जोधपुर: केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर फैल रही अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से न तो वाहनों के इंजन खराब होते हैं और न ही ईंधन में किसी तरह के कीड़े लगते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि उन्हें सरकार की नीति में कोई कमी नजर आती है तो वे खुलकर सुझाव दें, जिन पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
राजस्थान के जोधपुर में आयोजित कार्यक्रम में हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सोशल मीडिया पर बायोफ्यूल ब्लेंडिंग को लेकर कई तरह की भ्रामक बातें फैलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा, “मैं आलोचना का स्वागत करता हूं। अगर आपको हमारे काम में कोई कमी लगती है तो हमें बताइए। हम आपकी बात सुनेंगे और उचित सुझावों को अपनी नीतियों में शामिल करेंगे।”
मंत्री ने कहा कि सबसे बड़ी अफवाह यह फैलाई गई कि इथेनॉल के इस्तेमाल से ईंधन में कीड़े लग जाएंगे या वाहनों का इंजन और फ्यूल पंप खराब हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक ऐसा एक भी मामला सामने नहीं आया है और भविष्य में भी ऐसी आशंका का कोई आधार नहीं है।
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इथेनॉल का उपयोग कोई नई अवधारणा नहीं है। दुनिया के कई देशों में दशकों से इसका इस्तेमाल हो रहा है और इस तकनीक पर करीब एक सदी से शोध किया जा रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हेनरी फोर्ड के दौर में भी बायोफ्यूल, केरोसीन और फॉसिल फ्यूल जैसे विकल्पों पर काम किया गया था।
उन्होंने बताया कि भारत में भी इथेनॉल मिश्रण की योजना नई नहीं है। कांग्रेस सरकार के समय इसकी शुरुआत की गई थी। ब्राजील में राजदूत रहने के दौरान उन्होंने 5 प्रतिशत बायोफ्यूल ब्लेंडिंग का लक्ष्य तय करने की प्रक्रिया देखी थी, लेकिन उस समय यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सका और मिश्रण का स्तर 1.4 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया।
दिल्ली में हाल ही में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कुछ लोग इथेनॉल से माइलेज कम होने का दावा कर रहे हैं, जबकि यह कई तकनीकी कारणों पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि इथेनॉल का उपयोग रेसिंग कारों में भी किया जाता है, जहां बेहतर एक्सेलरेशन और नॉकिंग कंट्रोल जैसे फायदे देखने को मिलते हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि SIAM और ARAI समेत सभी संबंधित संस्थाओं से व्यापक सलाह-मशविरा और तकनीकी परीक्षण के बाद ही 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग लागू की गई है। यदि भविष्य में इसे 25 प्रतिशत तक बढ़ाने पर विचार होगा, तो वह भी सभी आवश्यक परीक्षण और विशेषज्ञों की मंजूरी के बाद ही किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन के इस्तेमाल से वाहन बीमा पर कोई असर नहीं पड़ता और इस संबंध में फैलाई जा रही बातें पूरी तरह भ्रामक हैं।