नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सीबीएसई की 12वीं कक्षा की ऑनलाइन मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार और बोर्ड पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग प्रक्रिया में तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया, जिसका असर छात्रों के रिजल्ट पर पड़ सकता है।
राहुल गांधी ने उन छात्रों से मुलाकात के बाद यह मुद्दा उठाया, जिन्होंने डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर शिकायतें की थीं। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए पूरे मामले पर चिंता जताई और निष्पक्ष जांच की मांग की।
कांग्रेस नेता का दावा है कि शुरुआत में जारी किए गए टेंडर में उत्तर पुस्तिकाओं को उच्च गुणवत्ता वाले स्वचालित स्कैनिंग सिस्टम से स्कैन करने की शर्तें रखी गई थीं। साथ ही स्कैनिंग की गुणवत्ता और कॉपियों की सुरक्षा को लेकर भी विशेष प्रावधान किए गए थे। हालांकि बाद में टेंडर में बदलाव कर कई अहम तकनीकी शर्तों को हटा दिया गया।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि कॉपियों को डिजिटल फॉर्मेट में बदलने के दौरान कथित तौर पर मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया गया, जिससे कई उत्तर पुस्तिकाओं की तस्वीरें स्पष्ट नहीं रहीं। उनके मुताबिक कुछ पन्ने ठीक से स्कैन नहीं हुए और कई मामलों में पूरी कॉपियां अपलोड नहीं हो सकीं।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी का मामला नहीं है, बल्कि इससे हजारों छात्रों के भविष्य पर असर पड़ सकता है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में बदलाव कर कुछ निजी पक्षों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई और इसका नुकसान छात्रों को उठाना पड़ा।
इस मुद्दे पर एक शोध रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है, जिसमें डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली और ठेका प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए गए थे। रिपोर्ट सामने आने के बाद यह विवाद और गहरा गया है। राहुल गांधी के आरोपों के बाद सीबीएसई की मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष इस मामले में पारदर्शिता और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है, जबकि छात्र और अभिभावक भी पूरे मामले को लेकर चिंता जता रहे हैं।