कोलकाता/उत्तर 24 परगना| पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद जहां एक ओर राजनीतिक गहमागहमी का माहौल था, वहीं 6 मई की रात भाजपा के लिए एक गहरा जख्म दे गई। बंगाल की राजनीति के कद्दावर चेहरे सुवेंदु अधिकारी के सबसे भरोसेमंद सहयोगी और उनके पीए चंद्रनाथ रथ की बेहद निर्मम तरीके से गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस सनसनीखेज वारदात ने पूरे राज्य के सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है और चुनाव के बाद होने वाली हिंसा की चर्चाओं को एक बार फिर हवा दे दी है।
यह खौफनाक मंजर उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम स्थित दोहरिया इलाके में देखने को मिला। रात के करीब 10:30 बजे जब चंद्रनाथ रथ अपनी कार से गुजर रहे थे, तभी घात लगाए बैठे बाइक सवार हमलावरों ने उन्हें घेर लिया। बताया जा रहा है कि हमलावर काफी देर से उनकी गाड़ी का पीछा कर रहे थे। बदमाशों ने पहले अपनी कार से रथ की गाड़ी को ओवरटेक कर रास्ता रोका और फिर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इस हमले में दो गोलियां सीधे उनके सीने में लगीं जो दिल के पार हो गईं और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। पुलिस ने घटनास्थल से भारी मात्रा में कारतूस और जिंदा गोलियां बरामद की हैं और मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी सीआईडी के नेतृत्व में एक हाई-प्रोफाइल एसआईटी का गठन किया गया है, जिसमें सीआईडी, आईबी और एसटीएफ के अधिकारियों को शामिल किया गया है।
चंद्रनाथ रथ का सियासी कद केवल एक पीए तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्हें सुवेंदु अधिकारी का मुख्य रणनीतिकार माना जाता था। हाल ही में वह तब सुर्खियों में आए थे जब मतगणना से ठीक पहले 30 अप्रैल को वह स्ट्रॉन्ग रूम में दाखिल हुए थे और ममता बनर्जी पर कड़ी नजर रखने के लिए बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ मोर्चा संभाला था। सुवेंदु अधिकारी की अनुपस्थिति में उन्होंने न केवल विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया बल्कि पुलिस प्रशासन के साथ भी उनकी तीखी बहस देखी गई थी। राजनीति के जानकारों का मानना है कि भवानीपुर में ममता बनर्जी की घेराबंदी करने के लिए जो पटकथा लिखी गई थी, उसमें रथ का नाम सबसे ऊपर था।
उनके व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो पूर्व मेदिनीपुर के चंडीपुर में जन्मे चंद्रनाथ रथ भारतीय वायु सेना के पूर्व अधिकारी थे। देश सेवा के बाद उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली और कुछ समय कॉर्पोरेट जगत में बिताने के बाद 2019 में राजनीति की ओर रुख किया। जब सुवेंदु अधिकारी ममता सरकार में मंत्री थे, तब से रथ उनके साथ थे और जब 2020 में अधिकारी ने टीएमसी छोड़कर भाजपा का दामन थामा, तब भी वह साए की तरह उनके साथ रहे। भाजपा नेताओं का कहना है कि उन्होंने संगठन और रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, यही कारण है कि उनकी हत्या को राज्य की कानून व्यवस्था और राजनीतिक रंजिश से जोड़कर देखा जा रहा है। फिलहाल पुलिस तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है, लेकिन मुख्य आरोपी अब भी पकड़ से बाहर है।