लखनऊ। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित गबन के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस घटना को लेकर जहाँ आम जनता में भारी आक्रोश है, वहीं अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के भीतर से भी बेहद सख्त और आक्रामक प्रतिक्रिया सामने आई है। ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य महंत दिनेंद्र दास ने दोषियों के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें सीधे ‘फांसी की सजा’ देने की मांग कर दी है। दूसरी ओर, इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश की सियासत भी पूरी तरह गरमा गई है और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच तीखे बयानों के तीर चल रहे हैं।
‘रामलला के घर चोरी करने वालों को मिले फांसी’
महंत दिनेंद्र दास का गुस्सा साफ तौर पर देखने को मिला। उन्होंने कड़े लहजे में कहा, “रामलला के दरबार में जो जांच चल रही है, वह सरकार की सीधी निगरानी में हो रही है। चोरी छोटी हो या बड़ी, चोरी तो आखिर चोरी ही होती है। जो भी इस पाप में शामिल हैं, वे जेल की सलाखों के पीछे पहुंच रहे हैं। मेरा मानना है कि जिन्होंने भगवान राम के घर में ऐसा घिनौना काम किया है, उन्हें सीधे फांसी की सजा दे देनी चाहिए। ऐसे अपराधियों को लटकाने में कोई ढिलाई नहीं होनी चाहिए।” महंत दिनेंद्र दास ने स्थानीय प्रशासन और जांच एजेंसी की कार्रवाई पर संतोष व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और गबन की गई पूरी राशि जल्द ही वसूल (रिकवर) कर ली जाएगी।
SIT को मिला 15 दिन का अतिरिक्त समय, सीन रीक्रिएशन जारी
राम मंदिर चढ़ावे में हुए इस कथित घोटाले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी स्पेशल टास्क फोर्स/एसआईटी (SIT) को जांच के लिए 15 दिन का और समय दे दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि जांच एजेंसी इस मामले से जुड़े हर एक पहलू की बारीकी से पड़ताल करना चाहती है ताकि कोई भी दोषी बच न सके। फिलहाल, अयोध्या पुलिस मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। पुलिस की एक टीम पैसों की रिकवरी के लिए क्राइम सीन रीक्रिएट करने की कवायद में जुटी है।
राजनीतिक अखाड़ा बनी अयोध्या: विपक्ष के तीखे सवाल
इस पूरे मामले को लेकर उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता और समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ विधायक माता प्रसाद पांडे ने योगी सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा, “यह बेहद गंभीर मामला है और चोरी बड़े पैमाने पर हुई है। सरकार हर दिन दावा करती है कि उसने अपराधियों और माफियाओं का सफाया कर दिया, लेकिन राम मंदिर में हुई इतनी बड़ी चोरी की उन्हें भनक तक नहीं लगी। सरकार अब तक यह साफ नहीं कर पाई है कि इसमें कौन-कौन शामिल है। हम मांग करते हैं कि इसकी निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच हो।”
वहीं, कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी नायक ने सीधे बीजेपी और आरएसएस (RSS) पर निशाना साधा। रागिनी नायक ने कहा, “राम मंदिर ट्रस्ट में पूरी तरह से भाजपा और आरएसएस के लोग ही बैठे हैं। ऐसे में सिर्फ निंदा या कानाफूसी करने से काम नहीं चलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद सामने आकर ‘मन की बात’ के बजाय देश को ‘धन की बात’ बतानी चाहिए और इस चंदा चोरी पर अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए। हमारी मांग है कि इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो और एसआईटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।”
सत्ता पक्ष का जवाब: ‘चोरी पर बात करें, आस्था पर नहीं’
विपक्ष के चौतरफा हमलों के बीच शिवसेना नेता शायना एनसी ने मंदिर पर राजनीति न करने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था और अटूट विश्वास का प्रतीक है। जो लोग इसे लेकर झूठी अफवाहें फैला रहे हैं, वे गलत कर रहे हैं। अगर कहीं कुछ गलत हुआ है, तो कानून दोषियों को सख्त सजा देगा। हर ट्रस्ट का बकायदा ऑडिट होता है और उसकी जानकारी सार्वजनिक होती है। इसलिए बात सिर्फ चोरी और दोषियों पर होनी चाहिए, राम मंदिर की पवित्रता पर नहीं।”
‘नकली सनातनी 2027 के चुनाव पर नजर गड़ाए हैं’ – गिरिराज सिंह
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस मुद्दे पर विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए उन्हें ‘नकली सनातनी’ करार दिया। गिरिराज सिंह ने कहा, “इस चोरी की घटना से पूरा हिंदू समाज आहत है, लेकिन योगी सरकार दोषियों पर तुरंत और कड़ी कार्रवाई कर रही है। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। ताज्जुब की बात यह है कि कांग्रेस और अखिलेश यादव, जिन्होंने कभी भगवान राम के अस्तित्व को ही स्वीकार नहीं किया, आज वे अचानक राम भक्त बनकर 2027 के विधानसभा चुनाव के वोटों पर नजर गड़ाए हुए हैं। देश के सनातनियों को इन नकली भक्तों से सावधान रहने की जरूरत है।”