नागपुर / अयोध्या: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित हेरफेर को लेकर देश भर में जारी सियासी घमासान के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत का एक बड़ा बयान सामने आया है। नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख ने उन आरोपों और धारणाओं को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा जाता है कि संघ अपने से जुड़े संगठनों को ‘रिमोट कंट्रोल’ से चलाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि RSS किसी भी संगठन पर अपना नियंत्रण नहीं थोपता और सभी स्वायत्त रूप से काम करते हैं।
‘हम किसी को कंट्रोल नहीं करते, यह केवल गलतफहमी है’
नागपुर के मंच से संघ की कार्यप्रणाली पर खुलकर बात करते हुए मोहन भागवत ने कहा, “आम लोगों और राजनीतिक गलियारों में यह बहुत बड़ी गलतफहमी है कि संघ से जुड़े तमाम संगठन सीधे RSS के इशारे पर काम करते हैं। सच यह है कि संघ के विचार से प्रेरित होकर आज देश भर में लाखों स्वयंसेवक और कार्यकर्ता विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं, अनगिनत गतिविधियां चल रही हैं। लोगों को लगता है कि इन सबका कोई सेंट्रलाइज्ड (केंद्रीकृत) कंट्रोल रूम है, जो सबको निर्देश देता है। लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। संघ किसी को नियंत्रित नहीं करता।”
चढ़ावा चोरी के सवाल पर साधी चुप्पी, बोले- ‘राम-राम’
एक तरफ जहां देश भर की मीडिया और विपक्षी दल राम मंदिर दान गबन मामले को लेकर संघ और ट्रस्ट को घेर रहे हैं, वहीं नागपुर के इस कार्यक्रम के बाद जब मोहन भागवत बाहर निकले, तो मीडिया ने उनसे इस विवाद को लेकर सीधा सवाल दागा। पत्रकारों ने जब उनसे पूछा कि ‘कुछ लोग भगवान श्री राम में आस्था को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं, इस पर आपकी क्या राय है?’—तो संघ प्रमुख इस तीखे सवाल का सीधा जवाब देने से बचते नजर आए। उन्होंने हाथ जोड़कर केवल “राम-राम” कहा और मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गए।
‘राजनेता न करें इसका राजनीतिकरण’ – इंद्रेश कुमार
इससे पहले, आरएसएस के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने इस पूरे विवाद पर संघ का रुख स्पष्ट किया था। उन्होंने संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले के बयान का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा, “होसबले जी ने जो कुछ भी कहा है, वह देश के करोड़ों राम भक्तों और स्वयंसेवकों की अंतरात्मा की आवाज है। इस बेहद संवेदनशील और आस्था से जुड़े मामले पर राजनेताओं को अपनी रोटियां नहीं सेकनी चाहिए और इसका राजनीतिकरण बंद होना चाहिए।”
इंद्रेश कुमार ने देश की न्याय व्यवस्था, सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर भरोसा जताते हुए कहा, “हमें थोड़ा धैर्य रखना होगा। सरकार, संगठन और ट्रस्ट मिलकर इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी करेंगे। न्याय की इस प्रक्रिया में कोई भी संगठन या व्यक्ति न तो सबसे करीबी होता है और न ही सबसे प्रिय। संघ का हमेशा से यही सिद्धांत रहा है कि न्याय सबके लिए समान होना चाहिए और दोषियों को सजा मिलकर रहेगी।”
राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज
विशेषज्ञों का मानना है कि मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष लगातार यह आरोप लगा रहा है कि राम मंदिर ट्रस्ट में केवल भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोग ही शामिल हैं, इसलिए संघ को इस कथित घोटाले की जवाबदेही लेनी चाहिए। भागवत के इस ‘नो कंट्रोल’ वाले बयान को विपक्ष के उन्हीं हमलों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।