाद ट्रांसपोर्ट संगठनों ने इंटर-डिस्ट्रिक्ट और इंटर-प्रोविंशियल रूट्स पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है।
पंजाब में यात्री किराए पहले ही 65 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। वहीं पाकिस्तान गुड्स ट्रांसपोर्टर्स ओनर्स एसोसिएशन ने माल ढुलाई शुल्क में भी 65 प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की है। ट्रांसपोर्टरों ने आरोप लगाया है कि संघीय सरकार ने बिना परामर्श के अचानक कीमतें बढ़ा दीं, जिससे ऑपरेटरों और जनता के बीच तनाव बढ़ रहा है। व्यापार जगत ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है। सरहद चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष अल्ताफ ने कहा कि पेट्रोल की कीमत 458.40 रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल 520.35 रुपये प्रति लीटर तक पहुंचने से औद्योगिक गतिविधियों पर असर पड़ेगा और महंगाई और बढ़ेगी।
ऑल पाकिस्तान वॉपडा हाइड्रो इलेक्ट्रिक वर्कर्स यूनियन के प्रवक्ता गोहर अली गोहर ने कहा कि बढ़ती महंगाई के कारण गरीब और निचले मध्यम वर्ग के लिए जरूरी खाद्य वस्तुएं भी पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। कई परिवार अब बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।लगातार बढ़ती ईंधन कीमतें पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और आम जनता के लिए बड़ी चुनौती बन गई हैं। ट्रांसपोर्टर, व्यापारी और विभिन्न संगठन सरकार से तुरंत राहत देने की मांग कर रहे हैं, अन्यथा महंगाई और बेरोजगारी की स्थिति और गंभीर हो सकती है।