भोपाल। मध्य प्रदेश के चर्चित धार भोजशाला विवाद में हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने हिंदू पक्ष के पक्ष में अहम फैसला सुनाया है। अदालत के निर्णय के बाद अब हिंदू श्रद्धालुओं को पूरे परिसर में पूजा-अर्चना करने की अनुमति मिल गई है। इससे पहले हिंदू पक्ष को केवल मंगलवार और बसंत पंचमी के दिन ही पूजा की इजाजत थी।
फैसले के बाद हिंदू संगठनों और श्रद्धालुओं में खुशी का माहौल देखा गया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि निर्णय पुरातात्विक तथ्यों, ऐतिहासिक साक्ष्यों और Archaeological Survey of India की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है।
मामले में हिंदू पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता Harishankar Jain ने फैसले को लंबे कानूनी संघर्ष की बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि कई वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद यह निर्णय आया है और देश के अन्य विवादित धार्मिक स्थलों को लेकर भी कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
वहीं अधिवक्ता Ashwini Upadhyay ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक फैसला है। हिंदू पक्ष के एक अन्य वकील Vishnu Shankar Jain ने कहा कि अदालत ने एएसआई सर्वे और प्रस्तुत साक्ष्यों को स्वीकार करते हुए पूजा के अधिकार को मान्यता दी है। उन्होंने यह भी बताया कि अदालत ने ऐतिहासिक प्रतिमाओं से जुड़े विषयों पर भी सरकार को विचार करने का सुझाव दिया है।
धार भोजशाला को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा था। हिंदू पक्ष इसे माता वाग्देवी का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है। पूर्व व्यवस्था के तहत मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार को नमाज की अनुमति थी, जबकि हिंदू पक्ष को सीमित दिनों में पूजा का अधिकार दिया गया था।
जब बसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़ते थे, तब दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बन जाती थी। इसके बाद हिंदू पक्ष ने पूरे परिसर में पूजा की अनुमति की मांग करते हुए अदालत का रुख किया था। हाईकोर्ट ने मामले में वैज्ञानिक सर्वे का आदेश दिया था, जिसके आधार पर अब यह फैसला सुनाया गया है।