लखनऊ: उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने मेरठ के चर्चित ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर हुए प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए दलित समाज से कानून हाथ में न लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अन्याय के खिलाफ संघर्ष संविधान और कानून के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए।
‘बाबा साहब ने कानून के रास्ते पर चलना सिखाया’
मायावती ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने हमेशा संविधान और कानून के जरिए न्याय की लड़ाई लड़ने की सीख दी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले में निचली अदालत से न्याय नहीं मिलता, तो ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए, क्योंकि संविधान इसके लिए पूरी व्यवस्था देता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि न्याय की मांग को लेकर कानून हाथ में लेने या सड़क पर हिंसक प्रदर्शन करने से बचना चाहिए।
‘कुछ संगठन राजनीति के लिए लोगों को भड़काते हैं’
बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि कुछ संगठन अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए पीड़ित परिवारों को उकसाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में लोगों को सड़क पर उतारकर प्रदर्शन और जाम कराया जाता है, जबकि बाद में नेता केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए घटनास्थल पर पहुंचते हैं। इससे पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने के बजाय उनकी परेशानियां बढ़ जाती हैं। मायावती ने दलित समाज से अपनी वोट की ताकत को समझने और सोच-समझकर राजनीतिक निर्णय लेने की भी अपील की।
क्या है ललिता गौतम हत्याकांड?
मेरठ के टीपी नगर क्षेत्र की रहने वाली 20 वर्षीय ललिता गौतम 15 मई को लापता हो गई थीं। 17 मई को उनका शव रोहटा क्षेत्र में बरामद हुआ। पुलिस ने मुख्य आरोपी को 18 मई को गिरफ्तार किया, जबकि सबूत मिटाने के आरोप में एक अन्य आरोपी को भी बाद में गिरफ्तार किया गया।
प्रदर्शन के बाद हुई कार्रवाई
बुधवार को ललिता गौतम हत्याकांड को लेकर बड़ी संख्या में लोग मेरठ के कमिश्नर चौराहे पर प्रदर्शन के लिए पहुंचे। पुलिस के अनुसार, बिना अनुमति धरना और सड़क जाम किए जाने के दौरान डीएम कार्यालय के बाहर हंगामा हुआ। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया और पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया, जिसमें 11 पुलिसकर्मी घायल हुए। इस मामले में पुलिस ने 7 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि 6 नामजद और 25 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ गैरकानूनी जमावड़ा, सड़क जाम और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का यह भी कहना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रामक जानकारी फैलाकर जातीय तनाव भड़काने की कोशिश की गई, जिसकी भी जांच की जा रही है।