कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में प्रचंड जीत दर्ज करने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार गठन की तैयारियों में जुट गई है। इसी कड़ी में नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण की तारीख भी तय कर दी गई है। बंगाल बीजेपी अध्यक्ष Samik Bhattacharya ने ऐलान किया है कि 9 मई को राज्य में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा।
दिलचस्प बात यह है कि बीजेपी ने 9 मई की तारीख खास वजह से चुनी है। इसी दिन महान कवि और नोबेल पुरस्कार विजेता Rabindranath Tagore की जयंती होती है। पार्टी इसे सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण दिन मानते हुए नए दौर की शुरुआत के तौर पर पेश कर रही है।
मुख्यमंत्री के नाम पर सस्पेंस
ऐतिहासिक जीत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। पार्टी नेतृत्व ने अभी तक किसी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है, लेकिन संभावित चेहरों को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सीएम पद की दौड़ में सबसे प्रमुख नाम Suvendu Adhikari का बताया जा रहा है। उन्होंने भवानीपुर सीट से मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। इस जीत का अंतर भी उल्लेखनीय रहा, जिससे उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। इससे पहले 2021 में भी उन्होंने नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को मात दी थी।
शुभेंदु अधिकारी के अलावा कई अन्य नेता भी मुख्यमंत्री पद की संभावित सूची में शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें Dilip Ghosh, Samik Bhattacharya, Agnimitra Paul और Roopa Ganguly जैसे नाम चर्चा में हैं। अब देखना होगा कि पार्टी केंद्रीय नेतृत्व किस चेहरे पर भरोसा जताता है या फिर कोई नया नाम सामने आता है।
चुनाव परिणामों ने बदली तस्वीर
चुनाव परिणामों ने राज्य की सियासत की दिशा ही बदल दी है। 293 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी ने 206 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। वहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस बार 100 के आंकड़े से नीचे सिमट गई और करीब 80 सीटों तक ही पहुंच सकी।
कांग्रेस को 2 सीटें मिलीं, जबकि आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) ने भी 2 सीटों पर जीत दर्ज की। CPI(M) और AISF को एक-एक सीट मिली है। फाल्टा विधानसभा सीट पर 21 मई को पुनर्मतदान होगा और इसके नतीजे 24 मई को घोषित किए जाएंगे।
नई सरकार पर टिकी नजरें
भारी जनादेश मिलने के बाद अब सबकी निगाहें नई सरकार के गठन और मुख्यमंत्री के नाम के ऐलान पर टिकी हैं। बीजेपी के लिए यह जीत न सिर्फ संगठनात्मक विस्तार का संकेत है, बल्कि राज्य में नई राजनीतिक शुरुआत का भी संदेश देती है। वहीं, टीएमसी के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का बड़ा अवसर माना जा रहा है।