लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अयोध्या को लेकर सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे के बाद योगी सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने उन पर निशाना साधा है। राजभर ने अखिलेश के हनुमानगढ़ी नहीं जाने और रामलला के दर्शन न करने को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा प्रमुख धार्मिक आस्था के बजाय राजनीतिक समीकरणों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
अखिलेश जी,
हो आए अयोध्या? दर्शन करने नहीं गए ना? जाते भी कैसे, दाढ़ी-टोपी रूठ जो जाती।
एक बात बताइयेगा? अयोध्या की सड़कों पर जब आप पहुंचे तो क्या आपके कानों में कारसेवकों की चीख़ें नहीं गूंजी? उन्हीं कारसेवकों की चीख़ें जिनपर आपके पिता जी ने गोली चलवाई थी?
याद तो आई होगी? अंदर अंदर आप मुस्कुराए भी होंगे?
अभी भी समय है, पश्चाताप कर लीजिए। पाप ख़त्म तो नहीं होंगे, शायद ईश्वर माफ़ कर दे। प्रभु श्री राम बड़े दयालु हैं।
दूसरी बात। अगर आस्था है तो राजनैतिक समीकरण का बंधक मत बनिए। अगर आस्था नहीं है तो खुलकर कहिए कि मैं नास्तिक हूं। बीच में रहकर ना 80 के रहेंगे, ना 20 के।
बाक़ी आपकी एक तस्वीर देखी। भोजन प्रसाद पाते हुए। आश्चर्य हुआ कि जो अखिलेश जी इफ़्तारी में टोपी लगाकर चहकते हुए दिखते हैं, वही अखिलेश जी कैसे असहज बैठे हैं।
ये तस्वीर देखकर लग रहा है कि भोजन प्रसाद के लिए नहीं बल्कि वोट की भूख मिटाने बैठे हैं। ऐसा लगता है जैसे इफ़्तार वाली मुस्कान दिख गई तो मौलाना नाराज़ हो जायेंगे।
उम्मीद है आपकी अंतरात्मा जागेगी और आज नहीं तो कल, आप प्रभु श्री राम के और प्रभु हनुमान के दर पर शीश नवाकर माफ़ी ज़रूर मांगेंगे।
जय श्री राम, जय हनुमान।
@yadavakhilesh
— Om Prakash Rajbhar (@oprajbhar) October 9, 2026
राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा कर अखिलेश यादव पर तंज कसा। उन्होंने पोस्ट में कारसेवकों पर गोली चलाए जाने की पुरानी घटना का जिक्र करते हुए सपा प्रमुख से सवाल किए। साथ ही कहा कि अगर उनकी आस्था है तो उन्हें राजनीतिक समीकरणों के दबाव में नहीं रहना चाहिए।
राजभर ने एक्स पर पोस्ट कर क्या कहा?
ओम प्रकाश राजभर ने अपने पोस्ट में अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे का जिक्र करते हुए लिखा कि वह वहां पहुंचकर भी मंदिरों में दर्शन करने नहीं गए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर अखिलेश यादव की आस्था है तो उन्हें राजनीतिक समीकरणों का बंधक नहीं बनना चाहिए। राजभर ने अपने पोस्ट में राम मंदिर आंदोलन के दौरान कारसेवकों पर हुई गोलीबारी का भी उल्लेख किया और इसे लेकर अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख को इस मुद्दे पर आत्ममंथन करना चाहिए। राजभर ने यह भी लिखा कि भगवान राम दयालु हैं और उनसे माफी मांगने की बात कही।
प्रसाद ग्रहण करते हुए तस्वीर पर भी साधा निशाना
राजभर ने अपनी पोस्ट में अखिलेश यादव की भोजन प्रसाद ग्रहण करते हुए एक तस्वीर का भी जिक्र किया। उन्होंने इसकी तुलना इफ्तार कार्यक्रमों के दौरान अखिलेश की तस्वीरों से करते हुए तंज कसा। राजभर ने आरोप लगाया कि सपा प्रमुख की राजनीतिक गतिविधियों में वोटों का गणित हावी रहता है। हालांकि, धार्मिक स्थलों पर जाने या किसी कार्यक्रम में शामिल होने के आधार पर किसी नेता की निजी आस्था का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। राजभर की ये टिप्पणियां उनके राजनीतिक आरोपों के तौर पर देखी जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि अगर अखिलेश यादव हनुमानगढ़ी और रामलला के दर्शन कर लेते तो इस तरह के सवाल नहीं उठते।
राजभर ने साधु-संतों को दक्षिणा देने के दौरान अखिलेश के व्यवहार पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधियों के जरिए समाज को बांटने की कोशिश की जाती है। साथ ही दावा किया कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के तहत किसी के साथ भेदभाव नहीं होता। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले नेताओं के बीच बयानबाजी तेज होती जा रही है। अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे को लेकर राजभर की टिप्पणी ने धार्मिक आस्था और राजनीतिक रणनीति पर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।