उत्तर प्रदेश के अमरोहा में कथित तौर पर तीन तलाक और हलाला के नाम पर एक महिला के यौन शोषण से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि तीन तलाक और हलाला जैसी प्रथाओं की आड़ में किसी महिला का यौन शोषण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इन्हें समाज का “काला अध्याय” बताते हुए कहा कि ऐसी प्रथाएं संवैधानिक मूल्यों, समानता और मानवीय गरिमा के खिलाफ हैं।
जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने मामले में पीड़िता के पूर्व पति, उसके चाचा, एक मौलाना समेत अन्य आरोपियों की याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि नाबालिग लड़की के साथ सुनियोजित तरीके से गंभीर यौन अपराध किए जाने के आरोप हैं, जिनकी निष्पक्ष और गहन जांच आवश्यक है।
क्या है पूरा मामला?
अमरोहा निवासी पीड़िता ने सैदनागली थाने में दर्ज कराई गई शिकायत में आरोप लगाया कि नाबालिग अवस्था में ही उसका निकाह करा दिया गया। कुछ समय बाद उसे तीन तलाक दे दिया गया और दोबारा शादी के लिए हलाला के नाम पर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। बाद में दूसरी शादी के बाद फिर तीन तलाक दिया गया और कथित तौर पर “डबल हलाला” के नाम पर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया।
15 साल की उम्र में हुआ पहला निकाह
पीड़िता के अनुसार, अप्रैल 2015 में उसकी शादी आरोपी अजहर नवाज से हुई थी। उस समय उसकी उम्र मात्र 15 वर्ष थी। जनवरी 2016 में उसे तीन तलाक दे दिया गया। कुछ महीनों बाद दोबारा निकाह की बात कहकर कथित तौर पर मौलाना कयूम के साथ हलाला कराया गया। पीड़िता का कहना है कि उस समय उसकी उम्र 16 वर्ष थी और उसे हलाला का अर्थ तक नहीं पता था।
2025 में ‘डबल हलाला’ के नाम पर गैंगरेप का आरोप
शिकायत के अनुसार, वर्ष 2017 में उसका दूसरा निकाह हुआ। करीब चार साल बाद आरोपी ने फिर तीन तलाक देकर दूसरी महिला से शादी कर ली। बाद में दूसरी पत्नी के संतान न होने पर आरोपी ने तीसरी बार पीड़िता से निकाह करने की योजना बनाई। पीड़िता का आरोप है कि 19 फरवरी 2025 को “डबल हलाला” के नाम पर आरोपी के भाई और भतीजों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और उसी शाम उसका तीसरी बार अजहर नवाज से निकाह करा दिया गया। फिलहाल मामले की जांच जारी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि आरोप गंभीर हैं और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच तथा कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।