उत्तर प्रदेश में 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती मामले में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बड़ा पक्ष रखा है। सरकार ने अपने जवाब में स्पष्ट किया है कि पहले से नियुक्त 67,867 कार्यरत शिक्षकों को सेवा से नहीं हटाया जाएगा। यह जवाब भर्ती प्रक्रिया और संशोधित मेरिट सूची से जुड़े विवाद के बीच दाखिल किया गया है।
नई मेरिट सूची तैयार, पात्र अभ्यर्थियों को मिल सकती है नियुक्ति
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के 13 अगस्त 2024 के आदेश के अनुपालन में संशोधित मेरिट सूची तैयार करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। सरकार ने कहा कि नई मेरिट सूची में शामिल पात्र अभ्यर्थियों को उपलब्ध रिक्त पदों पर नियुक्ति देने के लिए वह तैयार है, बशर्ते वे निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करते हों।
सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले का होगा पालन
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था केवल इसी विशेष मामले तक सीमित रहेगी और इसे भविष्य के मामलों में उदाहरण के तौर पर लागू नहीं किया जाएगा। सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट जो भी अंतिम आदेश देगा, उसका पूरी तरह पालन किया जाएगा।
क्या है पूरा विवाद?
69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया लंबे समय से कानूनी विवाद में रही है। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि भर्ती में आरक्षण नियमों का सही ढंग से पालन नहीं किया गया, जिससे आरक्षित वर्ग के कई उम्मीदवारों को नुकसान हुआ। इसी मुद्दे को लेकर मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा था।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी थी चिंता
13 अगस्त 2024 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सरकार को भर्ती की नई मेरिट सूची तैयार करने का निर्देश दिया था। इसके बाद पहले से नियुक्त हजारों शिक्षकों की नौकरी पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे थे। बाद में इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। अब राज्य सरकार के ताजा हलफनामे के बाद कार्यरत शिक्षकों को राहत मिली है। हालांकि, इस मामले में अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट को करना है और सभी पक्षों की निगाहें अब उसी पर टिकी हैं।