नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी की दलितों से जुड़े मुद्दों पर राजनीति को लेकर बीजेपी ने तीखा हमला बोला है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान और राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पर दलित समाज को वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। गुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी का राजनीतिक रवैया दलित विरोधी रहा है। वहीं, सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस की राजनीति पर जाति, भाषा और क्षेत्र के आधार पर समाज में विभाजन पैदा करने का आरोप लगाते हुए बीजेपी को सामाजिक समरसता और समाधान की राजनीति करने वाली पार्टी बताया।
‘क्या दलितों का स्थान बाहर है?’
गुरु प्रकाश पासवान ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का जिक्र करते हुए राहुल गांधी और कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि जब प्रियंका गांधी वाड्रा के नामांकन के दौरान गांधी परिवार के सदस्य अंदर मौजूद थे, तब कांग्रेस अध्यक्ष खरगे बाहर खड़े दिखाई दिए थे। पासवान ने सवाल किया कि अगर कांग्रेस दलित सम्मान की बात करती है तो उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ ऐसा व्यवहार क्यों हुआ। उन्होंने कहा कि क्या कांग्रेस की नजर में दलितों की जगह पार्टी के भीतर नहीं, बल्कि बाहर है?
‘कांग्रेस का चाल, चेहरा और चरित्र दलित विरोधी’
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस आज दलित सम्मान और सामाजिक न्याय की बात करती है, लेकिन उसका राजनीतिक इतिहास इसके विपरीत दिखाई देता है। उन्होंने कर्नाटक के कांग्रेस नेता परमेश्वर के पुराने बयान का हवाला देते हुए दावा किया कि दलित होने की वजह से उन्हें मुख्यमंत्री पद नहीं मिलने की बात कही गई थी। पासवान ने यह भी कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष जरूर बने, लेकिन उन्हें मुख्यमंत्री पद क्यों नहीं दिया गया, इस पर कांग्रेस को जवाब देना चाहिए। उन्होंने पूर्व कांग्रेस नेता वी. नारायणसामी से जुड़ी एक पुरानी घटना का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि कांग्रेस में नेताओं के साथ असमान व्यवहार का इतिहास रहा है।
सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस से पूछा- कितने SC-ST-OBC मुख्यमंत्री?
राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के उस राजनीतिक सवाल का जिक्र किया जिसमें वह विभिन्न राज्यों में एससी, एसटी और ओबीसी प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठाते हैं। त्रिवेदी ने कांग्रेस से पूछा कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं, वहां कितने एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों से मुख्यमंत्री बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने ओडिशा में आदिवासी समाज से मुख्यमंत्री बनाया, जबकि छत्तीसगढ़ में भी आदिवासी नेतृत्व को जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने मध्य प्रदेश और राजस्थान में दलित समाज से उपमुख्यमंत्री बनाए जाने का भी जिक्र किया। त्रिवेदी ने कहा कि केंद्र सरकार में अर्जुन राम मेघवाल का कानून मंत्री बनना भी सामाजिक प्रतिनिधित्व का उदाहरण है।
कांग्रेस शासन के दौरान दलितों पर हमलों का किया जिक्र
सुधांशु त्रिवेदी ने राजस्थान में दलित समुदाय से जुड़े कुछ पुराने मामलों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने हरीश जाटव, योगेश जाटव और कृष्णा वाल्मीकि से जुड़े मामलों का जिक्र किया और कहा कि इन घटनाओं के समय राज्य में कांग्रेस की सरकार थी। त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस वोट बैंक की राजनीति के कारण कुछ घटनाओं पर अलग-अलग नजरिया अपनाती है। उन्होंने कहा कि बीजेपी की राजनीति किसी समुदाय के साथ भेदभाव करने के बजाय सभी वर्गों के बीच सामाजिक समरसता कायम करने पर केंद्रित है।
राम मंदिर और पीएम मोदी का भी किया जिक्र
बीजेपी सांसद ने अपनी पार्टी की सामाजिक समरसता की विचारधारा को बताते हुए राम मंदिर आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 1989 में अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास के दौरान कामेश्वर चौपाल से शिला रखवाई गई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वाराणसी में वाल्मीकि समाज के लोगों के सम्मान का भी जिक्र किया और कहा कि बीजेपी सामाजिक भागीदारी और सम्मान की राजनीति में विश्वास करती है। त्रिवेदी ने कहा कि बीजेपी समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच सामंजस्य स्थापित करने की कोशिश करती है, जबकि उनके आरोप के मुताबिक कांग्रेस जातीय और सामाजिक विभाजन के जरिए राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करती है।