सोनीपत के खरखौदा क्षेत्र में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, स्थानीय विधायक पवन खरखौदा और भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया। मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इससे इलाके में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। शिकायतकर्ता सोनू सैनी ने पुलिस को बताया कि रामनिवास पाराशर नामक व्यक्ति ने अपनी फेसबुक आईडी से करीब 4 मिनट 21 सेकंड का वीडियो पोस्ट किया था। इस वीडियो में जनप्रतिनिधियों के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया, जिससे लोगों की भावनाएं आहत हुईं।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ BNS की धारा 296 (गाली-गलौज), 352 (शांति भंग करने के उद्देश्य से अपमान), 353 (लोक व्यवस्था प्रभावित करना) और 356 (मानहानि) के तहत मामला दर्ज किया है। सहायक जिला अटॉर्नी की राय के बाद सुप्रीम कोर्ट के ‘ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ फैसले के आधार पर FIR दर्ज की गई। मामले की जांच SI हरिप्रकाश को सौंपी गई है।वहीं, आरोपी रामनिवास पाराशर ने अपने बचाव में कहा है कि उन्होंने भ्रष्टाचार और अवैध कब्जों के मुद्दे को उठाने के लिए यह वीडियो बनाया था। उनका दावा है कि उन्होंने 9 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है, जिसमें 26 लोगों को पक्षकार बनाया गया है।
पाराशर ने यह भी आरोप लगाया कि नगर पालिका की जमीन, सार्वजनिक स्थलों और स्कूलों के आसपास बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे किए गए हैं। उन्होंने निर्माण कार्यों में वित्तीय गड़बड़ी, प्रशासनिक मिलीभगत और कोर्ट प्रक्रिया के दुरुपयोग के भी गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, शिकायतकर्ता का कहना है कि इस तरह की भाषा और वीडियो से सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है और प्रशासन की छवि पर असर पड़ता है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।